बालोद।जिले में बोर्ड परीक्षा परिणाम में आई गिरावट को लेकर शिक्षा विभाग सख्त नजर आ रहा है। जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) मधुलिका तिवारी ने 50 प्रतिशत से कम परीक्षा परिणाम वाले 11 निजी स्कूलों को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। इन स्कूलों को 4 मई तक जिला शिक्षा विभाग कार्यालय में उपस्थित होकर जवाब देने के निर्देश दिए गए थे।
निर्धारित तिथि पर सोमवार को निजी स्कूलों के संचालक विभागीय कार्यालय पहुंचे और अपना पक्ष रखा। स्कूल प्रबंधन का कहना है कि छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा घोषित हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी परीक्षा परिणाम के आधार पर ही कार्रवाई की गई है, लेकिन बिना ठोस कारण सीधे नोटिस जारी कर स्कूलों की छवि खराब करने की कोशिश की गई।
निजी स्कूल संचालकों ने यह भी सवाल उठाया कि बोर्ड परीक्षा में शासकीय और निजी दोनों स्कूलों के छात्र शामिल होते हैं, फिर भी 50 प्रतिशत से कम परिणाम वाले किसी भी शासकीय स्कूल को नोटिस जारी नहीं किया गया। इसे उन्होंने एकतरफा कार्रवाई बताया।
पहली बार इतना कमजोर रहा परिणाम
एक निजी स्कूल प्रबंधन द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण में बताया गया कि इस वर्ष कक्षा 10वीं का परिणाम 30 प्रतिशत और 12वीं का 35 प्रतिशत रहा, जो पिछले वर्षों की तुलना में काफी कम है। प्रबंधन ने स्वीकार किया कि यह पहली बार है जब परिणाम इतना कमजोर रहा है।
हालांकि, स्कूल प्रबंधन ने यह भी स्पष्ट किया कि पूर्व वर्षों में उनके छात्र मेरिट सूची में स्थान हासिल कर चुके हैं और जिले का नाम रोशन किया है। इस वर्ष खासतौर पर कक्षा 10वीं में कमजोर विद्यार्थियों की संख्या अधिक रही, जिन्हें ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त कक्षाएं और विशेष तैयारी भी कराई गई थी।
संगठन ने सौंपा ज्ञापन
इस दौरान जिला निजी स्कूल संगठन के अध्यक्ष राजेश सोनी, सचिव ललित सिंह गौर सहित अन्य पदाधिकारी भी मौजूद रहे। संगठन ने पूरे मामले में निष्पक्षता बरतने और सभी स्कूलों के लिए समान मापदंड लागू करने की मांग की है।
अब विभाग के फैसले पर नजर
स्कूल प्रबंधन के स्पष्टीकरण के बाद अब शिक्षा विभाग के अगले कदम पर सबकी नजर टिकी है। देखना होगा कि विभाग इस मामले में आगे क्या कार्रवाई करता है और क्या निजी स्कूलों की आपत्तियों पर विचार किया जाएगा।




















