
उन्होंने यह भी कहा की आज भी छत्तीसगढ़ में लड़की और लड़का में अंतर किया जाता है, बहन, बेटी, पत्नी और माँ के रूप में जब हम उनकी भूमिका को देखते है, तो उनके प्रति मन में काफ़ी सम्मान बढ़ जाता है, लेकिन अपेक्षाकृत उनको आगे बढ़ाने के लिये होने वाला प्रयास नगण्य है। बस इसी जागरूकता को छत्तीसगढ़ के घर घर तक पहुंचाना उनकी मुहीम का हिस्सा है।
माता पिता का यह सपना होता है की उनके बच्चे पढ़ लिख कर बड़ा बने हम जब बेटियों की शिक्षा, संस्कार की बात करते है तो पूरे परिवार एवं समाज को शिक्षित व संस्कारित करने की बात होती है। उन्होंने यह भी कहा कि इस दौरान उन्हें सम्पूर्ण प्रदेश के अनेक कार्यक्रमो में अतिथि के रूप में जाने का मौका मिलता तब वे हर मंच में बेटियों के लिये भविष्य उज्ज्वल बनाने की बात जरूर करती है,ऐसे में चलाए गए अभियान को लोगो ने खूब सराहा,इस नेक मुहिम से लोग भारी संख्या में जुड़ते चले गये और आज बेटियों के सर्वांगीण विकास की इस संकल्प यात्रा में गोल्डन बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करा लिया है,गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड के एशिया हेड डॉ मनीष विश्नोई एवं उनकी टीम ने सम्पूर्ण जांच के बाद यह रिकॉर्ड मोना सेन को प्रदान किया है मनीष विश्नोई ने कहा कि इस तरह का यह पहला अभियान है जिसमे इतने सारे लोगो ने हिस्सा लिया, मोना सेन इस सफलता का श्रेय अपनी माँ, परिवार,अपनी पूरी टीम और सम्पूर्ण प्रदेश वासियो और बालोद जिला गुंडरदेही के जागरूक माता पिता को देती है जिन्होंने इतनी बड़ी संख्या में संकल्प लिया है उन्होंने कहा कि बेटियों के भविष्य को गढ़ने के लिए जागरूकता अभियान की मुहिम निरंतर आगे भी जारी रहेगी।




















