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स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 पर दिल्ली में राष्ट्रीय मंथन, उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने साझा किए छत्तीसगढ़ मॉडल, वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन और डम्पसाइट समाधान के सफल क्रियान्वयन के अनुभव

नई दिल्ली। देशभर में स्वच्छता और वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन को नई दिशा देने के उद्देश्य से नई दिल्ली के विज्ञान भवन में स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 की दो दिवसीय राष्ट्रीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में आयोजित इस राष्ट्रीय सम्मेलन में विभिन्न राज्यों के उपमुख्यमंत्री, शहरी विकास मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और 14 केंद्रीय मंत्रालयों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

बैठक में खास तौर पर छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री अरुण साव की सहभागिता चर्चा का केंद्र रही। उन्होंने शहरी स्वच्छता, कचरा प्रबंधन और नगरीय निकायों में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार को लेकर छत्तीसगढ़ सरकार की प्राथमिकताओं और अनुभवों को साझा किया। माना जा रहा है कि राज्य स्तर पर तेजी से लागू की जा रही योजनाओं और जमीनी मॉनिटरिंग मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली।
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने समीक्षा बैठक में कहा कि स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 के लक्ष्यों को तय समय में पूरा करने के लिए मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति और सतत मॉनिटरिंग सबसे अहम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, शहरी विकास मंत्री और जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी से ही मिशन की रफ्तार बढ़ाई जा सकती है।


उन्होंने राज्यों को निर्देश दिए कि स्वच्छतम पोर्टल पर प्रतिदिन प्रगति रिपोर्ट अपडेट की जाए ताकि कार्यों की नियमित समीक्षा और निगरानी सुनिश्चित हो सके। साथ ही उन्होंने “स्वभाव स्वच्छता, संस्कार स्वच्छता” को जनआंदोलन का रूप देने और इसे शिक्षा व्यवस्था से जोड़ने पर भी जोर दिया।

97 प्रतिशत वार्डों तक पहुंचा डोर-टू-डोर कलेक्शन
बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार स्वच्छ भारत मिशन-शहरी के तहत देश में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। वर्तमान में देश के 97 प्रतिशत शहरी वार्ड घर-घर कचरा संग्रहण व्यवस्था से जुड़ चुके हैं। वहीं अपशिष्ट प्रसंस्करण क्षमता वर्ष 2014 के 16 प्रतिशत से बढ़कर 2026 में 81 प्रतिशत तक पहुंच गई है।
देशभर के 2,482 डम्पसाइट्स पर मौजूद लगभग 26 करोड़ मीट्रिक टन कचरे में से 65 प्रतिशत का निस्तारण किया जा चुका है, जिससे करीब 9 हजार एकड़ शहरी भूमि दोबारा उपयोग के लिए उपलब्ध हुई है। बैठक में पुराने डम्पसाइट्स के शीघ्र निस्तारण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया।

छत्तीसगढ़ में शहरी विकास को नई दिशा
उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने बैठक के दौरान शहरी क्षेत्रों में स्वच्छता और आधुनिक कचरा प्रबंधन को लेकर राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने बताया कि नगरीय निकायों में आधारभूत ढांचे को मजबूत करने, डोर-टू-डोर कलेक्शन, स्रोत स्तर पर कचरा पृथक्करण और जनभागीदारी आधारित स्वच्छता मॉडल को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि स्वच्छ शहर केवल सरकारी योजनाओं से नहीं बल्कि नागरिकों की सहभागिता से बनते हैं। छत्तीसगढ़ में स्थानीय निकायों के माध्यम से जागरूकता अभियान और व्यवहार परिवर्तन कार्यक्रम लगातार चलाए जा रहे हैं।

चार-स्तरीय कचरा पृथक्करण पर जोर
1 अप्रैल 2026 से लागू नए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के तहत अब दो की जगह चार-स्तरीय स्रोत पृथक्करण व्यवस्था को अनिवार्य बनाया गया है। इसमें गीला, सूखा, सैनिटरी और घरेलू खतरनाक कचरे को अलग-अलग करना शामिल है।
बैठक में बल्क वेस्ट जनरेटर्स की जवाबदेही, यूजर शुल्क व्यवस्था, प्रदूषक भुगतान सिद्धांत और डिजिटल निगरानी तंत्र को प्रभावी ढंग से लागू करने पर भी विस्तृत चर्चा हुई।

विकसित भारत 2047” के लक्ष्य से जुड़ा मिशन
दो दिवसीय सम्मेलन में संस्थागत सुदृढ़ीकरण, वेस्ट-टू-एनर्जी मॉडल, प्रयुक्त जल प्रबंधन, स्मार्ट मॉनिटरिंग और क्लस्टर आधारित अपशिष्ट प्रबंधन जैसे विषयों पर 11 विशेष सत्र आयोजित किए गए।
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 केवल सफाई अभियान नहीं बल्कि विकसित भारत 2047 के विजन से जुड़ा राष्ट्रीय परिवर्तन अभियान है। इसके लिए केंद्र और राज्यों के बीच मजबूत समन्वय और जवाबदेही जरूरी होगी।

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