
ग्रामीणों ने बताया कि कुछ माह पहले गांव में एक मासूम बच्चे की कब्र खोदकर उसके शव का सिर गायब कर दिया गया था। इस घटना ने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया था। मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि हाल ही में गांव की एक महिला की कब्र से भी छेड़छाड़ की घटना सामने आ गई। लगातार हो रही इन घटनाओं से गांव में भय और असुरक्षा का माहौल है। ग्रामीण इन घटनाओं को जादू-टोना और तांत्रिक गतिविधियों से जोड़कर देख रहे हैं तथा पूरे मामले की निष्पक्ष और गंभीर जांच की मांग कर रहे हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस द्वारा जांच किए जाने की बात तो कही जा रही है, लेकिन अब तक किसी भी मामले का खुलासा नहीं हो सका है। साथ ही हल्दी चौकी प्रभारी के व्यवहार को लेकर भी ग्रामीणों में नाराजगी देखी गई। इसी नाराजगी के चलते बड़ी संख्या में ग्रामीण कलेक्ट्रेट पहुंचे और प्रशासन के खिलाफ जमकर आक्रोश जताया।
कलेक्ट्रेट पहुंचे ग्रामीणों ने अधिकारियों को ज्ञापन सौंपते हुए तीन प्रमुख मांगें रखीं, जिनमें कब्र से छेड़छाड़ करने वालों की तत्काल गिरफ्तारी, मामले की उच्चस्तरीय जांच तथा संबंधित चौकी प्रभारी पर कार्रवाई शामिल रही। अधिकारियों ने ग्रामीणों को जल्द जांच कर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया, जिसके बाद ग्रामीण वहां से वापस लौटने लगे।

हालांकि मामला यहीं शांत नहीं हुआ। कलेक्ट्रेट से लौटते समय बालोद-दुर्ग मुख्य मार्ग पर टेकापार के पास यातायात विभाग की टीम ने ग्रामीणों के वाहनों को रोक लिया। बताया गया कि मालवाहक वाहनों में यात्रियों को बैठाकर ले जाने को लेकर यातायात कर्मचारी चालानी कार्रवाई की तैयारी कर रहे थे।
इस कार्रवाई से ग्रामीण भड़क उठे और देखते ही देखते बड़ी संख्या में लोग सड़क पर बैठ गए। ग्रामीणों ने बालोद-दुर्ग मुख्य मार्ग पर चक्काजाम कर दिया, जिससे दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। करीब डेढ़ घंटे तक चले इस चक्काजाम के दौरान मार्ग पूरी तरह बाधित रहा और मौके पर तनावपूर्ण स्थिति बन गई।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी तत्काल मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों को यातायात नियमों की जानकारी देते हुए समझाइश दी और चेतावनी देकर वाहनों को छोड़ने की बात कही। इसके बाद चालानी कार्रवाई नहीं किए जाने पर ग्रामीण शांत हुए और चक्काजाम समाप्त कर अपने गांव लौट गए।
फिलहाल माहुदबी में कब्रों से छेड़छाड़ की घटनाएं अब भी रहस्य बनी हुई हैं। वहीं ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ही मामले का खुलासा नहीं हुआ तो वे आगे और बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होंगे।




















