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संगीता सिन्हा को बड़ी जिम्मेदारी: महिला कांग्रेस में नई ऊर्जा, संगठन को मिलेगा धारदार नेतृत्व

बालोद। छत्तीसगढ़ की राजनीति में लंबे समय से चल रहे सस्पेंस पर आखिरकार विराम लग गया है। दिल्ली हाईकमान ने संजारी बालोद की तेजतर्रार विधायक संगीता सिन्हा पर भरोसा जताते हुए उन्हें छत्तीसगढ़ महिला कांग्रेस का प्रभारी अध्यक्ष नियुक्त कर दिया है। ऑल इंडिया महिला कांग्रेस की ओर से जारी आदेश के बाद प्रदेश की सियासत में हलचल तेज हो गई है।

यह नियुक्ति सिर्फ एक संगठनात्मक बदलाव नहीं, बल्कि कांग्रेस के भीतर महिला नेतृत्व को नई दिशा देने का संकेत भी मानी जा रही है। संगीता सिन्हा को जमीनी पकड़, आक्रामक शैली और संगठनात्मक सक्रियता के लिए जाना जाता है, ऐसे में यह फैसला रणनीतिक तौर पर बेहद अहम माना जा रहा है।


दिल्ली दरबार में लंबी चली प्रक्रिया, अंततः सिन्हा पर मुहर
महिला कांग्रेस की इस अहम जिम्मेदारी के लिए दावेदारी की दौड़ काफी दिलचस्प रही। जनवरी में दिल्ली में शक्ति प्रदर्शन और इंटरव्यू राउंड के जरिए चयन प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया गया।
अलका लांबा के सामने प्रदेश की कई कद्दावर महिला नेताओं—अनिला भेड़िया, छन्नी साहू, ममता चंद्राकर और तुलिका कर्मा—ने अपनी दावेदारी रखी थी।
इन तमाम दावेदारों के बीच संगीता सिन्हा का चयन यह दर्शाता है कि पार्टी ने अनुभव के साथ-साथ आक्रामक और प्रभावी नेतृत्व शैली को प्राथमिकता दी है।

नेतृत्व के अभाव में कमजोर पड़ा संगठन, अब नई उम्मीद
इससे पहले महिला कांग्रेस की कमान फूलोदेवी नेताम के पास थी। उनके राज्यसभा सदस्य बनने और सक्रिय संगठनात्मक भूमिका से हटने की पेशकश के बाद संगठन में नेतृत्व का अभाव साफ दिखने लगा था।
जमीनी स्तर पर निष्क्रियता बढ़ी, कई पदाधिकारी सक्रिय नहीं रहे और संगठन की पकड़ कमजोर पड़ती नजर आई। ऐसे में पार्टी को एक ऐसे चेहरे की जरूरत थी जो कार्यकर्ताओं में ऊर्जा भर सके—और यही जिम्मेदारी अब संगीता सिन्हा को सौंपी गई है।

कांग्रेस की नई रणनीति: महिला नेतृत्व के जरिए सत्ता समीकरण साधने की कोशिश
केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए नारी शक्ति वंदन अधिनियम के बाद देशभर में महिला नेतृत्व और प्रतिनिधित्व का मुद्दा केंद्र में आ गया है। बीजेपी लगातार कांग्रेस पर इस मुद्दे को लेकर दबाव बनाती रही है।
ऐसे राजनीतिक माहौल में कांग्रेस का यह फैसला साफ संकेत देता है कि पार्टी अब महिला संगठन को मजबूती देकर राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिश कर रही है।


क्यों खास है संगीता सिन्हा का चयन?
संगीता सिन्हा को संगठन और चुनावी राजनीति दोनों का मजबूत अनुभव है। बालोद क्षेत्र में उनकी सक्रियता, जनता से सीधा संवाद और मुद्दों पर आक्रामक रुख उन्हें अन्य नेताओं से अलग पहचान देता है। उनकी नियुक्ति से यह संदेश भी जाता है कि कांग्रेस अब सिर्फ नाम के नेतृत्व नहीं, बल्कि फील्ड में काम करने वाले चेहरों को आगे ला रही है।

आगे की चुनौती: संगठन को फिर से खड़ा करना
अब सबसे बड़ी चुनौती महिला कांग्रेस को जमीनी स्तर पर फिर से सक्रिय करना है। बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करना, निष्क्रिय कार्यकर्ताओं को जोड़ना और आगामी चुनावों के लिए महिला वोट बैंक को संगठित करना—ये सभी जिम्मेदारियां संगीता सिन्हा के सामने होंगी।

संगीता सिन्हा की नियुक्ति को कांग्रेस के “रीसेट मूव” के तौर पर देखा जा रहा है। यह सिर्फ एक पदस्थापना नहीं, बल्कि संगठन को नई धार देने की कोशिश है। अगर वह अपनी आक्रामक शैली और जमीनी पकड़ को संगठन में उतारने में सफल रहती हैं, तो महिला कांग्रेस आने वाले समय में प्रदेश की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभा सकती है 

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