बस्तर, जगदलपुर।छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में स्थित विश्वप्रसिद्ध पर्यटन स्थल चित्रकोट जलप्रपात में नाका समिति को लेकर उपजे विवाद ने राजनीतिक रंग ले लिया है। नाका समिति को एसडीएम द्वारा सील किए जाने के विरोध में प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) अध्यक्ष दीपक बैज के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और स्थानीय ग्रामीणों ने गुरुवार को एसडीएम कार्यालय का घेराव करते हुए अनोखा प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन के दौरान पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज हाथों में मुर्गा, बकरा और शराब की बोतल लेकर पहुंचे, जो इस आंदोलन को अलग ही रंग दे गया। बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और स्थानीय ग्रामीणों ने इस विरोध में भाग लिया।
क्या है मामला?
बताया जा रहा है कि हाल ही में चित्रकोट पर्यटन स्थल पर एक वीआईपी दौरे के दौरान एसडीएम ने नाका समिति से भोजन व्यवस्था कराने की मांग की थी। समिति द्वारा यह व्यवस्था नहीं की जा सकी, जिसके बाद एसडीएम ने कार्रवाई करते हुए नाका को सील कर दिया। साथ ही, नाका समिति पर पर्यटकों से अवैध वसूली के आरोप भी लगाए गए।
राजनीतिक तूल पकड़ता मामला
इस कार्रवाई को एकतरफा और गलत बताते हुए कांग्रेस ने इसे प्रशासन की तानाशाही करार दिया। दीपक बैज ने कहा कि “नाका समिति स्थानीय ग्रामीणों के रोजगार का जरिया है। बिना जांच के समिति पर आरोप लगाना और उसे सील करना सरासर अन्याय है।”
उन्होंने आगे कहा, “अगर प्रशासन ने नाका समिति को दबाने की कोशिश की तो कांग्रेस चुप नहीं बैठेगी। जनता के हक की लड़ाई सड़क से सदन तक लड़ी जाएगी।”
प्रदर्शन की खास बात
इस विरोध प्रदर्शन की सबसे खास बात थी, नेताओं का हाथों में मुर्गा, बकरा और शराब की बोतल लेकर प्रदर्शन करना। इससे प्रशासन पर व्यंग्यात्मक हमला करते हुए यह संदेश दिया गया कि आखिरकार नाका समिति से प्रशासन चाहता क्या है?
प्रशासन की चुप्पी
विवाद के बाद से अब तक प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मगर यह मामला अब राजनीतिक गरमाहट के साथ स्थानीय लोगों के आक्रोश का कारण भी बनता जा रहा है।
स्थानीय लोगों की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि नाका समिति उनके जीवनयापन का साधन है और उसे बिना ठोस सबूतों के सील करना उनके अधिकारों का हनन है। उन्होंने नाका को दोबारा चालू करने और समिति को पुनः बहाल करने की मांग की है।
बस्तर की शांत वादियों में इस बार मुर्गा-बकरा और राजनीति की अनोखी गूंज सुनाई दी। चित्रकोट की सुंदरता के बीच अब प्रशासन और जनता के बीच विश्वास की दरार को पाटना एक बड़ी चुनौती बन चुका है।




















