बालोद। शासन शिक्षा के नाम पर करोड़ो रुपये खर्च करती हैं लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और हैं, जिले में उच्च शिक्षा की स्थिति बहुत ही दयनीय है। प्राध्यापकों की रिक्त पदों की पूर्ति आजतक नहीं हो पाई है। प्राध्यापकों की कमी के कारण पढ़ाई संविदा और अतिथि प्रोफेसर के भरोस चल रही है। और-तो-और कॉलेज में एक ही चपरासी है। लीड कॉलेज की इस दयनीय स्थिति की जानकारी जिम्मेदारों को भी है। इसके बाद भी शासन-प्रशासन द्वारा ध्यान नहीं दिया जाना समझ से परे है। कालेज में सभी पदों को मिलाकर कुल 89 पद स्वीकृत हैं, जिसमें से मात्र 29 पद ही भरे हैं जबकि 60 पद रिक्त है। यही नहीं यहां प्राचार्य के पद भी रिक्त हैं। जबकि अब कॉलेज में प्रवेश की प्रक्रिया अंतिम चरण में चल रही है। जबकि ये कॉलेज पूरे जिलेभर के कॉलेजों का लीड कॉलेज है।लीड कॉलेज में स्टाफ की कमी है। यही वज़ह है कि अगर ज्यादा भीड़ हुई तो भीड़ को संभालना मुश्किल हो जाता है। इससे कई बार अव्यवस्था का आलम हो जाता है।
49 पद में से मात्र 17 पर नियमित प्राध्यापक
हम बात कर रहे हैं जिले के धनश्याम सिंह गुप्त पीजी कॉलेज बालोद की। इस कॉलेज में प्राध्यापक और सहायक प्राध्यापकों के कुल 49 पद स्वीकृत है। इन 49 पदों में से मात्र 17 पद ही नियनित प्राध्यापक है। शेष 32 पद पर पढ़ाई की जिम्मेदारी अतिथि प्राध्यापक संभाल रहे हैं। शासन की ओर से हर साल लीड कॉलेज में प्राध्यापकों सहित विभिन्न समस्याओं की जानकारी मांगी जाती है। शासन द्वारा सिर्फ जानकारी मांग कर खानापूर्ति कार्रवाई कर ली जाती है। समस्या जस की तस बनी रहती है। इस कॉलेज के साथ भी ऐसा ही हो रहा है।
प्राचार्य का पद भी प्रभार के भरोसे
यहां सबसे से चौकाने वाली बात यह है कि प्राध्यापकों की बात तो छोड़ दें प्राचार्य का पद भी प्रभारी के भरोसे चल रहा है। यहां प्राध्यापक के 8 पद स्वीकृत हैं, जिसमें सभी आठ पद खाली हैं। इसी तरह सहायक प्राध्यापकों के कुल 41 पद में से 17 सहायक प्राध्यापक और अभी भी 24 पद रिक्त है। सबसे बड़ी बात इस कॉलेज में प्राचार्य के पद भी रिक्त है।
शासन द्वारा सिर्फ जानकारी मांग कर की जाती है खानापूर्ति
लीड पीजी कॉलेज में प्राध्यापक, सहायक प्राध्यापकों व प्राध्यापक के कुल 49 पद स्वीकृत हैं। इन 49 पदों में से मात्र 17 पदों पर ही नियमित प्राध्यापक हैं। शेष 32 पद पर पढ़ाई की जिम्मेदारी अतिथि प्राध्यापक संभाल रहे हैं। शासन की ओर से हर साल लीड कॉलेज में प्राध्यापकों सहित विभिन्न समस्याओं की जानकारी मांगी जाती है। शासन द्वारा सिर्फ जानकारी मांग कर खानापूर्ति कर ली जाती है। समस्या जस की तस बनी रहती है। इस कॉलेज के साथ भी ऐसा ही हो रहा है। प्राध्यापक के 8 पद स्वीकृत हैं, जिसमें सभी आठ पद खाली हैं। इस लीड कॉलेज में भृत्य के तीन पद स्वीकृत हैं और दो पद खाली हैं। चतुर्थ श्रेणी में कुल 20 पद स्वीकृत हैं, जिसमें 18 पद खाली है। तृतीय श्रेणी में कुल 16 पद हैं जिसमें 7 पद भरे हैं व 9 पद खाली हैं। यहां सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि प्राध्यापकों की बात तो छोड़ दें, प्राचार्य का पद भी प्रभारी के भरोसे चल रहा है।बालोद पीजी कॉलेज जिले के 16 शासकीय और 4 निजी कॉलेज का लीड कॉलेज है। इस वजह से इस कालेज पर जिलेभर के कॉलेजों का दबाव रहता है। स्टाफ की कमी के कारण कॉलेज में पढ़ाई के अलावा अन्य कामों पर भी हमेशा दबाव बना रहता है। जानकारी के मुताबिक शासन की ओर से साल में दो बार हर छह महीने में प्रदेशभर के कॉलेजों की जानकारी मंगाई जाती है कि क्या-क्या समस्या और परेशानी है। इसके बाद शासन की ओर से कोई कदम नहीं उठाया जाता।