बालोद। राज्य स्तरीय केंद्रीयकृत प्राथमिक (कक्षा 5वीं) बोर्ड परीक्षा के पहले ही दिन प्रश्नपत्र और उत्तर पुस्तिका की गुणवत्ता को लेकर गंभीर अव्यवस्था सामने आई है। परीक्षार्थियों को दिए गए प्रश्नपत्र का कागज बेहद पतला और कमजोर होने के कारण कई बच्चों की कॉपियां लिखते-लिखते फट गईं। स्याही दूसरी तरफ साफ दिखाई देने से अन्य प्रश्न पढ़ने और उत्तर लिखने में भी दिक्कतें हुईं।
जानकारी के अनुसार गणित विषय के प्रश्न हल करने के लिए उत्तर लिखने की पर्याप्त जगह उपलब्ध नहीं कराई गई थी। रफ कार्य के लिए भी अलग से कोई स्थान नहीं दिए जाने के कारण कई बच्चे व्यवस्थित तरीके से सवाल हल नहीं कर पाए। इससे परीक्षा केंद्रों में परीक्षार्थियों और अभिभावकों में नाराजगी देखने को मिली।
इस मामले को लेकर शालेय शिक्षक संघ छत्तीसगढ़ ने प्रश्नपत्र की गुणवत्ता और परीक्षा प्रबंधन पर जांच की मांग उठाई है। संघ के प्रदेश मीडिया प्रभारी एवं जिलाध्यक्ष जितेंद्र शर्मा ने कहा कि गुणवत्ताविहीन पेपर के कारण बच्चों को अनावश्यक परेशानी हुई है, इसलिए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
ये खामियां आईं सामने
परीक्षा के दौरान कई तकनीकी और प्रबंधन संबंधी कमियां भी सामने आईं। प्रश्नपत्र या उत्तर पुस्तिका में पर्यवेक्षक के हस्ताक्षर के लिए स्थान नहीं दिया गया था। गणित विषय में उत्तर लिखने के लिए पर्याप्त जगह नहीं होने से बच्चे सिस्टमेटिक तरीके से हल नहीं कर पाए। प्रश्नपत्र निर्माण में ब्लूप्रिंट को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। वहीं परीक्षा के नाम को लेकर भी भ्रम की स्थिति रही—कहीं इसे केंद्रीयकृत प्राथमिक परीक्षा, कहीं प्राथमिक पात्रता परीक्षा और कहीं प्राथमिक प्रमाण-पत्र परीक्षा कहा जा रहा है।
इसके अलावा उत्तर पुस्तिका की पैकिंग और प्रक्रिया को लेकर भी अलग-अलग दिशानिर्देश दिए जाने की बात सामने आई है। शिक्षक संघ का कहना है कि जब राज्य सरकार “शिक्षा गुणवत्ता वर्ष” मना रही है, तब इस तरह की लापरवाही चिंताजनक है।
संघ ने मांग की है कि भविष्य में प्रश्नपत्र और उत्तर पुस्तिका की गुणवत्ता सुधारने के साथ परीक्षा प्रबंधन को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाया जाए, ताकि बच्चों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।




















