मिली जानकारी के अनुसार प्रार्थी नेमीचंद साहू ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि वह 20 जून 2025 की सुबह अपनी पत्नी और बच्चों के साथ अपने पुराने गांव तिलईरवार (जिला राजनांदगांव) गया था। रात में वहीं रुकने के बाद 21 जून की दोपहर करीब 2 बजे घर लौटने पर उसने देखा कि कमरे के दरवाजे का ताला टूटा हुआ है और लोहे की आलमारी का लॉकर भी क्षतिग्रस्त था। आलमारी में रखी नगदी और सोना-चांदी के जेवरात गायब थे।

रिपोर्ट के बाद जांच के दौरान सामने आया कि चोरी की वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी चोरी का सामान ग्राम तिलईरवार स्थित एक घर में छिपाकर रखे हुए थे। संदेह के आधार पर पूछताछ करने पर आरोपियों ने वारदात में शामिल होना स्वीकार किया, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया।
जांच में यह भी सामने आया कि 20 जून की रात आरोपी खिलेन्द्र कुमार साहू उर्फ बंटी और उसका साथी महेश साहू उर्फ महेशू, जो प्रार्थी का रिश्तेदार बताया जा रहा है, मोटरसाइकिल से कसही पहुंचे थे। दोनों को प्रार्थी के घर और कमरे की पूरी जानकारी पहले से थी। इसी का फायदा उठाकर उन्होंने घर के पीछे बाड़ी की ओर से प्रवेश कर शयनकक्ष का ताला तोड़ा और आलमारी में रखे जेवरात व नगदी लेकर फरार हो गए।

चोरी के जेवरात और रकम को बाद में महेशू की मां पद्मा साहू के घर तिलईरवार में छिपाकर रखा गया था। वहीं कुछ सामान ग्राम टप्पा निवासी भूपेन्द्र कुमार साहू और नूतेश कुमार साहू के पास बिक्री के लिए ले जाने की बात सामने आई, जिनसे भी संपत्ति बरामद की गई।
आरोपियों के कब्जे से सोने का लॉकेट, दो जोड़ी झुमके, एक मंगलसूत्र, एक छोटा हार, पांच जोड़ी चांदी की पायल, पांच चांदी के सिक्के, मोबाइल फोन और 28 हजार 500 रुपये नगद बरामद किए गए। बरामद संपत्ति की पहचान प्रार्थी और उसकी पत्नी द्वारा की गई, जिन्होंने इसे अपना बताया।
बताया जा रहा है कि मुख्य आरोपी खिलेन्द्र कुमार साहू उर्फ बंटी और महेश साहू उर्फ महेशू पूर्व में भी चोरी के मामलों में जेल जा चुके हैं और उनके खिलाफ अलग-अलग थानों में आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं।
प्रकरण में पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद आरोपियों को 15 एवं 17 मार्च को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।




















