बालोद/दल्ली राजहरा। गुरुनानक हाल में सोमवार को ‘वन नेशन वन इलेक्शन’ विषय पर एक विचारगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें पुण्यश्लोक लोकमाता अहिल्या बाई होल्कर की जयंती भी श्रद्धापूर्वक मनाई गई। कार्यक्रम में सांसद भोजराज नाग, बेमेतरा के पूर्व विधायक अवधेश चंदेल, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पूर्व सदस्य यशवंत जैन और भाजपा जिलाध्यक्ष चेमन देशमुख, पवन साहू सहित, अनेक जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता व नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत लोकमाता अहिल्या बाई होल्कर के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन से की गई। इसके उपरांत वक्ताओं ने कार्यशाला के दोनों महत्वपूर्ण विषयों पर विचार साझा किए।
“एक देश, एक चुनाव” लोकतंत्र को देगा मजबूती: भोजराज नाग
सांसद भोजराज नाग ने कहा कि देशभर में एक साथ चुनाव कराए जाने की अवधारणा समय की मांग है। इससे प्रशासनिक संसाधनों और खर्च में कमी आएगी, साथ ही नीति निर्धारण और क्रियान्वयन में गति मिलेगी। बार-बार चुनाव से विकास कार्य बाधित होते हैं और शासन की निरंतरता में व्यवधान आता है।
राज्यों की भूमिका और सहमति अनिवार्य: अवधेश चंदेल
पूर्व विधायक अवधेश चंदेल ने कहा कि “वन नेशन वन इलेक्शन” एक सशक्त विचार है, लेकिन इसके क्रियान्वयन के लिए संविधान में आवश्यक संशोधन के साथ राज्यों की व्यापक सहमति जरूरी है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए यह चर्चा स्वागतयोग्य है।
स्थिरता, सुशासन और आर्थिक संतुलन का उपाय है यह व्यवस्था: चेमन देशमुख
जिलाध्यक्ष चेमन देशमुख ने कहा कि एक देश, एक चुनाव का सिद्धांत न केवल चुनावी खर्च को कम करेगा, बल्कि इससे राजनीतिक स्थिरता भी आएगी। उन्होंने कहा कि निरंतर आचार संहिता के कारण विकास योजनाएं अटकती हैं, जिनसे आम जनता को नुकसान होता है। यह व्यवस्था सुशासन और नीति-निरंतरता के लिए कारगर सिद्ध हो सकती है।
अहिल्या बाई होल्कर – आदर्श शासन और सामाजिक समरसता की मूर्ति: यशवंत जैन
कार्यशाला के दूसरे सत्र में पुण्यश्लोक लोकमाता अहिल्या बाई होल्कर के जीवन पर वक्ताओं ने विस्तार से चर्चा की। यशवंत जैन ने कहा कि अहिल्या बाई ने एक महिला होकर ऐसे समय में शासन की बागडोर संभाली जब समाज में अनेक रूढ़ियाँ थीं। उन्होंने गरीबों, वंचितों और सभी वर्गों के कल्याण के लिए योजनाएं चलाईं, मंदिर, धर्मशालाएं, कुएं व सराय बनवाए, जिससे वह आज भी जनमानस में पूज्य हैं।
समापन में जागरूकता का संकल्प
कार्यक्रम के समापन अवसर पर सभी वक्ताओं और श्रोताओं ने लोकतांत्रिक सुधारों को जन-जन तक पहुँचाने और लोकमाता अहिल्या बाई होल्कर के आदर्शों से प्रेरणा लेकर सामाजिक समरसता के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।




















