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सर्व आदिवासी समाज ने अपने तीन सूत्रीय मांगों को लेकर जिला मुख्यालय के गंजपारा स्थित गोंडवाना भवन से निकाली रैली

बालोद- छग सर्व आदिवासी समाज अपने तीन सूत्रीय मांगों को लेकर गुरुवार को जिला मुख्यालय के गंजपारा स्थित गोंडवाना भवन से रैली निकालकर सरदार पटेल मैदान में गिरफ्तार दी।इस दौरान सर्व आदिवासी समाज के 118 लोगो ने गिरफ्तारी दी गई ।वही एसडीएम ने 118 लोगो को मुहचलके में रिहा किया गया। सर्व आदिवासी सम्सज के लोगो ने अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी किया गया। सर्व आदिवासी सम्सज के जिलाध्यक्ष उमेदी राम गगराले ने बताया कि छत्तीसगढ़ में सर्व आदिवासी समाज के द्वारा आदिवासी समाज के नैसर्गिक, संवैधानिक अधिकार, माँग एवं प्रताड़ना को लेकर छत्तीसगढ़ शासन-प्रशासन को आवेदन के माध्यम से चरणबद्ध आंदोलन, धरना प्रदर्शन, चक्काजाम, आर्थिक नाकेबंदी (माल वाहन एवं ट्रेन) और विधान सभा घेराव किए। आदिवासी समाज के आरक्षित विधायकों का घेराव भी किए, लेकिन सत्ता, प्रशासन की ओर से कोई संतोषप्रद आश्वासन एवं निराकरण नहीं किया गया। इसके विपरीत लोगों से दुर्भावना पूर्वक व्यवहार एवं कार्यवाही किया जा रहा है। आदिवासी समाज क्षुब्ध होकर लोक तांत्रिक तरीके से आज विधान सभा सत्र के दौरान जिला स्तरीय जेल भरो आंदोलन किया गया।

तीन सूत्रीय मांगे

तीन सूत्रीय मांगों में प्रमुख रूप से हसदेव क्षेत्र (सरगुजा में ग्राम सभा के सहमति के बगैर वन अधिकारों का हनन करते हुए वनों की कटाई, आदिवासियों का विस्थापन और अनुचित तरीके से खनन के विरोध में बैठे ग्रामीणों एव आदिवासियों के समर्थन में सर्व आदिवासी समाज, गोंडवाना महासभा और अन्य संस्थाओं ने पूर्व सूचना के साथ लोक तांत्रिक ढंग से प्रदर्शन किए, जिससे दुर्भवाना एवं पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर पुलिस विभाग द्वारा एफआईआर. कर ग्रामीण एवं आदिवासियों को परेशान किया जा रहा है। बस्तर में भी अपने संवैधानिक अधिकार और व्यक्तिगत अधिकार की अभिव्यक्ति के ऊपर भी प्रताड़ित किया जा रहा है। पूरे प्रदेश में आदिवासी समाज प्रताड़ित है और दुर्भावना पूर्वक आदिवासी समाज को पुलिस के माध्यम से परेशान किया जा रहा है। जन हित और संवैधानिक मांगो को लेकर प्रदर्शन एवं दुर्भावना पूर्वक किए गये एफआईआर. को शुन्य किया जावे। 1996 के पेसा एक्ट कानून के लिए छत्तीसगढ़ शासन द्वारा 09 अगस्त 2022 को नियम बनाया गया तथा अधिसूचना जारी की गई, जिसमें ग्राम सभा के अधिकार (जमीन अधिग्रहण) को खत्म कर दिया गया, साथ ही पेसा नियम अनुरुप बहुत सारे विभागों के नियम तदनुसार एक वर्ष में संशोधन अनिवार्य था, जो नहीं हुआ। पाँचवी अनुसूची क्षेत्र में जहाँ आदिवासी समाज की जनसंख्या 82 प्रतिशत तक है वहाँ के भर्तियों में स्थानीय आरक्षण पूर्व की भांति जिला रोस्टर तत्काल लागू किया जावे।जेल भरो आंदोलन में अध्यक्ष उमेदि राम गगराले, उपाध्यक्ष डोमार चंद्रवंशी, गंगाराम,रेवाराम रावटे, सचिव देवलास भुआर्य, तुकाराम कोर्राम,कुजेश्वर ठाकुर,रिकेश सहित अन्य शामिल रहे।

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