प्रदेश रूचि

15 मई को लगी थी शिकायत की चिंगारी, 10 जून को फिर भड़की बिजली विभाग की लापरवाही की आग!

प्रदेशरुचि (सच्ची खबर, पक्की खबर)

 बालोद, बालोद जिले में बिजली विभाग की लापरवाही थमने का नाम नहीं ले रही है। 15 मई को बिजली विभाग की हेल्पलाइन फेल होने और कर्मचारियों की उदासीनता पर “प्रदेशरुचि” ने सच्चाई उजागर की थी। अब ठीक 26 दिन बाद 10 जून की रात को एक बार फिर वही नजारा दोहराया गया — बिजली गुल, हेल्पलाइन बंद और जिम्मेदार बेपरवाह!

स्थानीय लोग पहुंचे शिकायत लेकर, जवाब मिला—‘कोई नहीं है ड्यूटी पर’
मंगलवार रात अचानक बिजली बंद होने पर स्थानीय लोग परेशान होकर खुद बिजली कार्यालय पहुंचे। लेकिन वहां ड्यूटी पर मौजूद कर्मचारी का रवैया बेहद लापरवाह रहा। शिकायत पर ध्यान देने के बजाय टालमटोल की गई, जिससे नागरिकों में भारी नाराजगी देखी गई।

डीई तक पहुंची शिकायत, लेकिन मिली ‘चुप्पी’
मामले की जानकारी जब जिले के विद्युत अभियंता (डीई) को दी गई, तो उनके जवाब ने लोगों को और निराश कर दिया। उन्होंने कर्मचारियों की लापरवाही पर कोई ठोस कार्रवाई तो नहीं की, उल्टा बात को नजरअंदाज करते हुए टालने की कोशिश की। यह रवैया बताता है कि विभागीय लापरवाही सिर्फ निचले स्तर पर नहीं, बल्कि शीर्ष तक फैली हुई है।

15 मई को प्रकाशित खबर

सुशासन तिहार के बीच बालोद में बिजली विभाग की पोल खुली

पिछली रिपोर्ट के बाद भी नहीं सुधरी व्यवस्था
गौरतलब है कि 15 मई को ‘प्रदेशरुचि’ ने बिजली विभाग की हेल्पलाइन 07749-222022 और मोबाइल 6269506921 पर कॉल न लगने की सच्चाई उजागर की थी। उस वक्त कार्यपालन अभियंता एस.के. बंद ने नया नंबर 6232945233 जारी कर सुधार का भरोसा दिया था। लेकिन अब फिर वही हालात सामने आने से विभाग के दावे खोखले साबित हो रहे हैं।

लोगों का सवाल – “अगर शिकायत पर भी सुनवाई नहीं होगी तो हम जाएं तो जाएं कहां?”
गर्मी और उमस के बीच जब रात को बिजली चली जाती है और सहायता के लिए दिए गए नंबर भी काम नहीं करते, तो आम जनता के पास क्या विकल्प बचता है? ये सवाल अब लोगों के गुस्से में तब्दील हो चुके हैं।

बालोद जिले में बिजली विभाग की कार्यप्रणाली अब सवालों के घेरे में है। लगातार दो बार सामने आए ऐसे मामले बताते हैं कि सुधार की कोई मंशा नहीं दिख रही। विभागीय अधिकारियों की चुप्पी और कर्मचारियों की बेरुखी आम जनता को बेहाल कर रही है। अब जनता चाहती है जवाब, और वह भी ठोस कार्रवाई के रूप में—न कि सिर्फ वादों में।

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