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कितना कठिन होगा सिंचाई विभाग में एक क्लर्क से  राष्ट्रपति जैसे सर्वोच्च पद के उम्मीदवार तक का सफर…कौन है द्रोपदी मुर्मू…जिन्हें एनडीए से राष्ट्रपति पद का बनाया गया  उम्मीदवार

 

 

18 जुलाई को होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के लिए पहले विपक्ष ने यशवंत सिन्हा को अपना सम्मिलित उम्मीदवार बनाया है। तो ईधर एनडीए ने भी उम्मीदवार का ऐलान करते हुए द्रौपदी मुर्मू एनडीए को बनाये राष्ट्रपति उम्मीदवार 

भाजपा समर्थित एनडीए ने मंगलवार को भारत के अगले राष्ट्रपति पद के लिए अपने उम्मीदवार के नाम का ऐलान कर दिया है। भाजपा  ने फिर एक बार चौंकाने वाला फैसले लेते हुए एक ऐसे चेहरे को राष्ट्रपति चुनाव के लिए मैदान में उतारे जिसको लेकर किसी के भी जुबान मे इस नाम की चर्चा नही थी हालांकि अटकलें थी कि भाजपा व एनडीए फिर से दलित व आदिवासी चेहरे पर अपना दांव खेल सकती है लेकिन ओड़िशा जैसे राज्य से एक आदिवासी महिला के चेहरे के रूप में।द्रोपदी मुर्मू को सामने लाएंगे  इस बात से ज्यादातर लोग अनजान थे  दिल्ली में भाजपा हेडक्वार्टर में हुई संसदीय बोर्ड की बैठक में यह फैसला लिया गया। बैठक में पीएम मोदी के अलावा पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, नितिन गडकरी व अन्य कई नेता मौजूद थे।

कौन है द्रोपदी मुर्मू ,क्या है इनकी राजनीतिक इतिहास

द्रौपदी मुर्मू का जन्म 20 जून 1958 को ओडिशा के मयूरभंज जिले के बैदापोसी गांव में हुआ था. उनके पिता का नाम बिरंची नारायण टुडू है. वह आदिवासी संथाल परिवार से ताल्लुक रखती हैं. 

द्रौपदी मुर्मू का विवाह श्याम चरण मुर्मू से हुआ था. दंपति के दो बेटे और एक बेटी हुई. लेकिन शादी के कुछ समय बाद ही उन्होंने पति और अपने दोनों बेटों को खो दिया.  घर चलाने और बेटी को पढ़ाने के लिए मुर्मू ने एक टीचर के रूप में अपने करियर की शुरुआत की और फिर उन्होंने ओडिशा के सिंचाई विभाग में एक कनिष्ठ सहायक यानी क्लर्क के पद भी नौकरी की. 

मां ने नौकरी से मिलने वाले वेतन से घर खर्च चलाया और बेटी इति मुर्मू को पढ़ाया-लिखाया. बेटी ने भी कॉलेज की पढ़ाई के बाद एक बैंक में नौकरी हासिल कर ली. इति मुर्मू इन दिनों रांची में रहती हैं और उनकी शादी झारखंड के गणेश से हो चुकी है. दोनों की एक बेटी आद्याश्री है. 

द्रौपदी मुर्मू ने साल 1997 में रायरंगपुर नगर पंचायत के पार्षद चुनाव में जीत दर्ज कर अपने राजनीतिक जीवन का आगाज किया था. 

उन्होंने भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा के उपाध्यक्ष के रूप में कार्य किया. साथ ही वह भाजपा की आदिवासी मोर्चा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की सदस्य भी रहीं. 

द्रौपदी मुर्मू ओडिशा के मयूरभंज जिले की रायरंगपुर सीट से 2000 और 2009 में बीजेपी के टिकट पर दो बार विधायक बनीं. 

ओडिशा में नवीन पटनायक के बीजू जनता दल और भाजपा गठबंधन की सरकार में द्रौपदी मुर्मू को 2000 और 2004 के बीच वाणिज्य, परिवहन और बाद में मत्स्य और पशु संसाधन विभाग में मंत्री बनाया गया. 

द्रौपदी मुर्मू मई 2015 में झारखंड की 9वीं राज्यपाल बनाई गई थीं. उन्होंने सैयद अहमद की जगह ली थी. झारखंड हाईकोर्ट के तत्कालीन चीफ जस्टिस चीफ जस्टिस वीरेंद्र सिंह ने द्रौपदी मुर्मू को राज्यपाल पर की शपथ दिलाई थी. 

झारखंड की पहली महिला राज्यपाल बनने का खिताब भी द्रौपदी मुर्मू के नाम रहा. साथ ही वह किसी भी भारतीय राज्य की राज्यपाल बनने वाली पहली आदिवासी हैं. 

अगर द्रौपदी मुर्मू देश की राष्ट्रपति बनती हैं, तो वह ओडिशा से देश की राष्ट्रपति बनने वाली दूसरी शख्स होंगी. पता हो कि द्रौपदी मुर्मू से पहले ओडिशा से वीवी गिरी देश के राष्ट्रपति रह चुके हैं. 

राष्ट्रपति पद के लिए आदिवासी चेहरा
भाजपा ने इस बार राष्ट्रपति पद के लिए एक आदिवासी चेहरे का चयन किया है। द्रौपदी मुर्मू झारखंड की पूर्व राज्यपाल हैं। जानकारी के मुताबिक केंद्र में एनडीए के घटक दल बीजू जनता दल ने भी द्रौपदी मुर्मू के नाम पर सहमति जताई है। अगर मुर्मू चुनाव जीतती हैं तो वह देश की पहली आदिवासी राष्ट्रपति होंगी। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा कि पहली बार एक महिला आदिवासी को प्राथमिकता दी जा रही है।

जानकारों का कहना है कि गुजरात, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के चुनाव को देखते हुए भाजपा आदिवासी समुदाय पर फोकस कर रही है। इसके अलावा यह एक अलग तरह का चयन है क्योंकि अब तक देश में कोई आदिवासी राष्ट्रपति नहीं बना। महिला आदिवासी अगर राष्ट्रपति बनती है तो भाजपा को चुनावी फायदा भी मिल सकता है।

18 जुलाई को राष्ट्रपति चुनाव होंगे और 21 जुलाई को परिणाम घोषित किए जाएंगे। नामांकन की आखिरी तारीख 29 जून है। 25 जुलाई को नए राष्ट्रपति का शपथ ग्रहण होगा। इस साल कुल 4809 इलेक्टर वोट करेंगे। इसके अलावा कोई भी राजनीतिक दल अपने सदस्यों के लिए विप नहीं जारी कर सकता है। बता दें कि इस चुनाव में लोकसभा, राज्यसभा या फिर विधानसभाओं के नामित सदस्य भाग नहीं लेते हैं।

 

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