जम्मू/श्रीनगर। दशकों से जम्मू से ट्रेन में बैठकर सीधे कश्मीर घाटी पहुंचने का सपना अब हकीकत बन गया है। वंदे भारत एक्सप्रेस के जम्मू तवी तक विस्तार के साथ पहली बार जम्मू और श्रीनगर के बीच सीधी और निर्बाध रेल सेवा शुरू हो गई है। इस ऐतिहासिक पहल ने कश्मीर को देश के बाकी हिस्सों से सीधे जोड़ते हुए यात्रा, पर्यटन और व्यापार की नई संभावनाओं के द्वार खोल दिए हैं।
उत्तर भारत का प्रमुख स्टेशन जम्मू तवी रेलवे स्टेशन अब कश्मीर के लिए मुख्य इंटरचेंज के रूप में उभरा है। देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले यात्री अब बिना किसी रुकावट के जम्मू पहुंचकर सीधे कश्मीर घाटी तक ट्रेन से सफर कर सकेंगे। इससे श्री माता वैष्णो देवी मंदिर और अमरनाथ गुफा जैसे प्रमुख तीर्थ स्थलों की यात्रा भी पहले से कहीं अधिक सुगम हो जाएगी।
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रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि वंदे भारत सेवा को यात्रियों का जबरदस्त प्रतिसाद मिला है। यही वजह है कि इसकी क्षमता बढ़ाते हुए कोचों की संख्या 8 से बढ़ाकर 20 कर दी गई है। यह ट्रेन विशेष रूप से कश्मीर के कठिन मौसम को ध्यान में रखकर तैयार की गई है, जिससे बर्फबारी और अत्यधिक ठंड के बावजूद यात्रा निर्बाध रूप से जारी रह सके।
बेहतर रेल कनेक्टिविटी का असर कश्मीर की अर्थव्यवस्था पर भी साफ दिखाई देने लगा है। अब तक करीब 2 करोड़ किलोग्राम सेब रेल मार्ग से देश के विभिन्न हिस्सों में भेजे जा चुके हैं। इसके साथ ही सीमेंट, अनाज, नमक, खाद और दूध जैसी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति भी पहले से अधिक सुचारू हो गई है, जिससे कीमतों में कमी आई है और आम लोगों को राहत मिली है। ई-कॉमर्स गतिविधियों में भी तेजी आई है, जिससे घाटी की सप्लाई चेन मजबूत हुई है।
इस परियोजना के तहत बने चिनाब रेल ब्रिज और अंजी खड्ड ब्रिज जैसे इंजीनियरिंग के अद्भुत नमूनों ने हर मौसम में रेल संचालन को संभव बनाया है। इन आधुनिक संरचनाओं ने न केवल यात्रा को सुरक्षित और तेज बनाया है, बल्कि क्षेत्र में विकास की नई संभावनाओं को भी गति दी है।
रेलवे अब कनेक्टिविटी को और मजबूत करने के लिए अंबाला-जम्मू रेल मार्ग पर मल्टीट्रैकिंग, काजीगुंड-बारामूला लाइन डबलिंग और पुंछ-राजौरी जैसी नई रेल परियोजनाओं पर काम कर रहा है। आने वाले समय में ये योजनाएं दूरस्थ क्षेत्रों को भी राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जोड़ेंगी और रोजगार के नए अवसर पैदा करेंगी।
कुल मिलाकर, जम्मू-श्रीनगर रेल कनेक्टिविटी का यह विस्तार केवल एक परिवहन सुविधा नहीं, बल्कि कश्मीर घाटी को देश की आर्थिक और सामाजिक मुख्यधारा से जोड़ने वाला ऐतिहासिक कदम साबित हो रहा है। इससे यात्रा आसान होगी, पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय व्यापार को नई दिशा मिलेगी।




















