
जिस पर दोनों पैर से विकलांग थका हारा मायूस होकर नया बस स्टैंड स्थित होटल में जलपान करने पहुँचा इस दौरान मीडिया कर्मियों का ध्यान गया और मानवता का परिचय देते हुए तत्काल कलेक्टर को मेसेज किया गया जिसके बाद कलेक्टर गभीरता दिखाते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीम को भेजकर दोनो विकलांगो को कलेक्ट्रेट बुलाया और एक विकलांग को बैटरी वाली रिक्सा हेलमेट दिया गया।दूसरे विकलांग का प्रमाण पत्र तत्काल बनाने स्वास्थ्य विभाग को निर्देशित किया गया।

दो विकलांग दल्लीराजरा से 27 किमी की दूरी तय कर 1400 रुपये का किराये का ऑटो लेकर पहुचे थे कलेक्ट्रेट
बुधवार को दल्लीराजरा से 27 किमी की दूरी तय कर 1400 रुपये का किराये का ऑटो लेकर दल्लीराजरा के वार्ड चार के निवासी 32 वर्षीय देवेंद्र कुमार और 22 वर्षीय फलेश्वर अलेन्द्र दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाने के लिए पहुंचे थे।दोनो विकलांग जो चल नहीं सकता था।धटने के सहारे चलते है। इसी तरह अपनी बारी का इंतजार कर रहे लोगों में कई खामियां बताकर खाली हाथ ही लौटा दिया गया। मौजूद दिव्यांग ने बताया कि कई बार डॉक्टर से परामर्श के अनुसार जांच के लिए इतने चक्कर काटने पड़ते हैं कि प्रमाण पत्र मिलने में ही कई माह लग जाते हैं।

विकलांगता प्रमाण पत्र लेकर पेंशन के लिये भटक रहा है फलेश्वर अलेन्द्र
दल्लीराजरा नगर पालिका के अंतर्गत वार्ड नंबर 4 का रहने वाला फलेश्वर विकलांगता प्रमाण पत्र लेकर पेंशन के लिये भटक रहा है , लेकिन पिछले 2 साल से नगर पालिका व कलेक्ट्रेट का चक्कर काटने के बाद भी उसे पेंशन का लाभ नही मिल रहा है।जन्म से ही दोनो पैरों से विकलांग ठोकरे खाने के बाद हताश हो गया है लेकिन जिम्मेदारो को अभी तक कोई फर्क नही पड़ा है। विकलांग फलेश्वर का कहना है कि में आवेदन भी दे चुका हूं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही हैं सरकार योजनाएं तो कई चला रही हैं और विकलांगो को पेंशन भी दे रहीं हैं लेकिन अधिकारियों की मिलीभगत से एक विकलांग व्यक्ति जो चलने में असमर्थ हैं फिर भी पेंशन योजना का लाभ नही मिल रहा है। दल्लीराजरा नगर परिषद सीएमओ से पेंशन पाने के लिए कई बार लिखित और मौखिक गुहार लगा चुका है लेकिन निराशा ही हाथ लगी है ।




















