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ओबीसी की जातिवार जनगणना की मांग तेज, महासभा ने राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन

जनगणना के प्रश्न क्रमांक 10 में ओबीसी का स्पष्ट उल्लेख करने की मांग, राज्यवार जाति सूची और अलग-अलग जाति कोडिंग शामिल करने की अपील

बालोद। वर्ष 2027 में प्रस्तावित जनगणना को निष्पक्ष, पारदर्शी और समावेशी बनाने तथा अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की जातिवार गणना सुनिश्चित करने की मांग को लेकर ओबीसी महासभा ने आवाज बुलंद की है। महासभा ने जिला अध्यक्ष यज्ञदेव पटेल के नेतृत्व में राष्ट्रपति के नाम अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को ज्ञापन सौंपकर वर्तमान जनगणना प्रक्रिया में आवश्यक संशोधन करने की मांग की। महासभा ने स्पष्ट किया कि देश की सामाजिक संरचना, विभिन्न समुदायों की वास्तविक स्थिति और संवैधानिक अधिकारों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जातिवार जनसंख्या के सटीक आंकड़े आवश्यक हैं।

महासभा के अनुसार, अन्य पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की वास्तविक जनसंख्या से संबंधित प्रमाणिक आंकड़े उपलब्ध होने पर ही शिक्षा, आरक्षण, आर्थिक सहायता और लक्षित कल्याणकारी योजनाओं के निर्माण एवं क्रियान्वयन को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। जातिवार आंकड़ों के अभाव में विभिन्न समुदायों की सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक स्थिति का समुचित आकलन करना कठिन होता है। इससे जरूरतमंद वर्गों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने और संसाधनों के न्यायसंगत वितरण की प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है।

जनगणना के प्रश्न क्रमांक 10 में ओबीसी का स्पष्ट उल्लेख हो

ज्ञापन में प्रमुखता से मांग की गई है कि वर्ष 2027 की जनगणना से संबंधित अधिसूचना के प्रश्न क्रमांक 10 में अन्य पिछड़ा वर्ग का स्पष्ट उल्लेख किया जाए। इसके साथ ही अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग की श्रेणियों के अंतर्गत राज्यवार जातियों के नाम की ड्रॉप-डाउन सूची उपलब्ध कराने की मांग की गई है।

महासभा का तर्क है कि जातियों की पहचान और वर्गीकरण की प्रक्रिया स्पष्ट एवं व्यवस्थित होने से आंकड़ों में संभावित त्रुटियों, जातियों के छूटने तथा प्रशासनिक भ्रम की आशंका को कम किया जा सकता है। राज्यवार जाति सूची और निर्धारित जाति कोडिंग की व्यवस्था से जनगणना के आंकड़ों का संकलन अधिक सटीक और व्यवस्थित तरीके से किया जा सकेगा।

महासभा ने कहा कि ओबीसी देश की आबादी का एक बड़ा हिस्सा है और सामाजिक एवं आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके बावजूद विभिन्न समुदायों की वास्तविक जनसंख्या और उनकी परिस्थितियों का सटीक आकलन करने के लिए जातिवार आंकड़ों की उपलब्धता महत्वपूर्ण है। ऐसे आंकड़े नीति निर्माण, सामाजिक न्याय और कल्याणकारी योजनाओं के बेहतर निर्धारण में सहायक हो सकते हैं।

वर्तमान प्रक्रिया रोककर संशोधन के बाद जनगणना कराने की मांग

ओबीसी महासभा ने ज्ञापन के माध्यम से राष्ट्रपति से इस विषय में हस्तक्षेप करने की अपील की है। महासभा ने मांग की कि वर्तमान जनगणना प्रक्रिया को रोककर उसमें आवश्यक संशोधन किए जाएं तथा राज्यवार ओबीसी जाति सूची के अनुरूप जाति कोडिंग की व्यवस्था शामिल करने के बाद प्रक्रिया को हाइब्रिड मोड में दोबारा शुरू किया जाए।

ज्ञापन में यह भी मांग की गई है कि सरकार जातिवार विस्तृत आंकड़े जारी करने के संबंध में स्पष्ट प्रतिबद्धता व्यक्त करे। महासभा का मानना है कि केवल जनसंख्या की गणना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि विभिन्न सामाजिक वर्गों की वास्तविक स्थिति को समझने के लिए आंकड़ों का व्यवस्थित संकलन और उनका सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होना भी महत्वपूर्ण है।

महासभा ने कहा कि प्रमाणिक जातिवार आंकड़ों के आधार पर सरकार को विभिन्न समुदायों की आवश्यकताओं के अनुरूप नीतियां बनाने, कल्याणकारी योजनाओं का बेहतर निर्धारण करने और उपलब्ध संसाधनों के समान वितरण की दिशा में प्रभावी कदम उठाने में मदद मिलेगी। इससे सामाजिक न्याय की अवधारणा को मजबूती मिलने के साथ ही संवैधानिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने में भी सहायता मिल सकती है।

सामाजिक न्याय और नीतिगत नियोजन से जुड़ा है मुद्दा

ओबीसी महासभा ने जातिवार जनगणना को केवल जनसंख्या की गणना तक सीमित विषय नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, प्रतिनिधित्व और विकास की नीतियों से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बताया। महासभा के अनुसार, सटीक आंकड़ों के आधार पर ही विभिन्न वर्गों की आवश्यकताओं और चुनौतियों को बेहतर ढंग से समझा जा सकता है। इससे शिक्षा, रोजगार, आर्थिक अवसरों और सामाजिक कल्याण से जुड़ी योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने का आधार तैयार होगा। महासभा ने उम्मीद जताई कि जनगणना प्रक्रिया में आवश्यक संशोधन कर जातिवार आंकड़ों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी, जिससे पिछड़े वर्गों सहित विभिन्न सामाजिक समुदायों की वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी। इस दौरान ओबीसी महासभा के बड़ी संख्या में पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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