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*करोड़ो की राजस्व देने वाले तांदुला जलाशय इन दिनों अपनी ही बदहाली पर बहा रही है आसु*

बालोद।बालोद जिले को करोड़ो रुपय की राजस्व देने वाले तांदुला जलाशय इन दिनों अपनी बदहाली पर आसु बहा रही हैं ।जलाशय के तट मार्ग में बारिश का पानी भर गया हैं जिसके कारण मार्ग और भी ज्यादा बदहाल हो गई हैं। दलदल के कारण दुपहिया वाहन चालक फिसलकर गिर रहे हैं । जल ससाधन विभाग द्वारा मेंटेनेश के नाम पर केवल खानापूर्ती की जा रही । जलाशय के निचे हिस्से में छोटे छोटे पेड़ पौधे अब झाड़ियो में तब्दील हो गई हैं। इस पर जल ससाधन विभाग द्वारा ध्यान न देकर केवल खानापूर्ती ही की जा रही हैं । तांदुला जलाशय के तट पार् में बारिश का पानी जगह जगह भर जाने से दलदल में तब्दील हो गई हैं ।जिसके कारण मोटरसाइकिल चालक फिसलकर कर गिर रहे हैं ।तांदुला जलाशय के सकरी तट मार्ग में मोटरसाइकिल की आवाजाही को जिला प्रशासन द्वार बंद कर दिया गया लेकिन मोटरसाइकल चालक जान जोखिम में डालकर दौड़ा रहे है।

 

आपको बता दे की बालोद,बेमेतरा व् दुर्ग जिले की जीवनदायनी तांदुला जलाशय से बालोद जिले को सालाना करोड़ो रुपये का राजस्व मिलता हैं । लेकिन विभाग की अनदेखी के चलते तांदुला जलाशय के ऊपर तट में बारिश का पानी जगह जगह भर जाने के कारण दलदल में तब्दील हो गई हैं ।जलाशय में आज की स्थिति में 23.50 फिट पानी का भराव हो गया है। इस मनोरम दृश्य को देखने के लिए सैकडो की सख्या में लोग अपने परिवार सहित जलाशय में पहुचकर इस नजारे को मोबाइल व् कैमरे में कैद कर रहे हैं।

 

तांदुला जलाशय के तट पार् में दुपहिया वाहनों की आवाजाही

तांदुला जलाशय में तेजी से जल भराव हो रहा है जिसे देखने के लिए सुबह से लेकर देर शाम तक दुपहिया वाहन चालको की आवाजाही हो रही हैं ।

जलाशय के तट मार्ग में बारिश का पानी भरा हुआ हैं। दुपहिया वाहनों की आवाजाही से मार्ग पूरी तरह से दलदल में तब्दील हो गई हैं जिसके कारण वाहन चालक फिसलकर गिर रहे हैं ।जलाशय के तट मार्ग में दुपहिया वाहन चालको को अब तक जिला प्रशासन द्वारा कोई रोक टोक नही किया गया हैं जिसके कारण लोग बेधड़क होकर मोटरसाइकिल को चलाते हुए आवाजाही कर रहे हैं जो कभी भी बड़ी दुर्धटना से इंकार नही किया जा सकता । जलाशय के तट मार्ग काफी सकरा हैं जहाँ से लोग अपने परिवार सहित दुपहिया वाहनों को चलाते हुए मार्ग में आवाजाही करते हैं जो खतरनाक साबित हो सकता हैं । वाहन चालक यदि अनियंत्रित हुए तो सीधे जलाशय के पानी में या 20 फिट नीचे सड़क मार्ग पर गिरेंगे जिसके चलते बड़ी धटना कभी भी घट सकती हैं ।

 

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