प्रशासनिक अनुभव से लेकर खेल प्रतिभाओं को मंच देने तक बनाई अलग पहचान, बालोद से भी रहा है गहरा प्रशासनिक जुड़ाव
बालोद। प्रशासनिक सेवा में लंबे अनुभव, अलग-अलग विभागों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों और खेल क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्यों के बाद आईएएस अधिकारी तनुजा सलाम को अब राज्य सरकार ने मानपुर-मोहला-अंबागढ़ चौकी जिले की कलेक्टर की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। 18 अगस्त को हुए प्रशासनिक फेरबदल के बाद उन्हें यह नई जिम्मेदारी मिली है। नया जिला होने के साथ-साथ मानपुर-मोहला-अंबागढ़ चौकी अनुसूचित एवं वनांचल क्षेत्र की विशिष्ट भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों वाला जिला है। ऐसे में प्रशासनिक अनुभव और क्षेत्रीय समझ रखने वाली अधिकारी के रूप में तनुजा सलाम की नई जिम्मेदारी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
तनुजा सलाम की प्रशासनिक यात्रा किसी एक विभाग या एक पद तक सीमित नहीं रही है। उपलब्ध सेवा-प्रोफाइल के अनुसार उन्होंने डिप्टी कलेक्टर, संयुक्त कलेक्टर, अवर सचिव, अपर कलेक्टर, जिला पंचायत सीईओ, उप सचिव और संचालक खेल एवं युवा कल्याण जैसे विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर जिम्मेदारियां निभाई हैं। प्रोफाइल में उनकी सेवा अवधि 2008 से लेकर फरवरी 2024 से संचालक, खेल एवं युवा कल्याण विभाग के पद तक दर्ज है।

बालोद से रहा पुराना प्रशासनिक रिश्ता
तनुजा सलाम का बालोद जिले से भी पुराना प्रशासनिक जुड़ाव रहा है। वे यहां अपर कलेक्टर, बालोद के रूप में सेवाएं दे चुकी हैं। इसके अलावा वे जिला पंचायत राजनांदगांव की मुख्य कार्यपालन अधिकारी की जिम्मेदारी भी संभाल चुकी हैं। सेवा-प्रोफाइल में बालोद में अपर कलेक्टर के रूप में उनकी पदस्थापना 21 फरवरी 2018 से 8 फरवरी 2019 तक दर्ज है, जबकि इसके बाद उन्होंने जिला पंचायत सीईओ राजनांदगांव की जिम्मेदारी संभाली।
यही वजह है कि बालोद और आसपास के क्षेत्र में उनके प्रशासनिक कार्यकाल को आज भी विशेष रूप से याद किया जाता है। अब जब उन्हें एक नए जिले की कलेक्टर की जिम्मेदारी मिली है, तो उनके पुराने प्रशासनिक अनुभव और क्षेत्रीय समझ को नई जिम्मेदारी में उपयोगी माना जा रहा है।
खेल विभाग में कार्यकाल ने बनाई अलग पहचान
कलेक्टर बनने से पहले तनुजा सलाम संचालक, खेल एवं युवा कल्याण विभाग के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रही थीं। इस दौरान प्रदेश में खेल अधोसंरचना को मजबूत करने, खिलाड़ियों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने और ग्रामीण तथा आदिवासी अंचलों की खेल प्रतिभाओं को बड़े मंच तक पहुंचाने की दिशा में कई पहल हुईं।
उनके कार्यकाल में बस्तर ओलंपिक, सरगुजा ओलंपिक और ऑल इंडिया ट्राइबल गेम्स जैसे बड़े आयोजनों को लेकर विभागीय स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई गई। इन आयोजनों के माध्यम से प्रदेश के दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों में छिपी खेल प्रतिभाओं को पहचान और प्रतिस्पर्धा का मंच मिला। स्थानीय स्तर के खिलाड़ियों को राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में भी इन आयोजनों को महत्वपूर्ण माना गया।
खेल गतिविधियों को व्यापक स्तर पर बढ़ावा देने के साथ ही खिलाड़ियों के लिए खेल अधोसंरचना और प्रशिक्षण सुविधाओं को मजबूत करने पर भी जोर रहा। इसका असर खेल छात्रावासों में भी दिखाई दिया। रायपुर और बिलासपुर जैसे प्रमुख शहरों में खेल छात्रावास, जो कुछ समय पहले बंद होने की स्थिति में बताए जा रहे थे, अब खिलाड़ियों से भरे हुए हैं। विभिन्न खेल विधाओं के खिलाड़ी इन छात्रावासों में रहकर प्रशिक्षण और सुविधाओं का लाभ उठा रहे हैं।
