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दवाओं की दुकानों से उठी एकजुटता की आवाज: बालोद में शांतिपूर्ण बंद ने खींचा ध्यान

बालोद जिले में 20 मई को आयोजित राष्ट्रव्यापी दवा व्यापार बंद केवल एक सांकेतिक आंदोलन नहीं रहा, बल्कि यह दवा व्यवसाय से जुड़े लोगों की सामूहिक चेतना, जिम्मेदारी और एकजुटता का प्रभावशाली प्रदर्शन बनकर सामने आया। जिलेभर के मेडिकल स्टोर दिनभर बंद रहे और दवा व्यापारियों ने संगठित होकर अपनी मांगों और चिंताओं को मुखर स्वर दिया।

जिला बालोद केमिस्ट्स एवं ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन के नेतृत्व में हुए इस आंदोलन में दवा व्यापारियों, फार्मासिस्टों और संगठन से जुड़े सदस्यों ने पूरे अनुशासन और शांतिपूर्ण तरीके से भागीदारी निभाई। सुबह से ही बालोद शहर का जय स्तंभ चौक आंदोलन का केंद्र बन गया, जहां धरना प्रदर्शन के दौरान दवा व्यापार और जनस्वास्थ्य से जुड़े कई अहम मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया।
धरना स्थल पर मौजूद लोगों के हाथों में तख्तियां थीं, आवाजों में संयम था और संदेश साफ—दवा व्यापार केवल व्यवसाय नहीं, बल्कि समाज की स्वास्थ्य व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। वक्ताओं ने कहा कि बदलते व्यापारिक परिवेश और ऑनलाइन दवा बिक्री जैसी चुनौतियों के बीच पारंपरिक दवा व्यापारियों की भूमिका और जिम्मेदारियां लगातार बढ़ती जा रही हैं, लेकिन उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना जाना भी उतना ही जरूरी है।


धरना प्रदर्शन के बाद निकली विशाल बाइक रैली ने पूरे बालोद नगर का भ्रमण किया। सैकड़ों दवा व्यापारियों का यह काफिला शहर की सड़कों से गुजरते हुए लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचता रहा। रैली केवल विरोध का माध्यम नहीं थी, बल्कि यह एक संदेश भी थी कि स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े लोग अपने अधिकारों और व्यवस्था की पारदर्शिता को लेकर सजग हैं।


रैली के समापन पर प्रतिनिधिमंडल कलेक्ट्रेट पहुंचा, जहां प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन डिप्टी कलेक्टर प्राची ठाकुर को सौंपते हुए संगठन के पदाधिकारियों ने दवा व्यापारियों की समस्याओं और मांगों पर गंभीर पहल की अपेक्षा जताई।
पूरे आयोजन का नेतृत्व संगठन के अध्यक्ष चंद्रकांत साहू, सचिव पवन साहू, कोषाध्यक्ष भूपेश गुप्ता और संरक्षक लोकनायक साहू ने किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में संगठन की कार्यकारिणी और जिलेभर से पहुंचे केमिस्ट साथियों की सक्रिय भागीदारी उल्लेखनीय रही।


इस आंदोलन की सबसे बड़ी विशेषता उसका शांतिपूर्ण और व्यवस्थित स्वरूप रहा। बंद के दौरान कहीं भी अव्यवस्था या तनाव की स्थिति निर्मित नहीं हुई। यही कारण रहा कि यह आयोजन केवल विरोध प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि संगठनात्मक एकता और सामाजिक जिम्मेदारी का उदाहरण बनकर उभरा।
बालोद में हुआ यह आंदोलन एक बार फिर यह साबित कर गया कि जब किसी पेशे से जुड़े लोग सामूहिक रूप से अपनी बात लोकतांत्रिक तरीके से रखते हैं, तो उनकी आवाज केवल सड़कों तक नहीं रहती, बल्कि व्यवस्था के गलियारों तक भी पहुंचती है।

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