
बालोद -पूरे प्रदेश में मानसून पूरी तरह सक्रिय हो चुका है जिसके चलते प्रदेश के तकरीबन सभी हिस्सों में बीते दो दिनों से झमाझम बारिस हो रही है बारिस से किसानों के चेहरे भी खिले और राहत की बारिस साबित हुआ है लवकिं दूसरी तरह बालोद जिला मुख्यालय सहित आसपास में एन एच के ठेकेदार और जिम्मेदारों की लापरवाही से ये बारिस शहरवासियों के लिए आफत की बारिस बन।चुकी है। सोमवार को जिला मुख्यालय बालोद बारिश ने शहर को भिगोया, तो वही दूसरी ओर बारिश कुछ लोगो के परेशानी का सबब भी बनी। खासकर बालोद शहर के गंजपारा के व्यवसायी बेहद परेशान और चिंतित है। दरअसल झलमला से शेरपार तक चल रहे सड़क निर्माण कार्य में नगर के गंजपारा में नाली निर्माण नही होने की वजह बारिश का पानी दुकानो के अंदर जा रहा है। जिससे कई दुकानों को क्षति पहुच रही है।
मारवाड़ी भोजनालय के दुकान के नीचे की जमीन धसक रही है। इतना ही नही कई दुकानो के अंदर पानी घुसने से सम्बंधित व्यवसायी काफी चिंतित है। जिसकी सुनवाई करने वाला कोई नही मामले पर भोजनालय संचालक ने कहा कि जब से सड़क काम शुरू हुआ वे लोग एन एच के अधिकारियों को बोल कर थक गए लेकिन उनके।समस्यायों को कोई नही सुना वही अब बारिस से उनका दुकान बुरी तरह प्रभावित हुआ है वही वार्ड 12 के पार्षद राजू पटेल ने कहा कि इस सड़क निर्माण में लापरवाही की सारी सीमा को पार कर दिया कई बार एनएच के एसडीओ को भी फोन लगाए लेकिन उनके द्वारा जनप्रनिधि का भी कॉल रिसीव नही किया जा रहा है। पोल शिफ्टिंग के बाद कई जगहों पर पुराने पोल को छोड़ दिया गया। सड़क खुदाई के बाद मलबा को किनारे छोड़ दिया गया जिससे अब बारिस का पानी दुकानों के भीतर घुसने लगा।
बिना ड्रेनेज बना दिया सड़क
मामले पर स्थानीय लोगो ने बताया कि एन एच930 के अधिकारियों को सड़क काम करने की इतनी जल्दबाजी थी कि वे सड़क तो बना दिये लेकिन आज तक नाली निर्माण नही किये जिसका दुष्परिणाम आम जनता को भुगतना पड़ रहा । जबकि इस सड़क निर्माण के पहले दोनों तरफ ड्रेनेज नाली का निर्माण किया जाना था ।
लापरवाही की शिकायत पर नही हो।रही सुनवाई
मामले में चेम्बर आफ कामर्स के अध्यक्ष व वार्ड पार्षद राजू पटेल ने कहा कि यहां की समस्याओं को लेकर स्थानीय व्यवसायी औऱ आम लोग बालोद जिला प्रशासन को भी एक बार लिखित व 3 से 4 बार मौखिक शिकायत कर चुके बावजूद इसके मामले पर कोई सुधार नही हुआ जिससे यह प्रतीत होता है ठेकेदार पर प्रशासनिक के साथ साथ राजनीतिक सरंक्षण है जिसके चलते पूरे मनमानी से काम को किया जा रहा है और इसका दुष्परिणाम बालोद वासियो को भुगतना पड़ रहा है।