बालोद- बालोद जिले के मालीघोरी धान संग्रहण केंद्र में 18 मई को सामने आया था मामला अभी तक पूरी तरह सुलझा ही नही कि फिर एक बार गड़बड़ी का मामला सामने आया है इस बार मामला संग्रहण केंद्र प्रभारी एवं अधीनस्थ कर्मचारियों द्वारा कुशल कर्मचारियों के ही परिजनों का फर्जी हाजिरी लगाकर भ्रष्टाचार करने के आरोप का है पूरे मामले में मालीघोरी सहित आसपास के ग्रामीणों एवं कर्मचारियों ने शुक्रवार को कलेक्टर जनदर्शन में ज्ञापन दिया। जिसमें कुशल कर्मचारियों के परिजनों के अकाउंट 2 माह का भुगतान किया गया जिसका राशि लगभग एक लाख से ऊपर बताई जा रही है। ज्ञापन के अनुसार जिन लोगों को भुगतान किया गया है उसे संग्रहण केंद्र में कार्य करना दर्शाया गया है, जबकि ये व्यक्ति कभी काम पर नहीं गए। संग्रहण केंद्र प्रभारी मधुसूदन यादव और कार्यालय में अधिनस्थ कर्मचारी की मिलीभगत से जमकर भ्रष्टाचार किया जा रहा है। जब इस संबंध में संवाददाता ने धान संग्रहण केंद्र मालीघोरी प्रभारी मधुसूदन यादव टालमटोल कर जवाब देते हुए मजदूरों को देने लिए ही कर्मचारियों के परिजनों के अकाउंट में पैसा डाला जाना बताया गया।
आपको बता दें कि कलेक्टर जन चौपाल का टोकन नंबर 2220122001241 सुरक्षा क्रमांक 600 के ज्ञापन के अनुसार धान संग्रहण केन्द्र मालीघोरी में विगत कुछ माह से भ्रष्टाचार किया जा रहा है जिसमें संग्रहण केन्द्र प्रभारी मधुसूदन यादव एवं अधीनस्थ कर्मचारियों द्वारा मिली भगत कर विगत 2 माह से फर्जी तरीके से संग्रहण केन्द्र के ही कुशल कर्मचारी खोमलाल देशमुख,उमेश्वर भेडिया,अमरुराम साहू एवं संजय यादव के परिजनों के खातों में मजदूरी भुगतान कर राशि निकालकर लाखों रुपये का गबन करने का आरोप लगाया है,और भुगतान किए गए महिलाओं का संग्रहण केन्द्र में कार्यों से किसी भी प्रकार का संबंध नहीं होना बताया गया है और उनके खातों में फर्जी भुगतान किया जा रहा है, जिन महिलाओं के खातों में फर्जी भुगतान किया गया हैं उसमें दमयंती पति खोमलाल,नीता यादव पति संजय,मीना पति उमेश्वर,सरोज पति अमरुराम,गीता पति पतिराम,हुलसी पिता अमरुराम शामिल है। धान संग्रहण केंद्र में कर्मचारियों द्वारा लापरवाही पूर्वक फर्जी तरीके से घर बैठे लोगों की हाजिरी लगाई जा रही है। ज्ञापन में संग्रहण केंद्र मालीघोरी के भ्रष्टाचार की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।
मामला उजागर होने के बाद 50 हजार भेजवाये
मालीघोरी धान संग्रहण केंद्र प्रभारी द्वारा किये जा रहे इस अनियमितता को लेकर जब ग्रामीणों द्वारा जनचौपाल में शिकायत किया गया और मामला मीडिया के माध्यम से प्रकाश आने के बाद संग्रहण केंद्र प्रभारी ने आनन फानन में अपने ही कर्मचारी के हाथ से 50 हजार रुपये नकदी भिजवाए जबकि शासन के नियमानुसार मजदूरी का भुगतान सीधे मजदूरों के खातों में आबंटित की जाती है संग्रहण केंद्र प्रभारी ने खुद को बचाने की जल्दबाजी में नकदी रकम लौटाकर खुद मामले पर लगे आरोप को भी प्रमाणित कर फ़िया उक्त राशि मजदूरों को लौटाए जाने के बाद स्थानीय ग्रामीणों ने लिखित रूप से जानकारी दी है
जबकि मामले पर संग्रहण केंद्र प्रभारी से पूछने पर बताया गया था कि संग्रहण केंद्र के कर्मचारियों के परिजनों के अकाउंट में पैसा डाला है लेकिन मजदूरों के लिए है किसी ने अकाउंट नंबर नहीं दिया इसलिए कर्मचारियों के परिजनों के खाता नंबर लेकर में पैसा डाला गया है जिसमें एक के खाता में अभी तक पैसा नहीं डाला है। वही इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला विपणन अधिकारी से भी संवाददाता द्वारा बात किये जाने पर उन्होंने मामले की जानकारी नही होने का हवाला दिया था
पूरे मामले में जिस तरह से संग्रहण केंद्र प्रभारी द्वारा मजदूरों के हक के पैसे पर डाका डालने का प्रयास किया है और शिकायत के बाद सीधे नकदी 50 हजार रुपये की वापसी कर मामले को दबाने के प्रयास किया जा रहा है देखना होगा इस गंभीर मामले में जिला प्रशासन आगे किस तरह का रुख अख्तियार करती है और मजदूरों के मजदूरी और टेढ़ी नजर रखने वाले ऐसे जिम्मेदार अधिकारी पर क्या कार्यवाही करती है