पूरी भुगतान प्रक्रिया एमएफपी कलेक्शन एंड पेमेंट सिस्टम के माध्यम से डिजिटल और पारदर्शी तरीके से संपन्न हुई। इससे हितग्राहियों को बिना किसी मध्यस्थता और विलंब के राशि सीधे उनके बैंक खातों में प्राप्त हुई। सरकार का यह प्रयास वनवासी समुदाय की आजीविका को सुदृढ़ करने और लघु वनोपज आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
जानकारी के अनुसार वर्ष 2023 में जिले में 6,593 मानक बोरा तेन्दूपत्ता संग्रहण के आधार पर यह प्रोत्साहन पारिश्रमिक वितरित किया गया। इससे पूर्व तेन्दूपत्ता संग्रहण का मूल पारिश्रमिक 4 हजार रुपये प्रति मानक बोरा की दर से संग्राहकों को भुगतान किया जा चुका था। अब बोनस राशि मिलने से हजारों परिवारों को अतिरिक्त आर्थिक राहत मिली है।
मरवाही वनमंडल की वनमंडलाधिकारी एवं पदेन प्रबंध संचालक ग्रीष्मी चांद के मार्गदर्शन में पूरी प्रक्रिया सफलतापूर्वक संपन्न हुई। डिजिटल भुगतान व्यवस्था के कारण लाभार्थियों के खातों में राशि सुरक्षित और समयबद्ध तरीके से पहुँची, जिससे संग्राहकों में उत्साह और संतोष का माहौल है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बोनस की यह राशि ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को भी गति देगी। अधिकांश वनवासी परिवार इस धनराशि का उपयोग कृषि कार्य, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, घरेलू आवश्यकताओं तथा छोटे-मोटे स्वरोजगार में करेंगे। इससे स्थानीय बाजारों में भी आर्थिक गतिविधियाँ बढ़ने की संभावना है।

यज्ञदत्त शर्मा बोले— वनवासियों के सम्मान और समृद्धि की दिशा में बड़ा कदम
छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष यज्ञदत्त शर्मा ने बोनस वितरण का स्वागत करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने तेन्दूपत्ता संग्राहकों को समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से प्रोत्साहन पारिश्रमिक उपलब्ध कराकर वनवासी परिवारों के हितों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को फिर साबित किया है।
उन्होंने कहा कि “तेन्दूपत्ता केवल एक वनोपज नहीं, बल्कि लाखों वनवासी परिवारों की आजीविका का प्रमुख आधार है। बोनस राशि सीधे बैंक खातों में भेजने की व्यवस्था से पारदर्शिता बढ़ी है और संग्राहकों का विश्वास भी मजबूत हुआ है। यह राशि उनके परिवारों की जरूरतों को पूरा करने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई ऊर्जा प्रदान करेगी।”
यज्ञदत्त शर्मा ने कहा कि सरकार द्वारा लघु वनोपज आधारित अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने, संग्राहकों को समय पर पारिश्रमिक उपलब्ध कराने और डिजिटल भुगतान व्यवस्था को बढ़ावा देने जैसे कदम वनवासी समाज के आर्थिक उत्थान में मील का पत्थर साबित होंगे।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया बल
तेन्दूपत्ता संग्रहण छत्तीसगढ़ के वनांचल क्षेत्रों में आजीविका का एक प्रमुख स्रोत है। बोनस वितरण से न केवल संग्राहक परिवारों की आय में वृद्धि होगी, बल्कि ग्रामीण बाजारों में क्रय शक्ति बढ़ने से स्थानीय व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी। डिजिटल भुगतान प्रणाली ने सरकारी योजनाओं के लाभ को सीधे पात्र हितग्राहियों तक पहुँचाकर पारदर्शी और जवाबदेह शासन व्यवस्था को भी मजबूत किया है।
राज्य सरकार का यह कदम वनवासी परिवारों के आर्थिक सशक्तिकरण, सामाजिक सुरक्षा और समावेशी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है, जिससे हजारों परिवारों के जीवन में आर्थिक स्थिरता और आत्मनिर्भरता का नया विश्वास मजबूत होगा।




















