प्रदेश कांग्रेस बोली— एक देश, एक योजना तो मजदूरी अलग-अलग क्यों? 300 रुपये दैनिक मजदूरी को बताया अन्यायपूर्ण
रायपुर,। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने केंद्र सरकार की वीबीरामजी योजना में राज्यों के लिए अलग-अलग निर्धारित मजदूरी दरों पर सवाल उठाते हुए इसे प्रदेश के मजदूरों के साथ भेदभाव बताया है। कांग्रेस ने मांग की है कि छत्तीसगढ़ के श्रमिकों को भी हरियाणा की तरह 409 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी दी जाए।
प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने शुक्रवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि भाजपा सरकार मनरेगा के स्थान पर वीबीरामजी योजना को मजदूर हितैषी बताने का दावा कर रही है, लेकिन योजना के लिए अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग मजदूरी दर तय कर उसकी मंशा उजागर हो गई है।
उन्होंने कहा कि हरियाणा में वीबीरामजी योजना के तहत मजदूरों को 409 रुपये प्रतिदिन मजदूरी मिलेगी, जबकि छत्तीसगढ़ के श्रमिकों के लिए यह दर केवल 300 रुपये प्रतिदिन निर्धारित की गई है। कांग्रेस का सवाल है कि जब केंद्र सरकार “वन नेशन, वन स्कीम” की बात करती है, तो फिर “वन नेशन, वन वेज” (एक देश, एक मजदूरी) लागू क्यों नहीं किया गया?
धनंजय सिंह ठाकुर ने योजना के तहत 125 दिनों के रोजगार देने के दावे पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य में मनरेगा के तहत ही 100 दिनों का रोजगार उपलब्ध नहीं कराया जा सका। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में 62 लाख से अधिक पंजीकृत जॉब कार्डधारियों में से केवल 42 प्रतिशत लोगों को औसतन 38 दिन का ही रोजगार मिल पाया है।
उन्होंने कहा कि मनरेगा में परियोजना का 90 प्रतिशत खर्च केंद्र सरकार और 10 प्रतिशत राज्य सरकार वहन करती थी, जबकि वीबीरामजी योजना में राज्य सरकार को 40 प्रतिशत हिस्सा देना होगा। ऐसे में 125 दिनों का रोजगार उपलब्ध कराने का दावा व्यवहारिक नहीं दिखता।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि एक ओर मजदूरी दर कम रखी गई है और दूसरी ओर रोजगार के दावे भी वास्तविकता से दूर हैं। पार्टी ने केंद्र सरकार से मांग की है कि छत्तीसगढ़ के मजदूरों के साथ किसी प्रकार का भेदभाव न किया जाए और उन्हें भी हरियाणा के समान 409 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी प्रदान की जाए।




















