बालोद। जिले में कानून एवं शांति व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने बड़ा फैसला लेते हुए संयुक्त जिला कार्यालय परिसर और उसके आसपास के 500 मीटर क्षेत्र को प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित कर दिया है। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी दिव्या उमेश मिश्रा ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) 2023 की धारा 163 के तहत आदेश जारी करते हुए इस क्षेत्र में सभा, रैली, जुलूस, धरना, प्रदर्शन और हड़ताल जैसी गतिविधियों पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं। यह आदेश 12 जून 2026 से आगामी आदेश तक प्रभावशील रहेगा।

जारी आदेश में कहा गया है कि विभिन्न संगठनों और समूहों द्वारा ज्ञापन सौंपने के दौरान 20 से 25 अथवा उससे अधिक संख्या में लोगों के जिला कार्यालय परिसर में प्रवेश कर शोर-शराबा करने से कार्यालय की सामान्य कार्यप्रणाली प्रभावित होती है। इससे न केवल शासकीय कार्यों में व्यवधान उत्पन्न होता है, बल्कि कई बार तनावपूर्ण वातावरण और कानून-व्यवस्था की स्थिति भी निर्मित हो जाती है। इन परिस्थितियों को देखते हुए लोकहित, लोक सुरक्षा और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया है।
आदेश के अनुसार संयुक्त जिला कार्यालय परिसर तथा उसके 500 मीटर के दायरे में किसी भी व्यक्ति या समूह द्वारा बिना अनुमति सभा, रैली, जुलूस, धरना अथवा हड़ताल आयोजित नहीं की जा सकेगी। साथ ही एक समय में किसी स्थान पर चार से अधिक व्यक्तियों के एकत्रित होने पर भी प्रतिबंध रहेगा। हालांकि ड्यूटी पर तैनात पुलिस और सुरक्षा बलों पर यह प्रतिबंध लागू नहीं होगा।

इसके अलावा ड्यूटी पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों और पुलिसकर्मियों को छोड़कर किसी भी व्यक्ति द्वारा अनुज्ञप्तिधारी होने के बावजूद विस्फोटक पदार्थ, अस्त्र-शस्त्र, धारदार एवं घातक हथियार लेकर चलने पर रोक लगाई गई है। धार्मिक परंपराओं के तहत धारण किए जाने वाले कृपाण को इस प्रतिबंध से बाहर रखा गया है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि क्षेत्र में किसी भी प्रकार की सभा, रैली, जुलूस, धरना, प्रदर्शन या हड़ताल आयोजित करने से पहले संबंधित अनुविभागीय दण्डाधिकारी अथवा कार्यपालिक दण्डाधिकारी से अनुमति लेना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही शासकीय एवं निजी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाना, पुतला दहन करना, तोड़फोड़ करना, टायर जलाकर सड़क जाम करना, यातायात बाधित करना तथा आम नागरिकों में भय या दहशत का माहौल उत्पन्न करना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
यह आदेश सभी राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों, संघों तथा आम नागरिकों पर समान रूप से लागू होगा। आदेश का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति अथवा समूहों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 223 के तहत अभियोजन की कार्रवाई की जाएगी।

जामडीपाट धाम घटना के बाद प्रशासन ने दिखाई सख्ती
गौरतलब है कि बीते 1 जून को डौंडीलोहारा विकासखंड के जामडीपाट धाम से जुड़े मामले को लेकर तुयेगोंदी सहित आसपास के क्षेत्रों से आदिवासी समाज के हजारों लोग बालोद कलेक्ट्रेट पहुंच गए थे। प्रदर्शनकारियों की भारी भीड़ ने कलेक्ट्रेट परिसर में प्रवेश कर लिया था। स्थिति ऐसी बन गई थी कि पुलिस द्वारा लगाए गए बैरिकेड्स और वाटर कैनन भी भीड़ को रोकने में सफल नहीं हो पाए थे। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने कलेक्ट्रेट परिसर के भीतर ही भोजन बनाकर खाया और लंबे समय तक डटे रहे, जिससे प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई थी।
इसी घटना के बाद जिला प्रशासन ने भविष्य में ऐसी परिस्थितियों की पुनरावृत्ति रोकने और शासकीय कार्यों को निर्बाध बनाए रखने के लिए अपनी वैधानिक शक्तियों का उपयोग करते हुए धारा 163 के तहत यह प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया है।
प्रशासन का मानना है कि इस आदेश से संयुक्त जिला कार्यालय परिसर में शांति एवं सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित होगी और आम नागरिकों को बिना किसी व्यवधान के शासकीय सेवाओं का लाभ मिल सकेगा।




















