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आखिर उमर खालिद को क्यों मिली राहत? दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले ने बढ़ाई सियासी हलचल

मां की सर्जरी के लिए उमर खालिद को मिली अंतरिम जमानत
दिल्ली हाई कोर्ट ने मानवीय आधार पर दी 3 दिन की राहत, कड़ी शर्तों के साथ रिहाई के आदेश

नई दिल्ली। वर्ष 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगा मामले में आरोपी पूर्व छात्र नेता Umar Khalid को दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने उनकी मां की सर्जरी को देखते हुए 3 दिन की अंतरिम जमानत मंजूर की है।
दिल्ली हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने मानवीय आधार पर यह राहत देते हुए कहा कि पारिवारिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सीमित अवधि के लिए अंतरिम बेल दी जा रही है। अदालत ने उमर खालिद को 1 जून से 3 जून 2026 तक के लिए जमानत प्रदान की है।


कोर्ट ने जमानत के साथ कई सख्त शर्तें भी तय की हैं। आदेश के अनुसार उमर खालिद राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) से बाहर नहीं जा सकेंगे और उन्हें अपने निर्धारित निवास स्थान पर ही रहना होगा। अस्पताल आने-जाने के अलावा किसी अन्य सार्वजनिक गतिविधि की अनुमति नहीं होगी। अदालत ने 1 लाख रुपये के निजी मुचलके पर उनकी रिहाई का आदेश दिया है।
गौरतलब है कि उमर खालिद पर वर्ष 2020 में हुए उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों की कथित साजिश में शामिल होने का आरोप है। इस मामले में उन पर गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA के तहत कार्रवाई की गई थी। इससे पहले निचली अदालत ने उनकी लंबी अवधि की अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी।

 


इधर, सुप्रीम कोर्ट की हालिया टिप्पणी — “बेल नियम है और जेल अपवाद” — के बाद यह मामला एक बार फिर राष्ट्रीय बहस का विषय बन गया है। कानूनी और राजनीतिक हलकों में इस फैसले को न्यायिक संवेदनशीलता और मानवाधिकार के दृष्टिकोण से भी देखा जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दिल्ली दंगा मामले से जुड़े आरोपियों पर अदालतों के फैसले आने वाले समय में राष्ट्रीय राजनीति और नागरिक अधिकारों की बहस को और तेज कर सकते हैं।

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