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प्रदेश रूचि

टेट की अनिवार्यता खत्म करने शिक्षकों की प्रदेशव्यापी रैली, पांच सूत्रीय मांगों को लेकर सौंपा ज्ञापन

बालोद। शिक्षक संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर मंगलवार को प्रदेशभर के जिला मुख्यालयों में शिक्षकों ने टेट मुक्ति रैली निकालकर प्रदर्शन किया। बालोद में भी बड़ी संख्या में शिक्षक बारिश के बीच रैली में शामिल हुए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को लेकर आक्रोश जताया। प्रदर्शन के बाद मुख्यमंत्री, शिक्षामंत्री, शिक्षासचिव और डीपीआई के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया।

शिक्षक संघर्ष मोर्चा की प्रमुख मांगों में टेट की अनिवार्यता समाप्त करना, संविलियन से पूर्व की सेवा अवधि की गणना कर पेंशन सहित सभी सेवा हितलाभ देना, केंद्रीय वेतनमान लागू कर वेतन विसंगतियां दूर करना, डीएड प्रशिक्षित शिक्षकों को ब्रिज कोर्स के माध्यम से बीएड कराने तथा भर्ती-पदोन्नति नियम 2026 को निरस्त करना शामिल है।

मोर्चा के प्रांतीय संचालक वीरेंद्र दुबे ने कहा कि टेट की अनिवार्यता को लेकर प्रदेश के शिक्षकों में भारी आक्रोश है। उन्होंने कहा कि वर्षों से शिक्षा विभाग में सेवा दे रहे शिक्षकों पर अब टेट की बाध्यता लागू करना उचित नहीं है। मोर्चा ने केंद्र सरकार से संबंधित अध्यादेश में संशोधन कर पूर्व से कार्यरत शिक्षकों को टेट की अनिवार्यता से मुक्त करने की मांग की है। साथ ही राज्य के शिक्षकों को केंद्रीय वेतनमान देने और सभी संवर्गों में व्याप्त वेतन विसंगतियां दूर करने की मांग उठाई गई।

प्रांतीय महासचिव धर्मेश शर्मा और कार्यकारी प्रांताध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने कहा कि शिक्षक अपनी योग्यता साबित करने के बाद ही शिक्षा विभाग में नियुक्त हुए हैं। वर्ष 2010 में लागू किए गए नियम को 2010-11 से पहले नियुक्त शिक्षकों पर लागू करना उचित नहीं है। 20 से 28 वर्षों तक सेवा दे चुके शिक्षकों को दोबारा टेट पास करने की बाध्यता से सेवा सुरक्षा को लेकर उनमें चिंता और तनाव बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद नई नियुक्तियों पर नियम लागू किया जा सकता है, लेकिन पूर्व से नियुक्त शिक्षकों पर इसकी बाध्यता नहीं होनी चाहिए।

प्रदेश मीडिया प्रभारी एवं बालोद जिला अध्यक्ष जितेंद्र शर्मा ने कहा कि शिक्षक लगातार परीक्षा, नौकरी की सुरक्षा और भविष्य को लेकर तनाव में हैं। ऐसे माहौल में शिक्षकों से पूरी एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा के साथ बच्चों को पढ़ाने की अपेक्षा करना उचित नहीं है। शिक्षक का मानसिक तनाव कक्षा के वातावरण और शिक्षण प्रक्रिया को भी प्रभावित कर सकता है। सरकार को शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के साथ शिक्षकों को तनावमुक्त वातावरण देने पर भी गंभीरता से विचार करना चाहिए।

बालोद में जिला संचालक जितेंद्र शर्मा और दिलीप साहू के नेतृत्व में रैली निकाली गई। वहीं रायपुर में प्रांतीय संचालक वीरेंद्र दुबे और केदार जैन तथा बिलासपुर में संजय शर्मा ने रैली में शामिल होकर प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया। प्रदेश के अन्य जिलों में शालेय शिक्षक संघ, टीचर्स एसोसिएशन और संयुक्त शिक्षक संघ के जिला संचालकों की अगुवाई में प्रदर्शन किया गया।

बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में शिक्षकों की मौजूदगी ने आंदोलन को व्यापक रूप दिया। शिक्षकों ने टेट की अनिवार्यता खत्म करने के साथ सेवा अवधि की गणना, पेंशन हितलाभ, केंद्रीय वेतनमान, डीएड प्रशिक्षित शिक्षकों के लिए ब्रिज कोर्स से बीएड और भर्ती-पदोन्नति नियम 2026 को निरस्त करने की मांग को प्रमुखता से उठाया।

मोर्चा से जुड़े पदाधिकारियों ने शासन से मांगों पर जल्द निर्णय लेने की मांग की है। प्रदर्शन में शालेय शिक्षक संघ के प्रांतीय पदाधिकारी सुनील सिंह, विष्णु शर्मा, डॉ. सांत्वना ठाकुर, सत्येंद्र सिंह, विवेक शर्मा, गजराज सिंह, राजेश शर्मा, शैलेश सिंह, प्रह्लाद जैन, संतोष मिश्रा, संतोष शुक्ला, शिवेंद्र चंद्रवंशी, दीपक वेंताल, यादवेंद्र दुबे, सर्वजीत पाठक, मंटू खैरवार, पवन दुबे, नंदकुमार अठभैया, भोजराम पटेल, विनय सिंह, आशुतोष सिंह, भानु डहरिया, रवि मिश्रा, बिजेंद्रनाथ यादव, जितेंद्र गजेंद्र, अजय वर्मा, कृष्णराज पांडेय, घनश्याम पटेल, बुद्धहेश्वर शर्मा, प्रदीप पांडेय, उपेंद्र सिंह, पवन साहू, मनोज पवार, देवव्रत शर्मा, कैलाश रामटेके, अब्दुल आसिफ खान, सरवर हुसैन, कुलदीप सिंह चौहान, नेमीचंद भास्कर, राजेश यादव, अमित सिन्हा, विक्रम राजपूत, सुशील शर्मा, विजय जाटवर, शशि कठोलिया, विजय बेलचंदन, अशोक देशमुख, तिलक सेन, द्वारिका भारद्वाज और अजय लढ्ढा सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।

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