दो भैंसों की गुमशुदगी से शुरू हुई जांच
मामले की शुरुआत 17 जून 2026 को हुई, जब खेरथाडीह निवासी जय नारायण नागवंशी ने अपनी दो भैंसों के गुम होने की रिपोर्ट थाना बालोद में दर्ज कराई। पुलिस ने जांच शुरू की तो पता चला कि अकेले इसी ग्रामीण की भैंसें गायब नहीं हुई थीं। गांव के अन्य ग्रामीणों की भी 14 भैंसें लापता थीं।
इस तरह कुल 16 मवेशियों के गायब होने की जानकारी सामने आई। मामला सामान्य गुमशुदगी से आगे बढ़ा तो पुलिस ने मवेशियों की पतासाजी के साथ संदिग्ध लोगों और उनके संपर्कों की जांच शुरू की।

मोबाइल लोकेशन ने खोली चोरी की कड़ी
जांच के दौरान पुलिस को महत्वपूर्ण सुराग मोबाइल लोकेशन से मिला। तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस टीम ने धनसिंग राऊत उर्फ बटोरी यादव और डेंगा राऊत को ग्राम पाररास से पकड़ा। दोनों ओडिशा के नवरंगपुर जिले के रहने वाले हैं।
पूछताछ में दोनों ने अपने साथी शिवलाल गोंड के साथ मिलकर मवेशियों की खरीद-बिक्री में संलिप्तता स्वीकार की। इसके बाद पुलिस जांच का दायरा और बढ़ा और बालोद जिले के ग्राम कोरगुडा निवासी यशवंत उर्वशा तक पहुंचा।
₹1.50 लाख में हुआ 16 भैंसों का सौदा
पूछताछ में सामने आया कि मवेशी कोचिया यशवंत उर्वशा ने 16 भैंसों को बेचने के लिए धनसिंग राऊत से संपर्क किया था। इसके बाद डेम किनारे 16 नग भैंसों का सौदा ₹1.50 लाख में तय हुआ। आरोपियों के अनुसार, मवेशियों को ओडिशा के रायघर मवेशी बाजार में करीब ₹2 लाख में बेचने की योजना थी। पुलिस के अनुसार, मवेशियों को चोरी कर पैदल हांकते हुए ओडिशा ले जाया गया था। यहीं से पुलिस ने पूरे मामले को अंतर्राज्यीय मवेशी चोरी और खरीद-बिक्री के नेटवर्क के रूप में जांच के दायरे में लिया।
नकदी, बाइक और मोबाइल बरामद
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से ₹28 हजार नकद बरामद किए। इसके अलावा वारदात में आने-जाने के लिए इस्तेमाल की गई ग्लैमर मोटरसाइकिल, रियलमी एंड्रॉयड मोबाइल और संपर्क के लिए इस्तेमाल किया गया जियो की-पैड मोबाइल भी जब्त किया गया।
तीन आरोपी जेल, एक की तलाश जारी
मामले में पर्याप्त अपराध साक्ष्य मिलने के बाद पुलिस ने 27 अगस्त 2026 को तीनों आरोपियों को विधिवत गिरफ्तार किया। उन्हें न्यायालय में पेश किया गया, जहां से न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।
गिरफ्तार आरोपियों में धनसिंग राऊत उर्फ बटोरी यादव और डेंगा राऊत, दोनों जिला नवरंगपुर, ओडिशा के निवासी हैं। तीसरा आरोपी यशवंत उर्वशा बालोद जिले के ग्राम कोरगुडा का रहने वाला है। वहीं, मामले में शामिल शिवलाल गोंड, निवासी डोंगरीपारा (कपेना), थाना रायघर, जिला नवरंगपुर, ओडिशा फरार है। पुलिस टीम उसकी लगातार पतासाजी कर रही है।

पुलिस टीम की अहम भूमिका
कार्रवाई पुलिस महानिरीक्षक दुर्ग रेंज के निर्देशन, पुलिस अधीक्षक बालोद के मार्गदर्शन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के मार्गदर्शन एवं एसडीओपी बालोद के पर्यवेक्षण में की गई। थाना प्रभारी बालोद निरीक्षक शिशुपाल सिन्हा और साइबर सेल प्रभारी सउनि धरम भुआर्य के नेतृत्व में गठित टीम ने तकनीकी साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर मामले की कड़ियां जोड़ीं।
कार्रवाई में निरीक्षक शिशुपाल सिन्हा, प्रधान आरक्षक दुर्योधन यादव, प्रधान आरक्षक हरिशचन्द्र सिन्हा, आरक्षक धनेश्वर साहू, बनवाली साहू, मनीष राजपूत, नागेश्वर साहू, साइबर सेल प्रभारी धरम भुआर्य और आरक्षक मिथलेश यादव की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
एक शिकायत, 16 भैंसें और ओडिशा तक पहुंची चोरी की कड़ी
दो भैंसों के गुम होने से शुरू हुई पड़ताल ने जब 16 मवेशियों की चोरी का रूप लिया, तो पुलिस ने तकनीकी जांच के जरिए उन लोगों तक पहुंच बनाई, जो इन मवेशियों को छत्तीसगढ़ से ओडिशा के बाजार तक पहुंचाने की तैयारी में थे। तीन गिरफ्तारियों के बाद अब पुलिस की नजर फरार आरोपी शिवलाल गोंड पर है। उसके पकड़े जाने के बाद गिरोह से जुड़े अन्य लोगों और मवेशी खरीद-बिक्री के नेटवर्क को लेकर और खुलासे होने की संभावना है।













