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किसानों के धान पककर हुआ तैयार..समर्थन मूल्य में बेचने करना होगा 1 माह इंतजार… मंडी में पहुंच रहा प्रतिदिन एक हजार क्विंटल से अधिक धान..किसानों को हो रहा इतना नुकसान

बालोद-किसानों को समर्थन मूल्य में धान बेचने के लिए 33 दिनों तक इंतजार करना पड़ेगा।ऐसे में किसानों को अब अपने धान को मजबूरी में मंडी में बेचना पड़ेगा। कृषि उपज मंडी बालोद में नए धान की आवक शुरू हो गई है, जो प्रति क्विंटल 1400 से1500 रुपये बिक रहा है। पिछले तीन-चार दिनों से मंडी में 1000 से 1200 किवंटल धान की आवक हो रही है। समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी शुरू नहीं होने से किसानों को मजबूरी में धान बेचना पड़ रहा है। किसानों ने शासन से 1 नवंबर से ही समर्थन मूल्य पर धान बेचने की मांग शासन से किया है। ताकि समय पर रुपये की व्यवस्था हो सके और आसानी से दिवाली मना सके। बता दे राज्य सरकार ने समर्थन मूल्य पर 1 दिसबर से धान खरीदने धोषित किया गया है।जिसके बाद किसानों ने सरकार की इस फैसले पर नाराजगी जाहिर किया है।

धान बेचने मंडी में पहुच रहे किसान

दशहरा पर्व मनाने के बाद अंचल में खरीफ सीजन धान फसल की कटाई मिंजाई कार्य शुरू हो गई है। किसान-मजदूर कटाई मिंजाई में व्यस्त हैं। मिंजाई के बाद उत्पादित धान को किसान बेचने के लिए मंडी ला रहे हैं, लेकिन मंडी में उन्हें संतोषजनक दाम नहीं मिल रहे हैं। किसानों ने बताया कि पिछले दिनों उनके नए धान को पंद्रह 1500 रुपये क्विंटल में खरीदा गया, जो कि बहुत ही कम है।किसानों का कहना है कि समर्थन मूल्य पर धान खरीदी शुरू नहीं होने के कारण उन्हें मजबूरी में मंडी में धान बेचने के लिए लाना पड़ रहा है। किसानों ने कहा कि एक माह तक धान को नही रख सकते।धान को बेचकर कटाई मिजाई कार्य करने वाले मजदूरों को पैसा देना है इसके लिए मजबूरी में मंडी में कम दाम पर धान बेचना पड़ रहा हैं।किसानों ने कहा कि राज्य सरकार 1 नवंबर को समर्थन मूल्य पर धान खरीदी प्रारभ करे ताकि हम किसान उत्पादित धान को समर्थन मूल्य पर खरीदी केंद्रों में जाकर सीधे बेच सकें।

कोचियों को औने पौने में दाम पर बेच रहे धान

ग्रामीण अंचल में धान खरीदी के लिए कोचिया सक्रिय है, जो किसानों से धान खरीदकर राइस मिलों व मंडी में बेचते हैं। खरीफ सीजन धान को औने-पौने दाम में मांग रहे हैं। मंडी में धान को 1400 से 1500 में रुपये में खरीदा जा रहा है, तो गांवों में कोचिया धान को 1300 रुपये में किसानों से खरीद रहे हैं। औने-पौने दाम पर धान की मांग करने से किसानों में आक्रोश है।

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