बालोद। आसमान में चक्रवात का असर, मौसम की अनिश्चितता और जनजीवन प्रभावित होने की आशंका के बीच भी जिंदगी की नई शुरुआत का सिलसिला नहीं थमा। जब प्रतिकूल मौसम के कारण सामान्य जनजीवन पर असर पड़ने की आशंका थी, तब बालोद जिले के पिपरछेड़ी स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में चार घरों में खुशियों ने दस्तक दी। यहां 24 घंटे के भीतर चार गर्भवती महिलाओं का सुरक्षित प्रसव कराया गया। दो बेटों और दो बेटियों के जन्म के साथ स्वास्थ्य केंद्र का परिसर चार परिवारों की खुशियों का गवाह बना। यह उपलब्धि बताती है कि परिस्थितियां कितनी भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों, समय पर चिकित्सा सुविधा और स्वास्थ्यकर्मियों की तत्परता से उम्मीद की नई किरण जगाई जा सकती है।

मौसम की चुनौती के बीच जिम्मेदारी को दी प्राथमिकता
चक्रवात ‘अर्बन’ के प्रभाव के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारु बनाए रखना प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के लिए महत्वपूर्ण था। विशेषकर गर्भवती महिलाओं को समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना जरूरी था, क्योंकि प्रसव जैसी परिस्थितियों में किसी भी तरह की देरी मां और नवजात के लिए जोखिम पैदा कर सकती है।
ऐसे समय में पिपरछेड़ी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की टीम ने अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए प्रसव संबंधी सेवाएं जारी रखीं। चिकित्सकों, नर्सों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के सामूहिक प्रयासों से चार प्रसव सुरक्षित रूप से संपन्न हुए। चुनौतीपूर्ण मौसम के बीच स्वास्थ्य सेवाओं की यह निरंतरता जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य व्यवस्था की महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में सामने आई।

कहीं बेटे का जन्म, तो कहीं बेटी की किलकारी
पिपरछेड़ी स्वास्थ्य केंद्र में हुए चार प्रसवों ने चार परिवारों के लिए यह दिन यादगार बना दिया। ग्राम बोरी की ममता प्रजापति ने बेटे को जन्म दिया, जबकि ग्राम बिरेतरा की लिकेश्वरी के घर बेटी आई। ग्राम चारवाही की संतोषी ने भी बेटी को जन्म दिया, वहीं इसी गांव की वंदना साहू के घर बेटे की किलकारी गूंजी।
चारों प्रसव सुरक्षित रूप से संपन्न होने की जानकारी स्वास्थ्य विभाग ने दी है। एक ही स्वास्थ्य केंद्र में 24 घंटे के भीतर चार सुरक्षित प्रसव होना न केवल इन परिवारों के लिए खुशी का अवसर है, बल्कि प्रतिकूल परिस्थितियों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपयोगिता को भी सामने लाता है।
स्वास्थ्यकर्मियों के समर्पण ने बनाया संभव
इस उपलब्धि के पीछे स्वास्थ्य केंद्र की टीम की सक्रियता और सामूहिक प्रयास रहे। प्रसव संबंधी सेवाओं में डॉ. दुष्यंत सोनबोईर, डॉ. उस्मान खान, सरस्वती साहू, गुमिता साहू, मनीषा साहू, स्टाफ नर्स कविता, सुरेश साहू, गीतांजलि राणा, भारती भंडारी और पूनम चुरेंद्र का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
स्वास्थ्य सेवाओं की असली ताकत केवल संसाधनों में नहीं, बल्कि उन लोगों की प्रतिबद्धता में भी होती है, जो जरूरत के समय अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए तत्पर रहते हैं। पिपरछेड़ी स्वास्थ्य केंद्र में हुए ये प्रसव इसी भावना को रेखांकित करते हैं। प्रतिकूल मौसम के बीच गर्भवती महिलाओं को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना और प्रसव प्रक्रिया को सुरक्षित ढंग से पूरा करना स्वास्थ्य टीम के समन्वित प्रयासों का परिणाम रहा।
प्रशासन की निगरानी में आवश्यक सेवाओं की निरंतरता पर जोर
कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा के नेतृत्व में जिला प्रशासन द्वारा प्रतिकूल परिस्थितियों में आवश्यक सेवाओं को जारी रखने पर जोर दिया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की यह उपलब्धि भी इसी दिशा में किए गए प्रयासों के महत्व को सामने लाती है। आपदा या खराब मौसम के दौरान सड़क, परिवहन और जनजीवन प्रभावित होने की आशंका के बीच स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना बेहद जरूरी हो जाता है।
पिपरछेड़ी स्वास्थ्य केंद्र में 24 घंटे के भीतर चार सुरक्षित प्रसव की यह कहानी केवल एक स्वास्थ्य संबंधी उपलब्धि नहीं, बल्कि उन परिवारों की खुशी और स्वास्थ्यकर्मियों के समर्पण की कहानी भी है, जिन्होंने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में अपनी जिम्मेदारी निभाई।
चक्रवात के साये में जहां मौसम की चुनौतियां चिंता बढ़ा रही थीं, वहीं पिपरछेड़ी स्वास्थ्य केंद्र में चार नवजातों की किलकारियों ने उम्मीद और खुशियों का संदेश दिया। यह उपलब्धि याद दिलाती है कि स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता केवल व्यवस्था का हिस्सा नहीं, बल्कि हर उस परिवार के भरोसे से जुड़ी है, जिसके लिए सुरक्षित प्रसव जीवन का सबसे अनमोल क्षण होता है।













