बालोद-छत्तीसगढ़ में एक ओर शराबबंदी को लेकर हंगामा मचा हुआ है। राजनीतिक दलों की बयानबाजी जारी है। भाजपा द्वारा प्रदेश में शराब बंदी को लेकर आंदोलन भी कर चुकी हैं वही दूसरी ओर भाजपा समर्थित करहीभदर के सरपँच लीलाराम डड़सेना ग्रामीणों के साथ करहीभदर में देशी शराब दुकान खोलने सहित 4 सूत्रीय मांग को लेकर दो दिन पहले कलेक्ट्रेट पहुंच गए और ज्ञापन सौंपा।
जगन्नाथपुर सरपंच ने की थी ये पहल
बता दे कि बालोद ब्लाक के जगन्नाथपुर साकरा भाजपा समर्थित सरपँच है जो गांव में शराबबंदी को लेकर कलेक्टर को ज्ञापन सौपा गया था। तो दूसरी तरफ गांव में बैठक कर शराबबंदी व अवैध शराब बिक्री गांव में शराब पीते नजर आने पर ग्रामीण स्तर और कानूनी कार्यवाही को लेकर गांव में प्रस्ताव पारित किया था सरपंच के पहल की चौतरफा तारीफ भी हुई थी दूसरी तरफ करहिभदर का मामला लोगो के लिए थोड़ा आश्चर्यजनक है सिर्फ गांव के राजस्व को बढ़ाने शराब दुकान खोलने की मांग लोगो के गले से नीचे उतर नही रही है । जबकि इस मांग में ग्रामीणों के साथ भाजपा समर्थित सरपंच खुद शामिल है।
आपको बतादे एक तरफ भाजपा शराबबंदी की मांग करते हैं वही दूसरी ओर भाजपा समर्थित सरपँच के द्वारा शराब दुकान खोलने की मांग की जा रही हैं। ग्रामीणों की मांगों को प्रशासन द्वारा ध्यान नही देने से ग्रामीण नाराज होकर गुरुवार को कलेक्ट्रेट पहुचकर कलेक्टर और एसपी को ज्ञापन सौपकर 14 जून को ग्राम करहीभदर में धरना प्रदर्शन करने की चेतावनी दिया है। ग्रामीणों ने कहा कि, करीब 10 साल पहले गांव में शराब की दुकान थी। इससे बाजार में रौनक रहती थी। दुकान खुले तो फिर रौनक बढ़ जाए। अवैध शराब की खपत भी बहुत हो रही है। ऐसे में अच्छा है कि सरकारी शराब दुकान खोल दी जाए। कलेक्टर को ज्ञापन देने पहुंचे ग्रामीणों ने इसके अलावा तीन और मांगे भी रखी हैं। इसमें उप तहसील, पुलिस थाना खोलने और अतिक्रमण हटाने की है। गांव के सरपंच लीलाराम डडसेना ने बताया कि, हम चार बिंदुओं को लेकर प्रशासन के पास पहुंचे हैं। काफी लंबे समय से यह मांग करते आ रहे हैं। गांव से करीब 15 किलोमीटर गुरुर मुख्यालय पड़ता है। लोगों को आने-जाने में काफी दिक्कतें होती हैं। गांव की आबादी काफी ज्यादा है। अगर यहां तहसील बनाई जाए तो करहीभदर सहित पास के लोगों को भी फायदा होगा।
प्रशासन को पांच दिन का अल्टीमेटम
ग्रामीणों ने कहा कि हम लगातार प्रशासन से मांग करके थक गए हैं। यदि हमारी मांगों को 13 जून तक पूरा नहीं किया गया तो ग्रामीणों के साथ धरना प्रदर्शन करेंगे। ग्रामीण एवं सरपंच ने प्रशासन को पांच दिनों का अल्टीमेटम दिया है। ग्रामीण प्रमुखता से शराब दुकान खोलने की मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि अवैध शराब को लेकर कई बार शिकायत हुई है। कार्रवाई भी होती है। बावजूद इसके अवैध शराब पर किसी तरह का कोई लगाम नहीं लग पाई है। इससे बेहतर है कि गांव में शराब दुकान खोली जाए।
ग्रामीणों द्वारा करहीभदर में शराब दुकान खोलने की जा रही मांग
वैसे तो ग्रामीण चार बिंदुओं में अपनी मांगों को रख रहे हैं, पर सबसे प्रमुख मांग शराब दुकान की है। काफी लंबे समय से इस गांव में शराब दुकान की मांग चल रही है। ग्रामीणों का कहना है कि, गांव में शराब दुकान होने से रौनक रहती थी। व्यापार अच्छा था और यहां का मवेशी एवं सब्जी बाजार काफी विख्यात है वहां भी रौनक हुआ करती थी। शराब दुकान बंद हुई तो रौनक भी खत्म हो गई। अब यहां पर व्यापार काफी सिमट गया है।




















