बालोद जिले में एक और अवैध प्लाटिंग को लेकर प्रशासन द्वारा जहां सख्ती दिखाई जा रही है वही इस बीच बालोद जिला मुख्यालय से लगे झलमला हल्के में एक चौकाने वाला मामला सामने आया है स्थानीय पटवारी और जमीन कारोबारी की मिली भगत देखने को मिली है। जिस खसरे पर प्रशासन ने अवैध प्लाटिंग पर रोक लगाई थी पिछले कुछ माह के भीतर हल्के के पटवारी और जमीन कारोबारी की आपसी सांठगांठ से करीब 18 नकल जारी हो गया और खुलेआम पटवारी और जमीन कारोबारी द्वारा मिलीभगत कर अवैध प्लाटिंग को अंजाम दिए जा रहे है।
इस पूरे मामले में यहां खुलेआम कलेक्टर के आदेश का उल्लंघन भी देखा गया है, जिसमे झलमला पटवारी के द्वारा कलेक्टर के आदेश की अवहेलना की गई है, मामला संज्ञान आने के बाद स्थानीय प्रशासन में हड़कंप मच गया है। वही इस मामले में जब संवाददाता द्वारा एसडीएम शीतल बंसल को फोन लगाया तो उनके द्वारा फोन नही उठाया गया, जिसके बाद तहसीलदार को फोन लगाया गया, मामले को को गंभीरता और संज्ञान में लेते हुए तहसीलदार दीपिका देहारी ने संबंधित पटवारी को तत्काल आगे निकल जारी नही करने और नकल जारी को लेकर नायब तहसीलदार को जांच के निर्देश दिये है, वही साथ ही तहसीलदार दीपिका देहारी ने नायब तहसीलदार मुकेश कुमार गजेंद्र को यह निर्देश दिए हैं कि उक्त जारी किए गए नकल में अगर नामांतरण नहीं हुआ हो तो उसे नामांतरण पर तत्काल रोक लगाने की कार्यवाही की जाए।
पटवारी से मिलीभगत कर नकल जारी–
मिली जानकारी अनुसार ग्राम झलमला के जिस जमीन में अवैध प्लाटिंग की गई है, वह सीलिंग जमीन है, किसी जमीन दलाल के द्वारा यह सीलिंग जमीन किसी अन्य से सौदा कर वहां पर अवैध रूप से प्लाटिंग की गई है। और कई टुकड़े कर उसे बेचा जा रहा है। और पटवारी से मिलीभगत कर उसमें नकल जारी कर रजिस्ट्री करवाई जा रही है। खसरा नम्बर 1178/12, 1178/13, /1178 14, 1178/15, 1178/16/ 1178/17, और 1178/18 का नकल जारी किया गया है, और रजिस्ट्री नही कर ली गयी है।
नामांतरण पर लगाई जाएगी रोक-
कुछ दिनों पहले बालोद जिले के संवेदनशील कलेक्टरइंद्रजीत सिंह चंद्रवाल ने बैठक के दौरान राजस्व विभाग के अधिकारियों को अवैध प्लाटिंग पर लगाम लगाने, कार्रवाई करने तथा नकल नहीं जारी करने के निर्देश जारी किए थे। बावजूद यहां पर कलेक्टर के आदेश की अवहेलना देखी गई है, बताया जा रहा है कि अलग-अलग समय पर उक्त यह नकल जारी किया गया है। मामले में जब बालोंद एसडीएम शीतल बंसल को फोन लगाया गया तो उनके द्वारा फोन नहीं उठाया गया। कलेक्टर के निर्देश के बाद भी अवैध प्लाटिंग में नकल जारी करना, कहीं ना कहीं एसडीएम की कार्य प्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है, की कैसे बिना एसडीएम के जानकारी के संबंधित पटवारी ने उक्त अवैध प्लाटिंग में नकल जारी कर दिया। लेकिन तहसीलदार दीपिका देहारी ने मामले को संज्ञान में लेते हुए कार्रवाई करने की बात कही है और साथ ही नामांतरण पर रोक लगाने की बात कही है।
सीलिंग जमीन पर अवैध प्लाटिंग
आपको बता दें कि जिस जमीन पर अवैध रूप से प्लाटिंग की गई है, वह एक सीलिंग जमीन है, जिसे किसी बालोद निवासी ने खरीद कर किसी दूसरे से सौदा किया है और उस दूसरे व्यक्ति के द्वारा उसमे अवैध रूप से प्लाटिंग की गई है, नियम कायदो को ताक पर रखकर यहां पर अवैध रूप से प्लाटिंग की गई है, कॉलोनाइजर एक्ट का उल्लंघन किया गया है। जब से छत्तीसगढ़ में मोदी की गारंटी और विष्णु देव साय की सुशासन वाली सरकार का बनी है, उसके बाद से लगातार अवैध कार्य करने वालों पर लगातार शिकंजा कसा जा रहा है। आलम यह रहा है कि सूबे के उपमुख्यमंत्री व नगरीय निकाय मंत्री अरुण साव एवं राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने संबंधित विभाग के अधिकारियों की बैठक लेकर कृषि भूमि पर अवैध प्लाटिंग करने वालों पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए थे, बावजूद उनके ही अधिकारी उनके ही बताएं निर्देशों की लगातार यहां पर अवहेलना कर रहे हैं। निकाय मंत्री अरुण साव ने बैठक लेकर निकाय के अधिकारियों को अवैध प्लाटिंग पर कार्यवाही करने के निर्देश दिए थे, वही राजस्व मंत्री बनने के बाद बालोद पहुचे टंकराम वर्मा ने भी कृषि भूमि पर अवैध प्लाटिंग करने वालो पर कड़ी कार्यवाही और नामांतरण पर रोक लगाने के निर्देश दिए थे। लेकिन आज तलक उक्त दोनों मंत्रियों के आदेश की लगातार जिले में अनदेखी निकाय औऱ राजस्व विभाग के अधिकारी ने की हैं।