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ईधर पंचायत सचिवों ने अपनी हड़ताल को किए स्थगित.. उधर अपनी मांगों को लेकर कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन फिर हुआ सक्रिय… मांगो को लेकर फिर ज्ञापन

 

बालोद-प्रदेश के कर्मचारी-अधिकारियों की लंबित माँगों के निराकरण की मांग को लेकर कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन फिर सक्रिय हो गया है। फेडरेशन का कहना है कि कई बार मांगों को लेकर ध्यानाकर्षण कराए जाने के बाद भी शासन प्रशासन ध्यान नहीं दे रहा है। नई रणनीति के तहत अब फेडरेशन 30 मई को मुख्यमंत्री के नाम विभिन्न स्तरों पर अफसरों को ज्ञापन सौंपेगा। इस आशय का निर्णय बीते दिनों हुई फेडरेशन की बैठक में लिया गया है।छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के बालोद जिला के संयोजक मधुकांत यदु व सह संयोजक वाई के दिल्लीवार ने बताया कि माँगों के संबंध में राज्य शासन को समय-समय पर ज्ञापन देकर निराकरण हेतु अनुरोध किया जाता रहा है। फेडरेशन कई चरणों में आंदोलन कर शासन-प्रशासन को जिला कलेक्टर्स के माध्यम से ज्ञापन भी सौप चूका है, लेकिन निराकरण हेतु त्वरित कार्यवाही नहीं होने के कारण प्रदेश के कर्मचारी अधिकारी आक्रोशित हैं।उन्होंने बताया कि फेडरेशन 14 सूत्रीय मांगों को लेकर 3 सितम्बर 2021 का प्रदेश बंद कराया था। उक्त आंदोलन को संज्ञान में लेते हुए मुख्यमंत्री द्वारा समय-सीमा तय करते हुए पिंगुआ कमेटी गठित की गई है। लेकिन उक्त कमेटी द्वारा आज दिनांक तक सरकार को रिपोर्ट नहीं सौपी गई है। जिसके कारण कर्मचारी जगत व्यथित है।


समस्या समाधान नहीं होने से कर्मचारियों में रोष

फेडरेशन वर्ष 2022 में अपने मौलिक अधिकार महंगाई भत्ता, सातवें वेतनमान अनुसार गृह भाड़ा भत्ता एवं डी.ए. एरियर्स के लिए निश्चित कालीन एवं ऐतिहासिक अनिश्चितकालीन आंदोलन भी कर चुका है। प्रदेश के वरिष्ठ मंत्री रविन्द्र चौबे से फेडरेशन के प्रतिनिधियों के साथ 02 सितंबर 2022 को मीडिया के समक्ष हुए सशर्त समझौते अनुसार पूर्ण आदेश जारी किया जाना था, किन्तु आंशिक आदेश जारी होने से सरकार के प्रति कर्मचारियों में भारी आकोश व्याप्त है। 26 फरवरी 2023 को छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के आयोजित हुए बैठक में शासन के उपेक्षा पूर्ण रवैये के लोकतांत्रिक विरोध एवं माँगों के निराकरण हेतु शासन का ध्यान आकृष्ट करने के लिए चरणबद्ध ‘आश्वासन नहीं समाधान आंदोलन करने का निर्णय लिया गया था। जिसके तहत प्रथम चरण में 03 मार्च 2023 को जिला / ब्लॉक / तहसील स्तरीय रैली निकालकर प्रदर्शन एवं द्वितीय चरण में दिनांक 18 मार्च 2023 को रायपुर में प्रांत स्तरीय प्रदर्शन किया गया।

ये हैं मुख्य माँगें

लिपिक संवर्ग के वेतन विसंगति का निराकरण साथ ही सहायक शिक्षक एवं समस्त एल.बी. संवर्ग की पूर्व सेवा की गणना वेतन विसंगति एवं समस्त लाभ, शिक्षा विभाग संवर्ग, स्वास्थ विभाग संवर्ग, महिला बाल विकास, वन विभाग, पशु पालन सहित अन्य कर्मचारी संवर्ग का वेतन विसंगति सहित 14 सूत्रीय मांगों के लिए दिनोक 17 सितंबर 2021 को गठित पिंगुआ कमेटी की रिपोर्ट सरकार को तत्काल सौपी जाये।

प्रदेश के कर्मचारियों एवं पेंशनरों को लंबित 5 प्रतिशत

महंगाई भत्ता एवं सातवें वेतनमान अनुसार गृह भाड़ा भत्ता स्वीकृति आदेश जारी किया जाये। जन घोषणा पत्र में उल्लेखित चार स्तरीय पदोन्नत वेतनमान स्वीकृति आदेश जारी किया जाये। साथ ही घोषणा पत्र में उल्लेखित अन्य मांगों को पूरा किया जावें ।प्रदेश के विभिन्न कर्मचारी संगठनों द्वारा समय समय पर अपनी मांगों को लोकतांत्रिक तरीके से शासन के समक्ष रखने के लिए रायपुर नगर निगम क्षेत्र अंतर्गत पंडरी, पुराना बस स्टैंड को धरना स्थल घोषित किया जाये।

पंचायत सचिवों की हड़ताल स्थगित

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से मंगलवार देर शाम मुलाकात के बाद प्रदेश पंचायत सचिव संघ ने अपनी हड़ताल को स्थगित कर दिया है। ज्ञातव्य है कि प्रदेश पंचायत सचिव संघ छत्तीसगढ़ द्वारा 16 मार्च से काम बंद-कलम बंद अनिश्चित कालीन हड़ताल पर थे।

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