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नवनिर्मित पीजी कॉलेज बिल्डिंग की दरकने लगी दीवारें…दो करोड़ 40 लाख की लागत से निर्मित भवन ….निर्माण कार्य मे हुई है बड़ी लापरवाही व भ्रष्टाचार

 

बालोद-बालोद जिला मुख्यालय के शासकीय पीजी महाविद्यालय के दीवारों पर दिखने वाले अलग अलग रंगों की पट्टियां कोई कलाकृति नही बल्कि लोक निर्माण विभाग की लीपापोती है जो ठेकेदार के कमियों को सीमेंट से ढकने का प्रयास करते दिखाई दे रही है बालोद शासकीय महाविद्यालय में नवनिर्मित 14 अतरिक्त कमरों की दीवारों पर दरार ही दरार नजर आने लगी है। इससे निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े होते देख विभाग भी कमियों को ढकते नजर आ रहे हैं। लोक निर्माण विभाग के अंतर्गत करीब 2 करोड़ 40 लाख की लागत से शासकीय पीजी कालेज का अतिरिक्त कमरों का निर्माण किया गया है।वही विभाग और ठेकेदार की साठगांठ से कमरों में दरार को छुपाने के लिए इस भवन में दरारों को सीमेंट से भरा जरा रहा है।

विभाग निर्माण एजेंसी पर मेहरबान

हालांकि इस मामले मे पीडब्यूडी विभाग ने कहा की कमरों में दरार पड़े जगहों की मरम्मत करने के आदेश निर्माण करने वाले ठेकेदार को दिया गया था। जिन्होंने ने मरम्मत कार्य पूरा कर लिया है। लेकिन विभाग इस मामले में कार्यवाई का सिर्फ दिखावा कर निर्माण एजेंसी पर मेहरबान हो गया। लेकिन अभी भी इस भवन में दरारें पड़ रही है। लेकिन निर्माण के कम समय मे ही कॉलेज भवन की दुर्गति इस भवन की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे है।


बेस को लेकर उठे सवाल

जानकारों के अनुसार, बेस के निर्माण में खामियों की वजह से नवनिर्मित भवन की दीवारों पर दरार आई है। बताया गया कि कॉलम निर्माण तय मापदण्डों के तहत नहीं होने के साथ गड्ढों की फिलिंग मुरुम की जगह मिट्टी से करने की वजह से बेस कमजोर होने पर दीवारों पर दरार आई हैं। सवाल यह है कि जमीन की स्थिति जानने के बाद भी निर्माण में एहतियात क्यों नहीं बरती गई।

ठेकेदार को संरक्षण

विभाग के जिम्मेदार अधिकारी ठेकेदार का बचाव करते नजर आ रहे हैं। जहां घटिया निर्माण के लिए ठेकेदार को नोटिस जारी करना भी उचित नही समझा गया। स्पष्ट है कि गुणवत्ताहीन निर्माण के लिए जितना जिम्मेदार ठेकेदार है, उतना ही विभाग का इंजीनियर जिम्मेदार है, जिसने निर्माण के दौरान गड़बडिय़ों को नजरअंदाज किया।

तीन साल पहले 2 करोड़ 40 लाख की लागत से हुआ था भवन का निर्माण, एक साल में ही पड़ने लगी दरार

मिली जानकारी के मुताबिक पीजी कॉलेज में विद्यार्थियों की बढ़ती संख्या व पुराने कॉलेज भवन की जर्जर स्थिति को देखते हुए। शासन ने साल 2016 में 14 अतिरिक्त कमरा निर्माण के लिए स्वीकृति दिए थे। भवन का निर्माण तीन साल पहले ही पूरा हुआ। लेकिन भवन निर्माण के एक साल में ही नवनिर्मित भवन में दरार पड़ने लगा। और दो साल के भीतर से ही सभी 14 कमरों में बड़ी बड़ी दरारें पड़ गई।

कॉलेज प्रबंधन ने पीडब्ल्यूडी को भवन की मरम्मत के लिए दिया था आवेदन,

कॉलेज के प्राचार्य जेके खलको के मुताबिक तीन साल पहले ही इस नवनिर्मित अतिरिक्त कमरे में पड़े दरार की मरम्मत के लिए पीडब्यूडी को आवेदन दिया था।फिर पीडब्ल्यूडी द्वारा निर्माण एजेंसी ठेकेदार जैन कंट्रक्शन दल्लीराजहरा को मरम्मत करने के निर्देश दिए । जिसके बाद इसी साल इस भवन में पड़े दरारों को भरा गया व पूरे कमरों की मरम्मत की गई।

शिक्षा के मन्दिर में भी कर रहे गड़बड़ी

शिक्षा के मंदिर निर्माण में भी हो रही गड़बड़ी से केकॉलेज के छात्र भी खासे नाराज दिखाई दिए। कॉलेज के विद्यार्थी प्रशांत पवार ने कहा। जहां हजारो विद्यार्थी बैठकर पढाई करेंगे ऐसे जगहों के निर्माण में गड़बड़ी चिंता का विषय है।इस कॉलेज भवन के अतिरिक्त कमरों को बने अभी ज्यादा साल भी नही हुए है। लेकिन इस तरह की जर्जर स्थिति होना। इस भवन निर्माण मे गड़बड़ी को दर्शाता है।

भवन की मरम्मत करने ठेकेदार को भेजे नोटिस

बीके गोटी एसडीओ पीडब्ल्यूडी- जिस जगह भवन बनाया गया है वह पथरीली जगह है। इस वजह से भवन में दरार पड़ी है। हमने निर्माण करने वाले ठेकेदार को नोटिस भेजकर उसकी मरम्मत करवाने के लिए निर्देश दिए थे। जिस पर भवन की मरम्मत की गई है।

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