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आज तीज उपवास के पहले आज महिलाएं ग्रहण करेगी करु भात…दो दिन पहले जो करेला के दाम थे कम आज रेट आसमान पर…क्या महत्व है करु भात का

बालोद-भद्रपद शुक्ल पक्ष तीज को मनाया जाने वाला पर्व तीजा गुरुवार से शुरू होगा। सुहागिन महिलाएं आज की रात को करू भात खाकर गुरुवार को तीजा उपवास रखेंगी। पति की दीर्घायु एवं परिवार के सुख समृद्घि के लिए यह उपवास मायके मे रखा जाता है। तीज पर्व को लेकर बाजार में रौनक देखने को नही मिल रही,तीजा एक ऐसा पर्व है, जिसे सुहागिन महिलाएं अपने मायके में मनाए जाने को लेकर उत्साहित रहती हैं। जिलेभर में तिजहारिन महिलाओं द्वारा त्योहार को लेकर उत्साह देखा जा रहा है। कई महिलाएं तीजा त्योहार को मनाने के लिए अपने मायके आ चुकी हैं। इस पर्व मे महिलाएं सुबह से ही निर्जला व्रत रखेंगी उसके बाद शाम को समय एक स्थान पर एकत्र होकर परिवार की अन्य महिलाओं के साथ शिव-पार्वती की पूजा अर्चना करेंगी।

 

सोलह श्रृंगार व मायके की साड़ी

ऐसी मान्यता है कि तीजा पर्व में महिलाएं सोलह श्रृंगार करके मायके की साड़ी पहनकर अपने पति की पूजा-अर्चना करती है। पूरे सोलह श्रृंगार में बन संवरकर महिलाओं द्वारा शिव-पार्वती की पूजा-अर्चना की जाती है। मायके पक्ष के लोगों द्वारा तीज त्योहार में अपनी बेटी बहनों की पूछपरख की जाती है। बेटियों को पूरे सम्मान के साथ घर लाया जाता है। तीजा के पूर्व उन्हें करू भात खिलाने की भी परंपरा हैं। इसके पीछे यह मान्यता है कि कड़वे और मीठे का अनुभव सहते हुए बेटी अपने ससुराल में सुखी जीवन व्यतीत करे।

करेला 30 रुपये किलो बिका

कड़ू भात खाकर तीज व्रत रखने की परंपरा के चलते बुधवार को सब्जी मार्केट में करेला 30 से 35 रुपये किलो में बिका ।इस वर्ष सब्जी के दामों में भारी गिरावट देखी जा रही है।जिसके करेला की सब्जी भी सस्ते दामों पर बिका। तीजा त्योहार के चलते महिलाएं करेला की सब्जी खरीदते नजर आए जिसकी सब्जी खाकर महिलाएं गुरुवार को उपवास रखेंगी।

तीजा का पौराणिक महत्व

छग में तीजा का त्यौहार बड़े धूमधाम से मनाया जाता है. शिव पुराण के अनुसार इसी दिन भगवान शिव और देवी पार्वती का पुनर्मिलन हुआ था. पौराणिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तप किया था. इस कड़ी तपस्या और 108वें जन्म के बाद माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त किया. मान्यता है कि श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया को ही भगवान शंकर ने माता पार्वती को अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया था. तभी से भगवान शिव और माता पार्वती ने इस दिन को सुहागन स्त्रियों के लिए सौभाग्य का दिन होने का वरदान दिया।

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