बालोद जिला के नारागाॅव जंगल मे सियादेवी मंदिर के पास स्थित वाटर फाल की रौनक देखने आने वाले कई लोग खतरो के खिलाड़ी नजर आ रहे है.हालाकि यहाॅ का नजारा लोगो के लिये आकर्षण का प्रमुख केन्द्र बना हुआ है.लेकिन यहाॅ पर खतरनाक जगहो पर जाने वाले को रोकने वाला कोई नही है.कई लोग बेरोकटोक इस वाटरफाल के खतरनाक जगहो पर भी चढ़ रहे है.जिससे कभी भी गंभीर हादसा हो सकता है.सुरक्षा के नाम पर यहाॅ पर कुछ जगहो पर नही जाने प्रवेश निषेध का फ्लेक्स लगा दिया गया है.जिसे लोग नजर अंदाज कर उन जगहो पर भी जा रहे है.बता दे कि कुछ साल पहले यहाॅ पिछलकर गिरने व डूबने से तीन युवको की मौत भी हो चुकी है।
ये नजारा है..नारागाॅव जंगल मे सियादेवी मंदिर के पास स्थित वाटर फाल का..अमूमन हर साल मानसून सीजन मे यहाॅ ऐसा नजारा देखने को मिलता है..इस सीजन मे यहाॅ के प्राकृतिक सौदंर्य के नजारे को देखने जिले सहित दूरस्थ अंचल के हजारो पर्यटक भी यहाॅ पहुचते है।जंगल से होकर चट्टानो से होते हुये आ रही बारिश का पानी व लगभग 25 फीट उॅचे पत्थरो से लगातार नीचे गिर रहे पानी के स्थल तक जाना कई मायने मे खतरनाक है..लेकिन इसे विडम्बना हि कहा जाये कि यहाॅ कोई भी स्थान मे जाने वालो को रोकने वाला कोई नही है..कुछ लोग दूर से हि इस नजारे का आनंद लेते है.तो कई ऐसे लोग इस स्थल के खतरनाक जगहो पर भी चले जाते है.देखा गया कि लोग बेरोकटोक कई खतरनाक जगहो पर जाकर सेल्फी ले रहे है या फोटो शूट कर रहे है.जो कभी भी गंभीर हादसा के शिकार हो सकते है.सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर कुछ जगहो पर नही जाने के लिये प्रवेश निषेध का फ्लेक्स लगा दिया गया है.जिसे लोग नजर अंदाज कर रहे है.जबकि यहाॅ कुछ साल पहले धटना धट चुकी है..तीन युवको की मौत भी हो चुकी है.यहाॅ धूमने आने वाले भ्ज्ञी इस बात को स्वीकार करते है कि लोग खतरनाक जगहो पर बेरोकटोक आ जा रहे है।
हर साल इस सीजन मे यहाॅ आवश्यकता है सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम का..साथ हि कुछ जगहो पर नही जाने के लिये कड़ाई से प्रतिबंध का…। ताकि यहाॅ आने वाले लोग किसी बुरे हादसे का शिकार न हो।लेकिन यहां आने वाले सैलानियों के सुरक्षा को लेकर न मंदिर समिति द्वारा न ही प्रशासन द्वारा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करती है जबकि इस जगह पर पहले भी ऐसे ही सैलानियों का दुर्घटना में मौत का मामला सामने आ चुका है।