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प्रदेश रूचि

*आखिर बाल दिवस पर छात्र छात्राओं को क्यो बैठना पड़ा आंदोलन पर..लगातार कर रहे थे ये मांग..लेकिन विभाग ने कर दी अनसुनी तो बालदिवस पर स्कूल में जड़ दिया ताला.. फिर क्या हुआ*

बालोद- बार-बार शिक्षक की मांग करने के बाद भी शिक्षक की व्यवस्था नहीं हो पाने से व्यथित बालोद ब्लाक के ग्राम भोथली के ग्रामीणों ने सोमवार को स्कूल में ताला जड़ दिया। स्कूल के सामने ग्रामीण एकत्रित हो गए और शासन- प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों के भविष्य को लेकर प्रशासन द्वारा ध्यान नहीं दिया जा रहा है, यही कारण है कि यहां अब तक शिक्षक की नियुक्ति नहीं की जा सकी है। वही भोथली के ग्रामीणों द्वारा स्कूल में तालाबंदी करने की जानकारी मिलते ही ब्लाक शिक्षा अधिकारी स्कूल पहुचकर ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया लेकिन ग्रामीणों ने शिक्षक की नियुक्ति तत्काल करने की मांग पर अड़े रहे जिस ब्लाक शिक्षा अधिकारी ने एक शिक्षक की नियुक्ति करने का आश्वासन दिया गया ।तब कही जाकर ग्रामीणों ने आंदोलन समाप्त किए।जिला मुख्यालय से 6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ग्राम भोथली के प्राथमिक शाला में कक्षा पहली से 5वीं तक के 56 बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही थी।

वजह यह है कि यहां सिर्फ एक ही प्रधानपाठक है। बच्चों को पढ़ाने एक भी शिक्षक नहीं है। जबकि ओरमा, बघमरा, मेड़की के स्कूल में कम बच्चों के लिए ज्यादा शिक्षक है। इसकी जानकारी बीईओ से लेकर संकुल समन्वयक को भी है बावजूद बच्चों को उचित शिक्षा देने के लिए किसी ने प्रयास नहीं किया।इस साल कक्षा पहली से पांचवी तक कुल 56 बच्चों ने प्रवेश लिया है। जिसमें 28 बालक व इतने ही संख्या में बालिका हैं। स्कूल शिक्षा विभाग का नियम है कि 30 विद्यार्थी पीछे एक शिक्षक होना अनिवार्य है, लेकिन यहां 56 विद्यार्थी को पढ़ाने के लिए मात्र एक शिक्षक है वह भी प्रधानपाठक की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। लिहाजा यहां बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह से प्रभावित हो रही है। इसका अंदाजा इसी से लगा सकते है कि अगर प्रधानपाठक कक्षा पहली के बच्चों को पढ़ाते है तो कक्षा दूसरी, तीसरी, चौथी व पांचवी के बच्चों की पढ़ाई नहीं हो पाती है।ग्रामीणों का कहना है कि भोथली के सरकारी प्राथमिक शाला में पढ़ाई पूरी तरह ठप है क्योंकि सप्ताह में कई दिन प्रधान पाठक की ड्यूटी मतदाता सूची में नाम जोड़ने व अन्य गतिविधियों में लगा दी जाती है। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई नहीं हो पाती। वहीं प्रधान पाठक सुनहरे राम चुरेंद्र ने बताया कि जब उन्हें ऑफिस कार्य से बालोद जाना होता है तो कई दिन स्कूल बंद करना पड़ जाता है क्योंकि अकेला होने के कारण वह भी मजबूर थे।

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