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₹2200 करोड़ भुगतान विवाद: नीर भवन के बाहर ठेकेदारों का हल्लाबोल, 18% कमीशन के आरोप; 7 दिन में समाधान नहीं तो विधानसभा घेराव

रायपुर। जल जीवन मिशन (JJM) एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) के अंतर्गत लंबित भुगतान को लेकर सोमवार को प्रदेशभर से पहुंचे ठेकेदारों का गुस्सा राजधानी रायपुर स्थित नीर भवन के सामने खुलकर सामने आया। छत्तीसगढ़ कॉन्ट्रैक्टर एसोसिएशन के नेतृत्व में सैकड़ों ठेकेदारों ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए शासन के खिलाफ नारेबाजी की और आरोप लगाया कि वर्षों से कार्य पूरा करने के बावजूद भुगतान नहीं होने से हजारों ठेकेदार आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।
प्रदर्शन के बाद एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री, वित्त मंत्री, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री, राज्यपाल, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सहित संबंधित अधिकारियों के नाम ज्ञापन सौंपते हुए लंबित भुगतान, पर्याप्त बजट, अनुबंधानुसार रनिंग पेमेंट, कथित भ्रष्टाचार की जांच तथा विभागीय सुधार की मांग की।
₹2200 करोड़ के बिल भुगतान की प्रतीक्षा में, ₹3000 करोड़ के बिल अभी बनने बाकी
ज्ञापन में बताया गया कि छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन के तहत लगभग ₹22,000 करोड़ के कार्य स्वीकृत हैं। इनमें से लगभग ₹2,200 करोड़ के बिल विभाग में Put-up होकर भुगतान की प्रतीक्षा में हैं, जबकि लगभग ₹3,000 करोड़ के कार्यों के बिल अभी बनना शेष हैं। ठेकेदारों का कहना है कि विभाग के पास पर्याप्त बजट उपलब्ध नहीं होने के कारण भुगतान लगातार अटका हुआ है।


एसोसिएशन का कहना है कि यदि सरकार आगामी छह माह में “हर घर जल” का लक्ष्य पूरा करना चाहती है तो वर्तमान बकाया भुगतान के साथ-साथ आगामी भुगतान के लिए भी अग्रिम बजट उपलब्ध कराना होगा, ताकि कार्य फंड के अभाव में प्रभावित न हों।
एग्रीमेंट में पार्ट पेमेंट का प्रावधान, फिर भी नहीं हो रहा भुगतान
प्रदर्शन कर रहे ठेकेदारों ने आरोप लगाया कि कार्य अनुबंध (Agreement) में स्पष्ट रूप से Running / Part Payment का प्रावधान होने के बावजूद 60 से 70 प्रतिशत कार्य पूर्ण कर चुके ठेकेदारों को भुगतान नहीं किया जा रहा। अधिकारियों द्वारा 100 प्रतिशत कार्य पूर्ण होने के बाद ही भुगतान की शर्त लागू की जा रही है, जो अनुबंध की मूल भावना के विपरीत है।
एसोसिएशन ने यह भी आरोप लगाया कि अनुबंध होने के बाद विभाग ने कई नए नियम लागू कर दिए हैं, जिनका मूल एग्रीमेंट में कोई उल्लेख नहीं है। इससे ठेकेदारों पर अतिरिक्त आर्थिक एवं प्रशासनिक बोझ बढ़ गया है।


भुगतान संकट से आर्थिक और मानसिक परेशानी
एसोसिएशन के अध्यक्ष बिरेश शुक्ला ने कहा कि लंबे समय से भुगतान नहीं मिलने के कारण प्रदेश के हजारों ठेकेदार बैंक ऋण, मशीनों की किस्त, श्रमिकों का वेतन और सामग्री आपूर्तिकर्ताओं का भुगतान करने में असमर्थ हो रहे हैं।
उन्होंने दावा किया कि एसोसिएशन के अभिलेखों के अनुसार भुगतान संकट के कारण अब तक तीन ठेकेदार आत्महत्या जैसा कदम उठा चुके हैं, जबकि कई ठेकेदार हार्ट अटैक, पक्षाघात एवं गंभीर मानसिक तनाव का शिकार हुए हैं। उन्होंने इसे अत्यंत संवेदनशील और मानवीय हस्तक्षेप का विषय बताया।
18 प्रतिशत कमीशन मांगने का आरोप
ज्ञापन में ठेकेदारों ने विभाग के कुछ अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि विभिन्न स्तरों पर लगभग 18 प्रतिशत तक अवैध कमीशन मांगा जा रहा है। उनका कहना है कि इससे न केवल ठेकेदारों का आर्थिक शोषण हो रहा है बल्कि शासन की भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था की छवि भी प्रभावित हो रही है।
एसोसिएशन ने पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कर दोषी अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है।
मिशन संचालक को हटाने की मांग
ज्ञापन में जल जीवन मिशन के प्रबंध संचालक मोहम्मद कैसर हक को तत्काल पद से हटाकर सक्षम एवं निष्पक्ष अधिकारी की नियुक्ति करने की भी मांग की गई। एसोसिएशन का आरोप है कि मिशन संचालन में लगातार प्रशासनिक अव्यवस्था और भुगतान संबंधी समस्याएं बढ़ती जा रही हैं।

ये हैं प्रमुख मांगें
₹2200 करोड़ के लंबित Put-up बिलों का तत्काल भुगतान।
₹3000 करोड़ के आगामी बिलों के लिए अग्रिम बजट की व्यवस्था।
एग्रीमेंट के अनुसार Running / Part Payment तत्काल प्रारंभ किया जाए।
100 प्रतिशत कार्य पूर्ण होने के बाद ही भुगतान की व्यवस्था समाप्त की जाए।
अनुबंध के बाद लागू अतिरिक्त नियमों को निरस्त किया जाए।
आगामी छह माह के कार्यों के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध कराया जाए।
कथित भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई हो।
जल जीवन मिशन के एमडी को हटाकर सक्षम अधिकारी की नियुक्ति की जाए।

एक सप्ताह का अल्टीमेटम, फिर विधानसभा सत्र में पांच दिवसीय आंदोलन
छत्तीसगढ़ कॉन्ट्रैक्टर एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो विधानसभा सत्र के दौरान रायपुर में पांच दिवसीय विशाल एवं शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। इसकी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।

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