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लिमोरा स्व सहायता की महिलाओं ने अपना हुनर का द्वार खोला तो होने लगा लक्ष्मी का प्रवेश..दोना पत्तल से हुआ मुनाफा

बालोद– गांव की महिलाएं अपने अथक परिश्रम से सफलता की कहनी लिख रहीं हैं। बालोद तहसील क्षेत्र के ग्राम लिमोरा की जय कर्मा स्व सहायता समूह की महिलाएं परसा पान सीहारी पत्तो से दोना व पत्तल बनाकर आत्मनिर्भर बन रही हैं। इन महिलाओं ने अपना हुनर का द्वार खोला तो घर में लक्ष्मी का प्रवेश होने लगा। इनके घर का आर्थिक संकट दूर होने लगा। अब अपनी जरूरत के लिए उन्हें किसी के आगे हाथ नहीं फैलाना पड़ता है।
ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं का समूह बड़ी संख्या में परसा पान सीहारी पत्तो से दोना पत्तल बनाकर आर्थिक रूप से सक्षम हो रहे है। जिला मुख्यालय के आसपास ही दर्जनों ग्रामो में अब विगत् लंबे समय के पश्चात् महिला समूह बड़ी मात्रा में पान पत्तो से दोना पत्तल बनाने का कार्य कर रहे है।

सीहारी पान के पत्ता से पत्तल (पतली) बना रही हैं स्व सहायता की महिलाए

ग्राम लिमोरा के जय कर्मा सहायता समूह अध्यक्ष शकुनलता साहू ने बताया कि अनेक समूह द्वारा विगत् दो वर्षो से सीहारी पान पत्ता से पत्तल (पतली) बनाया जा रहा है प्रारंभ में बहुत ही कम लोग इसकी मांग करते थे लेकिन अब उनके समूह द्वारा बनाए पान पत्तल की मांग दिन प्रति दिन बढ़ते क्रम पर है समूह से जुड़ी महिलाएं हितेश्वरी साहू, संयोजिका सोनिका श्याम, भूमिका यादव, रेशवती नेताम, भगवती मंडावी, गीता साहू, रमा साहू, ज्योति साहू एवं पूर्णिमा साहू ने बताया कि विगत् वर्षो में अब तक 75 हजार पान पत्तल बनाकर बेच चुके है जिससे उनकी समूह की प्रत्येक महिलाओं का आर्थिक लाभ मिला है जो वर्तमान बढ़ते क्रम पर है समूह अध्यक्ष ने बताया कि पत्तल बनाने के लिए सीहारी पान धमतरी जिला के ग्राम डोमा, गुजरा, भखारा के विभिन्न ग्राम से खरीद कर लाते है जिससे पत्तल बनया जाता ह।

प्लास्टिक एवं कागजों के निर्मित दोना पत्तल के उपयोग से सेहत को होता हैं नुकसान

बता दे कि प्लास्टिक एवं कागजों के निर्मित दोना पत्तल के उपयोग से सेहत को नुकसान होने के साथ ही सामूहिक भोज के पश्चात् निकलने वाले अपशिष्ट पदार्थो के चलते बड़े पैमाने पर पर्यावरण को नुकसान हो रहा है वही प्रकृति द्वारा उत्पन्न पान पत्तो से बने दोना पत्तल में भोजन करने से भोजन का स्वाद भी बढ़ता है तथा मवेशियों को भी पान पत्तो का भोजन मिल जाता है।

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