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घरेलू गैस सिलेंडर के दाम आसमान पर…घरों से सिलेंडर हो रहे गायब…लोग वापस चूल्हे में बनाने लगे भोजन

बालोद- रसोई गैस सिलिंडर की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के कारण ग्रामीण क्षेत्र के उपभोक्ताओं ने रिफिलिंग करवाना बंद कर दिया है। महिलाएं अपने घरों में पुरानी पद्धति यानी चूल्हे से भोजन पका रही हैं। रसाई गैस की रिफिलिंग में भारी गिरावट आई है। दूसरी ओर गैस सिलिंडर एजेंसी संचालकों का कारोबार काफी प्रभावित हुआ है। घरेलू रसोई गैस सिलिंडर की कीमत ने ग्रामीण परिवार का बजट बिगड़ दिया है। ग्रामीणों ने कई महीने से रिफिलिंग करवाना बंद कर दिया है। गैस सिलिंडर धूल खा रहा है। गैस सिलिंडर का दाम चार सौ रूपये से बढ़ाकर 10 80 स्र्पये तक पहुंच गया है। जब चार सौ स्र्पये का सिलिंडर था। तब 90 प्रतिशत उज्ज्वला योजना के लाभार्थी गैस चूल्हे का प्रयोग करते थे।

आम लोगो को झेलनी पड़ रही चौतरफा महगाई की मार

मिली जानकारी के अनुसार वर्तमान में घरेलू गैस सिलिंडर के दामों में बेतहाशा वृद्घि देखने को मिला है। 14.2 किग्रा. के घरेलू गैस सिलिंडर वर्तमान में 1080 रुपये हो चुका है। इस महंगाई में आम आदमी की कमर पहले ही टूट चुकी है वही सिलिंडर के दामों में हर महीने बढ़ोतरी होने से आम आदमी को चौतरफा महंगाई की मार झेलनी पड़ रही है। जुलाई 2021 में एलपीजी सिलिंडर के दाम 914.50 रुपये थी। जो मई 2022 में 14.2 किग्रा 1080 रुपये हो चुका है।

 

80 प्रतिशत उपभोक्ता ही रोजाना गैस सिलेंडर का कर रहे उपयोग

गैस एजेंसी बालोद के कर्मचारियों के अनुसार 25 हजार उपभोक्ता है। जिसमें हर माह 12-13 हजार उपभोक्ता रिफिलिंग कराने पहुंच रहे है। 7-8 हजार उपभोक्ता ऐसे है, जो 3 से 6 माह के अंतराल में पहुंचते है। इस लिहाज से 6 माह में 80% उपभोक्ता रोजाना गैस सिलेंडर का उपयोग कर रहे है लेकिन 20% ऐसे है, जो साल में कभी कभार रिफिलिंग करवाने पहुंचते है या नहीं पहुंच रहे है।

 

उपभोक्ताओं को नही मिलता सब्सिडी

केंद्र सरकार द्वारा पंचायत स्तर पर गरीबी रेखा में आने वाले पात्र परिवार को गैस सिलिंडर का वितरण किया गया था। इसके साथ ही केन्द्र सरकार द्वारा एलपीजी सिलिंडर के रिफिलिंग पर सब्सिडी प्रदान किया जाता था। सब्सिडी आना तो सालों पहले बन्द हो चुका है लेकिन दामों में कटौती कर आम आदमी को राहत पहुचाने के बजाय इसकी कीमतों में बेतहाशा वृद्घि की जा रही है। केन्द्र सरकार द्वारा सिलिंडर वितरण किया गया तब इसकी कीमत कम थी। अब बढ़ी हुई कीमतों के कारण ग्रामीण इलाकों में इसका इस्तेमाल बहुतायत बन्द कर दिया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले उपभोक्ता जो मजदूरी करके अपने परिवार का पेट पालता है। ऐसे उपभोक्ता अब पुनः अपने चूह्ले में खाना पकाने लगे हैं।

सरकार ने गिरीबो के ऊपर डाल दिया अतरिक्त बोझ

जैसे ही कीमत में बढ़ने लगी। सिलिंडर रिफिलिंग करवाने की क्षमता घटती चली गई। मेढ़की निवासी गौराम यादव ने बताया कि इससे पहले उज्ज्वला योजना का लाभ नहीं मिल रहा था। भारी मशक्कत करने के बाद इस बार मुफ्त में गैस सिलिंडर व चूल्हा मिला है। लेकिन दाम बढ़ने से रिफिलिंग करवाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। सिलिंडर और चूल्हा घर के एक कोने में पड़ा है। चूल्हे से भोजना पका रहे हैं। ओमप्रकाश ने बताया कि हम एक बार तो कहीं पैसे की व्यवस्था कर रिफिलिंग करवा लेते हैं। लेकिन हर माह खर्च करना हम गरीबों के लिए संभव नहीं है। सरकार ने गरीबों को ऊपर अतिरिक्त बोझ डाल दिया है।

ये है योजना का उद्देश्य

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक मई 2016 को उज्ज्वला योजना की शुरुवात की थी। गरीब महिलाओं को मुफ्त में गैस सिलिंडर और चूल्हा प्रदान करना था। योजना के तहत बालोद जिले के लाखों परिवार को रसोई गैस कनेक्शन दिया गया है। छह साल के भीतर ग्रामीण क्षेत्र के करीब 80 प्रतिशत गरीब परिवार को मुफ्त में गैस सिलिंडर उपलब्ध कराया गया है।

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