
जानकारी के अनुसार जिले में संचालित करीब 76 पेट्रोल पंपों में से सुबह तक 10 से अधिक पंपों पर ईंधन की कमी बनी रही, वहीं शाम होते-होते आधे से ज्यादा पेट्रोल पंपों में पेट्रोल और डीजल लगभग समाप्त हो चुका था। अचानक बढ़ी मांग और सीमित सप्लाई के कारण लोगों में चिंता का माहौल बन गया है।

बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ईंधन बचाने की अपील और वीआईपी काफिलों में कटौती को लेकर चल रही चर्चाओं के बाद लोगों में आशंका बढ़ गई। सोशल मीडिया और आपसी चर्चाओं के चलते लोगों ने भविष्य में ईंधन संकट की संभावना जताते हुए जरूरत से अधिक पेट्रोल-डीजल भरवाना शुरू कर दिया। इसका सीधा असर सप्लाई व्यवस्था पर पड़ा और पंपों में भीड़ उमड़ पड़ी।
गुरुवार को बालोद नगर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति उस समय अफरा-तफरी जैसी हो गई, जब बड़ी संख्या में लोग पेट्रोल और डीजल लेने पेट्रोल पंपों पर पहुंचने लगे। भाटिया पेट्रोल पंप में सुबह से ही दोपहिया और चारपहिया वाहनों की लंबी लाइनें लगनी शुरू हो गई थीं, जो देर शाम तक जारी रहीं।
स्थिति यह रही कि कई लोग वाहनों के अलावा प्लास्टिक केन, ड्रम और डिब्बों में भी पेट्रोल-डीजल भरवाते नजर आए। पेट्रोल पंप परिसर पूरी तरह वाहनों से भर गया था और कतार मुख्य सड़क तक पहुंच गई, जिससे कुछ समय के लिए यातायात व्यवस्था भी प्रभावित हुई। वाहन चालकों को घंटों तक अपनी बारी का इंतजार करना पड़ा। तेज धूप के बीच लोग लाइन में खड़े रहे और कई स्थानों पर बहस की स्थिति भी बनी।

स्थानीय लोगों का कहना है कि ईंधन खत्म होने की आशंका ने लोगों में घबराहट बढ़ा दी है। इसी वजह से सामान्य जरूरत से अधिक ईंधन संग्रह किया जा रहा है। अचानक मांग बढ़ने से पेट्रोल पंप संचालकों और कर्मचारियों के सामने व्यवस्था बनाए रखना चुनौती बन गया।
पेट्रोल पंप कर्मचारियों ने लगातार उपभोक्ताओं को लाइन में रहने और धैर्य बनाए रखने की अपील की। कर्मचारियों का कहना है कि उपलब्ध स्टॉक के अनुसार सभी को ईंधन देने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन मांग अपेक्षा से कई गुना अधिक बढ़ गई है।
यदि जल्द सप्लाई सामान्य नहीं हुई तो आने वाले दिनों में जिले में ईंधन संकट और गहरा सकता है, जिससे आम लोगों के साथ परिवहन और व्यावसायिक गतिविधियों पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।




