खिलाड़ियों को मिला आगे बढ़ने का मंच
खेल क्षेत्र में सक्रियता का एक महत्वपूर्ण परिणाम यह भी रहा कि प्रदेश के खिलाड़ियों को खेल अलंकरण और उत्कृष्ट खिलाड़ी चयन जैसी प्रक्रियाओं में आगे आने का अवसर मिला। ग्रामीण, आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों से आने वाली प्रतिभाओं को मंच देने की दिशा में आयोजित बड़े खेल आयोजनों ने प्रतिभाओं को पहचान दिलाने में भूमिका निभाई।
खास बात यह रही कि खेल को केवल प्रतियोगिता तक सीमित रखने के बजाय इसे प्रतिभा खोज, अधोसंरचना और खिलाड़ियों के भविष्य से जोड़ने का प्रयास किया गया। यही वजह है कि खेल एवं युवा कल्याण विभाग में उनके कार्यकाल को प्रदेश की खेल गतिविधियों के विस्तार के दौर के रूप में देखा जा रहा है।
बालोद को मिली दो बड़ी खेल सौगात
खेल विभाग में संचालक रहते हुए बालोद जिले के लिए भी दो महत्वपूर्ण खेल परियोजनाओं को स्वीकृति मिली। बालोद में करीब 8 करोड़ रुपये की लागत से स्टेडियम तथा दल्लीराजहरा में करीब 5 करोड़ रुपये की लागत से मल्टी स्पोर्ट्स स्टेडियम की स्वीकृति को जिले के खेल विकास की दिशा में बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
इन परियोजनाओं से जिले के खिलाड़ियों को भविष्य में बेहतर खेल सुविधाएं मिलने की उम्मीद है। खासकर दल्लीराजहरा जैसे औद्योगिक एवं आदिवासी बहुल क्षेत्र में मल्टी स्पोर्ट्स स्टेडियम की स्वीकृति स्थानीय खेल प्रतिभाओं के लिए महत्वपूर्ण अवसर तैयार कर सकती है।

दबंग और मेहनती अधिकारी की पहचान
तनुजा सलाम की पहचान केवल पद और प्रशासनिक जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं है। लंबे प्रशासनिक अनुभव के दौरान उन्होंने अलग-अलग विभागों और जिलों में काम किया है। कठिन परिस्थितियों में जिम्मेदारी संभालने और प्रशासनिक स्तर पर निर्णय लेने वाली अधिकारी के रूप में उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई है।
उनके निजी व्यक्तित्व की बात करें तो उन्हें गाने सुनना और जिम जाना पसंद है। ईश्वर के प्रति उनकी गहरी आस्था भी उनके व्यक्तित्व का हिस्सा है और उनकी दिनचर्या की शुरुआत पूजा-पाठ से होने की जानकारी सामने आई है। प्रशासनिक जिम्मेदारियों के बीच निजी जीवन में अपनी रुचियों और आध्यात्मिक जुड़ाव को बनाए रखना उनके व्यक्तित्व का एक अलग पक्ष सामने लाता है।
अब नई चुनौती, नए जिले की कमान
मानपुर-मोहला-अंबागढ़ चौकी उनके लिए केवल नई पोस्टिंग नहीं, बल्कि एक अलग तरह की प्रशासनिक चुनौती भी होगी। नया जिला होने के कारण यहां प्रशासनिक ढांचे को और मजबूत करने, विकास योजनाओं को जमीन पर प्रभावी तरीके से लागू करने, दूरस्थ एवं वनांचल क्षेत्रों तक सरकारी योजनाओं की पहुंच सुनिश्चित करने और क्षेत्र की जरूरतों के अनुरूप विकास की गति बढ़ाने की बड़ी जिम्मेदारी होगी।
यह जिला प्राकृतिक संसाधनों, वन क्षेत्र और आदिवासी आबादी के साथ विकास की व्यापक संभावनाएं भी रखता है। ऐसे में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, आधारभूत संरचना और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ स्थानीय जरूरतों के बीच संतुलन बनाना नई कलेक्टर के सामने महत्वपूर्ण चुनौती होगी।
खेल मैदान में प्रदेश की प्रतिभाओं को पहचान दिलाने से लेकर अब एक नए जिले की प्रशासनिक कमान तक पहुंची तनुजा सलाम की नई पारी पर सबकी नजर रहेगी। बालोद से लेकर खेल विभाग और अब मानपुर-मोहला-अंबागढ़ चौकी तक का उनका प्रशासनिक सफर बताता है कि आने वाले समय में नए जिले के विकास की दिशा में उनके अनुभव और कार्यशैली की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है।











