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बालोद में कल गूंजेगा ‘गौ माता राष्ट्र माता’ अभियान, हजारों गौ भक्तों के साथ निकलेगी भव्य गौ कीर्तन यात्रा

बालोद। संत समाज द्वारा देशभर में संचालित ‘गौ माता राष्ट्र माता’ अभियान के तहत बालोद नगर में सोमवार 27 अप्रैल को भव्य धार्मिक एवं जनजागरण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। अभियान के अंतर्गत गौ संरक्षण, गौ सम्मान और राष्ट्रीय स्तर पर गौ माता को विशेष दर्जा दिलाने की मांग को लेकर जिलेभर से हजारों गौ भक्त, संत, आचार्य और गौ प्रेमी बालोद में जुटेंगे।
आयोजन समिति के अनुसार सोमवार सुबह 10 बजे नगर के अटल परिसर, जय स्तंभ चौक में विशाल सभा का आयोजन होगा। इसके बाद पूज्य संतों के सान्निध्य में भव्य गौ कीर्तन यात्रा निकाली जाएगी। यह यात्रा जय स्तंभ चौक से प्रारंभ होकर घड़ी चौक सहित नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए तहसील कार्यालय पहुँचेगी, जहां राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा।

इन प्रमुख मांगों को लेकर सौंपा जाएगा ज्ञापन
अभियान के तहत केंद्र और राज्य सरकार से गौ माता के संरक्षण एवं सम्मान के लिए तीन प्रमुख मांगें रखी गई हैं। इनमें गौ माता को राष्ट्र माता, राष्ट्र धरोहर और राष्ट्र आराध्या का विधिवत दर्जा देने, देशभर में गौ हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने तथा गौ संरक्षण के लिए अनुसंधान और अनुदान व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग शामिल है।


नीतिगत सुधारों के सुझाव भी शामिल
प्रार्थना पत्र में गौ आधारित अर्थव्यवस्था और संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए जाएंगे। इनमें गोबर और गौमूत्र पर विशेष अनुसंधान केंद्रों की स्थापना, सरकारी भवनों में गोबर पेंट और गोनाइल के उपयोग को बढ़ावा देना, शॉपिंग मॉल्स में गौ उत्पाद बिक्री हेतु काउंटर स्थापित करना तथा गोचर भूमि को अतिक्रमण मुक्त कर गोचर विकास बोर्ड का गठन प्रमुख है।

देशभर की 5000 तहसीलों में एक साथ होगा आयोजन
आयोजन समिति ने बताया कि 27 अप्रैल को देश की लगभग 5000 तहसीलों में एक साथ ज्ञापन सौंपने का कार्यक्रम रखा गया है। बालोद में भी इसे लेकर व्यापक तैयारियाँ की गई हैं और बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की संभावना है।

 

अधिक से अधिक संख्या में पहुंचने की अपील
स्थानीय समिति ने जिले के गौ भक्तों, गौ पालकों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर कार्यक्रम को सफल बनाने की अपील की है। बालोद में होने वाला यह आयोजन धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक चेतना और गौ संरक्षण के संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

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