बालोद। जिले में 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा परिणाम को लेकर 8 प्राचार्यों के निलंबन की कार्रवाई अब तूल पकड़ती जा रही है। सोमवार को छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन बालोद एवं छत्तीसगढ़ प्राचार्य फेडरेशन के संयुक्त तत्वावधान में प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर से मुलाकात कर निलंबन आदेश तत्काल वापस लेने की मांग करते हुए ज्ञापन सौंपा।
फेडरेशन ने जिला प्रशासन की कार्रवाई को एकतरफा, अधिकार क्षेत्र से परे तथा प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत बताते हुए इस पर पुनर्विचार की मांग की। प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट कहा कि केवल परीक्षा परिणाम में गिरावट को आधार बनाकर संबंधित प्राचार्यों को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराना न्यायसंगत नहीं है।
प्रतिनिधियों ने चर्चा के दौरान कहा कि बोर्ड परीक्षा परिणाम अनेक सामाजिक, शैक्षणिक और प्रशासनिक परिस्थितियों से प्रभावित होते हैं। विद्यार्थियों की शैक्षणिक पृष्ठभूमि, सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति, संसाधनों की उपलब्धता, स्थानीय परिस्थितियां और प्रशासनिक व्यवस्थाएं भी परिणाम को प्रभावित करती हैं। ऐसे में समस्त जिम्मेदारी केवल प्राचार्यों पर निर्धारित कर कठोर कार्रवाई करना सेवा भावना और प्रशासनिक न्याय की भावना के अनुरूप नहीं माना जा सकता।
फेडरेशन ने यह भी अवगत कराया कि प्राचार्य पद का नियुक्तिकर्ता प्राधिकारी शासन स्तर पर होता है तथा प्रचलित नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार इस प्रकार की कार्रवाई शासन स्तर पर परीक्षण के बाद ही किया जाना अधिक उपयुक्त होता। प्रतिनिधिमंडल ने जिले के सभी निलंबित प्राचार्यों की सेवा, सम्मान और मनोबल को ध्यान में रखते हुए निलंबन आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने की मांग की।
सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई चर्चा, कलेक्टर ने दिया आश्वासन
कलेक्टर बालोद के साथ हुई चर्चा सकारात्मक और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई। फेडरेशन द्वारा प्रस्तुत तथ्यों और पक्षों को गंभीरता से सुना गया। प्रतिनिधिमंडल के अनुसार कलेक्टर ने निलंबन संबंधी कार्रवाई को शून्य करने के संबंध में सकारात्मक पहल और आवश्यक परीक्षण का आश्वासन दिया है।
हालांकि फेडरेशन ने स्पष्ट किया कि कर्मचारी एवं अधिकारियों के सम्मान और न्यायोचित अधिकारों की रक्षा के लिए संगठन सदैव प्रतिबद्ध है। यदि शीघ्र ही निलंबन आदेश वापस नहीं लिया गया तो छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन तथा छत्तीसगढ़ प्राचार्य फेडरेशन द्वारा चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
प्रदेशभर में बना चर्चा का विषय
उल्लेखनीय है कि जिले में 7 मई को बोर्ड परीक्षा परिणाम में गिरावट को आधार बनाते हुए 8 प्राचार्यों को निलंबित करने और कई प्राचार्यों की वेतनवृद्धि रोकने की कार्रवाई की गई थी। इसके बाद से शिक्षक संगठनों, कर्मचारी संगठनों और प्राचार्य फेडरेशन द्वारा लगातार विरोध दर्ज कराया जा रहा है।
बालोद जिले में वर्ष 2013 के बाद पहली बार ऐसा हुआ कि 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा की टॉप-10 सूची में जिले का एक भी छात्र-छात्रा स्थान नहीं बना सका। इसके बाद स्थानीय स्तर पर शिक्षा गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े हुए थे, जिसके बाद प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई की थी। अब यही कार्रवाई प्रदेशभर में बहस का मुद्दा बनती जा रही है।
प्रतिनिधिमंडल में ये रहे शामिल
कलेक्टर को ज्ञापन सौंपने पहुंचे प्रतिनिधिमंडल में एम.आर. खान (प्रदेश अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ प्राचार्य फेडरेशन), लोकेश कुमार साहू (जिला संयोजक, छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन बालोद), अनुराग ओझा (प्रमुख सलाहकार), धर्मेंद्र सिंह ठाकुर (प्रदेश सचिव), चमेली वर्मा (प्रदेश कोषाध्यक्ष), डॉ. भारती अग्रवाल (प्रदेश उपाध्यक्ष), बसंत त्रिवेदी (महासचिव, छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन गरियाबंद), संतोष शर्मा, मधुकांत यदु, वीरेंद्र देशलहरे, गजेंद्र पुरी गोस्वामी, बीरेंद्र कुमार गंजीर, रोहित कुमार देशमुख, अनिल कुमार साहू, लूमन सिंह साहू एवं जगदीश तारम सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।




















