
पहली बार राजधानी से सीधी रेल कनेक्टिविटी
इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पूरी होने के बाद बस्तर क्षेत्र पहली बार राज्य की राजधानी रायपुर से सीधी रेल लाइन से जुड़ जाएगा। इसका सीधा लाभ यात्रियों को तेज और सस्ती यात्रा सुविधा के रूप में मिलेगा, जबकि खनिज परिवहन में यह नई क्रांति लाएगा। बस्तर के सामाजिक और आर्थिक परिदृश्य में यह कदम गेम-चेंजर साबित होगा।
औद्योगिक जरूरतों की रीढ़
दल्लीराजहरा की लौह अयस्क खदानों की घटती उपलब्धता के बीच रावघाट खदानों को भिलाई इस्पात संयंत्र से जोड़ने वाली यह लाइन उद्योगों के लिए ऑक्सीजन का काम करेगी। रेल विकास निगम लिमिटेड के मुताबिक, 21.94 लाख घन मीटर मिट्टी कार्य का अधिकांश भाग पूरा हो चुका है। 3 में से 2 बड़े पुल, 61 में से 55 छोटे पुल और 5 रोड ओवर ब्रिज में अधिकांश निर्माण संपन्न है।

चुनौतियों के बीच हासिल की रफ्तार
वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित इस इलाके में परियोजना का निर्माण आसान नहीं रहा। नक्सली हमलों में अब तक 4 मजदूर और 2 सुरक्षाकर्मी शहीद हो चुके हैं, जबकि उपकरणों को भी नुकसान पहुंचाया गया। इसके बावजूद एसएसबी की सुरक्षा और प्रशासनिक दृढ़ता से काम में तेजी आई।
सिर्फ रेलवे नहीं, विकास की नई राह
पूरी परियोजना में 16 प्रमुख पुल, 19 रोड ओवर ब्रिज, 45 रोड अंडर ब्रिज और 176 छोटे पुल बनाए जा रहे हैं। दिसंबर तक तारोकी–रावघाट खंड पर ट्रेनें चलने लगेंगी, जो खनिज, सामान, रोजगार और अवसर का नया दौर लेकर आएंगी। यह रेलवे लाइन न सिर्फ बस्तर को मुख्यधारा से जोड़ेगी बल्कि यहां निवेश और बुनियादी ढांचे के विस्तार को भी पंख लगाएगी।
बस्तर की पटरियों पर दौड़ती ये ट्रेनें आने वाले समय में विकास, समृद्धि और उम्मीद का प्रतीक बनेंगी।




















