
बालोद (देवेंद्र साहू) कहते है जब समस्या बड़ी हो तो हौसला भी बड़ा जाता है….मदर्स डे पर आज हम एक ऐसी मां की कहानी बताने जा रहे हैं, जिसने 2 साल पूर्व अपने पति के निधन के बाद अपने सभी परेशालियो को कभी बच्चों पर बोझ नहीं बनने दिया…. उन विकट परिस्थितियों से लड़ते हुए बच्चों को उनके मुकाम तक पहुंचाया…. जहां पूरा बालोद जिला ही नहीं छत्तीसगढ़ भी गर्व कर रहा है…. बालोद जिले के ग्राम उसरवारा की रहने वाली प्रतिभा शांडिल्य को लेकर यह कहानी वर्तमान समाज के लिए प्रेरणा बन रही है….
घर पर खाना बनाते हुए जर्जर मकान जो पूरी तरह बन नहीं पाया है….. उसमें पर नजर आने वाली यह प्रतिभा शांडिल्य है, पति के मरने के बाद प्रतिभा ने आर्थिक परिस्थितियों से जुझते हुए अपने दोनों लड़कियों को उनके मुकाम तक पहुंचाने के लिए काफी संघर्ष किया है….. दरअसल बालोद जिले के ग्राम उसरवारा में रहने वाली प्रतिभा शांडिल्य के दो लड़कियां हैं….. जहां पति के मरने के बाद घर की स्थिति बेहद खराब होने के बाद भी उसने हार नहीं मानी…. 2 साल पहले पति की अचानक मौत से प्रतिभा की जिंदगी बिखर गई….. दोनों लड़कियों के सिर से पिता का साया उठ गया…. तब प्रतिभा ने गांव के ही मिडिल स्कूल में मध्यान भोजन बनाकर अपने बच्चों को पाला….. स्कूल में मध्यान भोजन बनाकर और मनरेगा में मजदूरी कर अपने दोनों बच्चों को पढ़ा रही है…. उसकी मेहनत का फल तब मिला जब इस बार दसवीं बोर्ड की परीक्षा में छोटी लड़की पद्मिनी जिसे घर में सभी प्रीति कहकर बुलाते है उसने पूरे प्रदेश में टॉप टेन में जगह बनाई और अपने साथ अपने मां का भी नाम गौरवान्वित किया…… प्रतिभा ने अपने संघर्ष पूर्ण जिंदगी में कभी भी अपने बच्चों को किसी भी चीज की कमी नहीं होने दी….. वही उसकी बड़ी बेटी गीतांजलि भी 12वीं में अच्छे प्रतिशत लाकर अब आगे मेडिकल की पढ़ाई की तैयारी कर रही है….. वहीं पद्मिनी भी आगे सिविल सर्विस में जाना चाहती है…. घर में रहने वाले दोनों बेटी और मां एक दूसरे के काम में हाथ बटाते है….. प्रतिभा की माने तो दिन भर स्कूल में काम करने के बाद बचे हुए समय पर खेत में काम करती है और छुट्टी की दिनों में मनरेगा में काम करके पैसे इकट्ठा करके दोनों बच्चों को पढ़ा रही है….. ताकि वह अपने पैरों पर खड़े हो सके, कुछ बन सके…. घर मे रह रहीं सास की सेवा भी करती है…. इस माँ की संघर्ष ने उसे आज उसका फल दिया।
वही प्रतिभा की दोनों लड़कियां पद्मिनी और गीतांजलि भी पिता के मरने के बाद में अपनी मां का घर में पूरा हाथ बटाते हैं…. पूरा काम करते हैं उनका कहना है कि उनकी मां ने उन्हें किसी चीज की कमी नहीं होने दी और वह अपनी मां के इस मेहनत से काफी खुश भी हैं और अब आगे पढ़ कर अपनी मां को एक बेहतर जिंदगी देने का वादा भी करते है….
प्रतिभा के संघर्षपूर्ण जिंदगी को लेकर स्कूल के प्रिंसिपल भी काफी सराहना कर रहे हैं उनका कहना है की प्रतिभा इतनी मेहनत करती है कि अपने दोनों लड़कियों को खुश रख सके और उसकी मेहनत का परिणाम है कि आज उनके बच्चों ने टॉप कर गांव और स्कूल एवं जिले का नाम पूरे छत्तीसगढ़ में रौशन किया है…. यहाँ तक ग्रामीण भी प्रतिभा शांडिल्य के हौसलो कि तारीफ करते नही थकते…. प्रतिभा के भाई बताते है 2 साल पहले उनके जीजाजी की मौत के बाद घर का आर्थिक हालात विकट हो गया…. लेकिन उनकी बहन ने अपने हौसले से सभी को संभाला.
प्रतिभा शांडिल्य की यह कहानी उन सभी के लिए प्रेरणा है जो अपनी परिस्थितियों का हवाला देते हुए अपने बच्चों को पढ़ने नहीं देते….. लेकिन प्रतिभा ने कभी अपने परिस्थितियों को अपने बच्चों पर बोझ नहीं बनने दिया और आज खुद मेहनत कर अपने बच्चों को आगे बढ़ा रही है…. ऐसी संघर्षपूर्ण मां को हम सब मदर्स डे पर शुभकामनाएं देते हैं कि वह ऐसे ही अपने बच्चों को आगे बढ़ाये और उनका यह संघर्ष पूर्ण जिंदगी जल्द ही खुशहाल जिंदगी में तब्दील हो।