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दहेज प्रताड़ना से तंग आकर नवविवाहिता ने दी थी जान, पति समेत चार आरोपी गिरफ्तार

बालोद। गुरूर थाना क्षेत्र में फरवरी माह में हुई नवविवाहिता की मौत के मामले में पुलिस ने करीब साढ़े चार माह की गहन जांच के बाद बड़ा खुलासा किया है। जांच में दहेज प्रताड़ना के आरोप सही पाए जाने पर पुलिस ने मृतका के पति, सास, ससुर और ननद के खिलाफ मामला दर्ज कर चारों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है।
पुलिस के अनुसार 24 फरवरी 2026 को गुरूर नगर के वार्ड क्रमांक-2 स्थित गुलमोहर कॉलोनी में किराये के मकान में रहने वाली 28 वर्षीय मीनाक्षी भतरिया ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। घटना की सूचना मिलने पर गुरूर थाना में मर्ग कायम कर जांच शुरू की गई। चूंकि मृतका नवविवाहिता थी, इसलिए कार्यपालिक मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में पंचनामा सहित आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक तथा गुरूर एसडीओपी के नेतृत्व में विस्तृत विवेचना की गई।


जांच के दौरान साइबर सेल की सहायता से मृतका और उसके पति के मोबाइल कॉल डिटेल का विश्लेषण किया गया। वहीं मृतका के माता-पिता, भाई-बहन सहित अन्य परिजनों एवं सामाजिक लोगों के बयान दर्ज किए गए। विवेचना में यह तथ्य सामने आया कि विवाह के बाद से ही मीनाक्षी को उसके पति प्रवीण भतरिया, ससुर पग्गू लाल भतरिया, सास गीता भतरिया तथा ननद करूणा चतुर्वेदानी द्वारा कम दहेज लाने, रंग-रूप को लेकर ताने देने और मानसिक रूप से लगातार प्रताड़ित किया जाता था। जांच में यह भी सामने आया कि उसे बार-बार अपमानित किया जाता था तथा नौकरानी की तरह रहने के लिए मजबूर किया जाता था।
पुलिस के अनुसार लगातार हो रही मानसिक प्रताड़ना और दहेज को लेकर बनाए जा रहे दबाव से परेशान होकर मीनाक्षी ने 24 फरवरी को अपने किराये के मकान में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। जांच में पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद 7 जुलाई 2026 को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 80(1), 80(2) एवं 3(5) के तहत अपराध दर्ज किया गया।
अपराध दर्ज होते ही गुरूर एसडीओपी के नेतृत्व में गठित पुलिस टीम ने दुर्ग जिले के पथर्रा गांव में दबिश देकर आरोपी पति प्रवीण भतरिया (37 वर्ष), ससुर पग्गू लाल भतरिया (70 वर्ष), सास गीता भतरिया (60 वर्ष) तथा ननद करूणा चतुर्वेदानी (40 वर्ष) को हिरासत में लिया। पूछताछ में मामले से जुड़े तथ्यों की पुष्टि होने पर चारों को विधिवत गिरफ्तार कर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय, बालोद में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।
पुलिस का कहना है कि पूरे प्रकरण की जांच के दौरान तकनीकी साक्ष्यों, परिजनों के बयान और अन्य उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर दहेज प्रताड़ना के पर्याप्त साक्ष्य मिले, जिसके बाद आरोपियों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की गई। मामले की विवेचना में गुरूर पुलिस एवं साइबर सेल की टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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