नई दिल्ली में चार दिवसीय राष्ट्रीय मास्टर ट्रेनर्स प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ, जल सुरक्षा पुस्तिका जारी; छत्तीसगढ़ समेत 10 राज्यों को मिलेगा लाभ
नई दिल्ली। देश की ग्राम पंचायतों को जल संकट से उबारकर आत्मनिर्भर और ‘जल-पर्याप्त पंचायत’ बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। पंचायती राज मंत्रालय ने 13 से 16 जुलाई 2026 तक नई दिल्ली में राष्ट्रीय स्तर के मास्टर ट्रेनर्स के प्रथम चार दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया है। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य ग्राम पंचायतों को वैज्ञानिक आधार पर जल बजट (Water Budget) तैयार करने और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप जल सुरक्षा योजना (Water Security Plan) बनाने में सक्षम बनाना है। साथ ही मंत्रालय ने ‘जल-पर्याप्त पंचायत प्रशिक्षण नियमावली (चरण-1)’ भी जारी की है, जो पंचायतों के लिए व्यवहारिक मार्गदर्शिका का कार्य करेगी।
कार्यक्रम के तहत राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर पर ऐसे प्रशिक्षकों का नेटवर्क तैयार किया जाएगा, जो आगे ग्राम पंचायतों को जल संसाधनों का आकलन, जल मांग एवं उपलब्धता का विश्लेषण, संरक्षण उपायों की पहचान और जलवायु-अनुकूल जल सुरक्षा योजनाएं तैयार करने में तकनीकी सहयोग देंगे। यह पूरी प्रक्रिया ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) से जोड़ी जाएगी, ताकि जल प्रबंधन ग्रामीण विकास का अभिन्न हिस्सा बन सके।

पहले चरण में 10 राज्यों की 1,000 ग्राम पंचायतें शामिल
इस राष्ट्रीय अभियान के प्रथम चरण में बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के 100 जिले, 100 ब्लॉक और 1,000 ग्राम पंचायतों को शामिल किया गया है। पहले बैच में बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल के प्रतिभागी प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। प्रशिक्षण के बाद यही मास्टर ट्रेनर्स अपने-अपने राज्यों में जिला, ब्लॉक और पंचायत स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करेंगे।
जल सुरक्षा को ग्रामीण विकास की आधारशिला बताया
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में पंचायती राज मंत्रालय के सचिव विवेक भारद्वाज ने कहा कि जल सुरक्षा केवल पेयजल तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि यह कृषि, आजीविका, स्वास्थ्य और सतत ग्रामीण विकास की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि स्थानीय समुदाय अपनी जल संबंधी समस्याओं को सबसे बेहतर तरीके से समझता है और जल बजट की अवधारणा उसी स्थानीय ज्ञान को वैज्ञानिक योजना में बदलने का माध्यम बनेगी। उन्होंने समुदाय की भागीदारी, व्यवहार परिवर्तन और स्थानीय नेतृत्व को इस अभियान की सफलता की कुंजी बताया।
मंत्रालय के अपर सचिव सुशील कुमार लोहानी ने कहा कि ग्राम पंचायत विकास योजनाओं में जल संरक्षण को प्राथमिकता देना समय की आवश्यकता है। उनका कहना था कि प्रभावी जल प्रबंधन ग्रामीण अर्थव्यवस्था, कृषि उत्पादन और आजीविका को मजबूती प्रदान करेगा। इसलिए देशभर में चरणबद्ध तरीके से प्रशिक्षकों का एक मजबूत तंत्र विकसित किया जा रहा है, जो जल संकट वाले क्षेत्रों में विशेष रूप से काम करेगा।
वैज्ञानिक तकनीक और सामुदायिक भागीदारी पर रहेगा जोर
प्रशिक्षण कार्यक्रम को पूरी तरह व्यवहारिक और सहभागितापूर्ण बनाया गया है। प्रतिभागियों को जल बजट तैयार करना, स्थानीय जल स्रोतों का मानचित्रण, जल उपलब्धता एवं मांग का आकलन, संरक्षण उपायों का चयन, जलवायु-अनुकूल जल सुरक्षा योजना तैयार करना तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं के अभिसरण (Convergence) के माध्यम से इन योजनाओं को लागू करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण में सामुदायिक भागीदारी, महिलाओं की भूमिका, स्थानीय संस्थाओं के समन्वय और ग्राम पंचायत विकास योजना के साथ जल सुरक्षा योजना के एकीकरण पर विशेष बल दिया गया है। प्रशिक्षण सामग्री में चरणबद्ध गतिविधियां, समूह अभ्यास, फील्ड अनुभवों की समीक्षा और कार्ययोजना तैयार करने की प्रक्रिया भी शामिल है।

प्रशिक्षण पुस्तिका बनेगी पंचायतों की व्यवहारिक मार्गदर्शिका
मंत्रालय द्वारा जारी प्रशिक्षण पुस्तिका में जल सुरक्षा योजना तैयार करने की पूरी प्रक्रिया को सरल और चरणबद्ध तरीके से समझाया गया है। इसमें जल बजट, संसाधन मानचित्रण, सरकारी योजनाओं के अभिसरण, सामुदायिक नेतृत्व, प्रशिक्षण गतिविधियों, फील्ड अभ्यास और कार्यान्वयन रणनीतियों को विस्तार से शामिल किया गया है। पुस्तिका का उद्देश्य ग्राम पंचायतों को केवल योजना बनाने तक सीमित न रखकर उसे प्रभावी क्रियान्वयन तक पहुंचाना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह पहल प्रभावी ढंग से लागू होती है तो देश की ग्राम पंचायतें स्थानीय जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन कर सकेंगी, भूजल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, कृषि और पेयजल संकट में कमी आएगी तथा जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न चुनौतियों का सामना करने में ग्रामीण भारत अधिक सक्षम बन सकेगा।




















