बालोद/कुसुमकसा। देश के सबसे बड़े प्रशासनिक अभियानों में से एक जनगणना 2027 इन दिनों अपने शुरुआती चरण में है। इस महत्त्वपूर्ण कार्य में जुटे प्रगणक भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों के बीच लगातार घर-घर जाकर जानकारी एकत्र कर रहे हैं। जब तापमान 42 डिग्री सेल्सियस के पार हो, तब यह जिम्मेदारी सिर्फ ड्यूटी नहीं बल्कि एक कठिन तपस्या बन जाती है।
ऐसे ही कठिन हालातों के बीच कुसुमकसा क्षेत्र से एक संवेदनशील और प्रेरक पहल सामने आई है। जनपद सदस्य मंजू संजय बैंस ने जनगणना कार्य में लगे प्रगणकों का अपने निवास पर स्वागत करते हुए उन्हें ठंडा पानी और लस्सी पिलाकर न सिर्फ उनकी थकान कम की, बल्कि उनका मनोबल भी बढ़ाया।
उन्होंने प्रगणकों से कहा—
“आप लोग इस भीषण गर्मी में भी राष्ट्र निर्माण के इस महायज्ञ में लगे हैं। आपका समर्पण ही सशक्त भारत की नींव है।”
मानवता का संदेश, समाज के नाम अपील
मंजू संजय बैंस ने इस अवसर पर आम नागरिकों से भी अपील की कि जब जनगणना कर्मी उनके घर पहुंचें, तो वे सहयोग और सम्मान का भाव रखें।
उन्होंने कहा— “सही जानकारी देना आपका कर्तव्य है, लेकिन एक गिलास ठंडा पानी देना आपकी संवेदना है। यही छोटे-छोटे प्रयास समाज को बेहतर बनाते हैं।”
कड़ी मेहनत, सटीक आंकड़े और भविष्य की नींव
इन दिनों प्रगणक सुबह 8 बजे से शाम 6 बजे तक लगातार फील्ड में सक्रिय हैं। वे मोबाइल एप के माध्यम से मकान, परिवार, शिक्षा, रोजगार, प्रवास और दिव्यांगता सहित कुल 31 बिंदुओं पर जानकारी दर्ज कर रहे हैं।
इस डेटा के आधार पर आने वाले वर्षों में सरकार की योजनाएं—स्कूल, अस्पताल, सड़क, राशन व्यवस्था—तैयार की जाएंगी। यानी आज की यह मेहनत अगले 10 साल के विकास की दिशा तय करेगी।
प्रेरणा बनती एक छोटी पहल
अक्सर देखने में आता है कि सरकारी कर्मचारियों को फील्ड में अपेक्षित सहयोग या सम्मान नहीं मिल पाता। ऐसे में कुसुमकसा की यह पहल एक सकारात्मक संदेश देती है—
कि सरकारी कार्य केवल प्रशासन का दायित्व नहीं, बल्कि समाज की साझी जिम्मेदारी भी है।
मंजू संजय बैंस का यह छोटा लेकिन भावनात्मक कदम यह साबित करता है कि संवेदनशीलता और सहयोग की भावना से ही किसी भी बड़े राष्ट्रीय अभियान को सफल बनाया जा सकता है।
“जहां जिम्मेदारी के साथ जुड़ती है मानवता, वहीं से शुरू होता है सच्चा राष्ट्र निर्माण।”




















