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एक्के नंबर… और भरोसे की नई दस्तक हाईटेक डायल-112 से बदलेगी बालोद की आपात सुरक्षा व्यवस्था

बालोद जिले की सड़कों पर अब केवल पुलिस की गाड़ियां नहीं दौड़ेंगी, बल्कि भरोसे, सुरक्षा और त्वरित मदद की एक नई व्यवस्था भी नजर आएगी। छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी डायल-112 योजना के तहत बालोद पुलिस ने अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस हाईटेक ईआरवी (Emergency Response Vehicle) वाहनों को जिले की सेवा में उतार दिया है।


इन वाहनों का शुभारंभ केवल एक प्रशासनिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह उस बदलती पुलिसिंग व्यवस्था का संकेत भी था, जहां तकनीक और संवेदनशीलता एक साथ कदम बढ़ा रही हैं। आधुनिक संचार प्रणाली, GPS ट्रैकिंग, वायरलेस नेटवर्क और तेज रिस्पांस मैकेनिज्म से लैस ये वाहन अब दुर्घटना, महिला सुरक्षा, अपराध, विवाद या चिकित्सा आपात स्थिति जैसी घटनाओं में कम समय में मौके पर पहुंचकर सहायता उपलब्ध कराएंगे।
बालोद पुलिस ने शहर क्षेत्रों में 10 मिनट और ग्रामीण इलाकों में 30 मिनट के भीतर सहायता पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है। यह लक्ष्य केवल आंकड़ा नहीं, बल्कि उस सोच का हिस्सा है जिसमें आम नागरिक को संकट की घड़ी में अकेला नहीं छोड़ने का संकल्प दिखाई देता है।


पुलिस अधीक्षक योगेश कुमार पटेल ने इस पहल को “एक्के नंबर सबो बर – 112” की अवधारणा से जोड़ते हुए कहा कि अब लोगों को अलग-अलग सेवाओं के लिए अलग नंबर याद रखने की जरूरत नहीं होगी। केवल 112 डायल कर पुलिस, चिकित्सा और अन्य आपात सेवाओं की त्वरित सहायता प्राप्त की जा सकेगी।

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मोनिका ठाकुर ने भी इसे आमजन के लिए सरल और सुलभ व्यवस्था बताते हुए कहा कि अब संकट की स्थिति में नागरिकों को भटकना नहीं पड़ेगा। एक नंबर पर कॉल करते ही मदद की प्रक्रिया तुरंत शुरू हो जाएगी।
        कार्यक्रम में प्रशासन और पुलिस विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। स्कूली बच्चों, मीडिया प्रतिनिधियों और आम नागरिकों की उपस्थिति ने यह भी साबित किया कि सुरक्षा व्यवस्था केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की साझी भागीदारी है।


दरअसल, बदलते समय के साथ अपराध और आपात स्थितियों का स्वरूप भी बदल रहा है। ऐसे दौर में तकनीक आधारित पुलिसिंग की आवश्यकता लगातार बढ़ी है। डायल-112 जैसी योजनाएं केवल घटनाओं पर प्रतिक्रिया देने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह जनता और पुलिस के बीच विश्वास की दूरी को कम करने का भी माध्यम बन रही हैं।
ग्रामीण इलाकों में अक्सर यह शिकायत रहती थी कि मदद समय पर नहीं पहुंचती। अब GPS आधारित ट्रैकिंग और प्रशिक्षित रिस्पांस टीमों के जरिए यह व्यवस्था अधिक जवाबदेह और प्रभावी बनने की ओर बढ़ रही है।
एक्के नंबर सबो बर – 112” केवल एक स्लोगन नहीं, बल्कि यह उस नई सोच का प्रतीक है जिसमें सुरक्षा को सुविधाजनक, तकनीक को मानवीय और पुलिस व्यवस्था को अधिक जनकेंद्रित बनाने का प्रयास साफ दिखाई देता है।

मुख्य बातें

जिले में हाईटेक डायल-112 ईआरवी वाहनों की शुरुआत

GPS ट्रैकिंग और आधुनिक संचार प्रणाली से लैस वाहन

शहर में 10 मिनट और ग्रामीण क्षेत्रों में 30 मिनट रिस्पांस का लक्ष्य

दुर्घटना, महिला सुरक्षा, अपराध और चिकित्सा आपात स्थिति में मिलेगी तत्काल सहायता

“एक्के नंबर सबो बर – 112” के जरिए एक नंबर पर सभी आपात सेवाएं उपलब्ध

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