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प्रदेश रूचि

पदोन्नति स्थानांतरण मामले में अधिकारी के मौखिक आदेश के खिलाफ शिक्षक हुए लामबंद…अपनी इन मांगों को लेकर डीईओ के कमरे के बाहर बैठे…बोले मांगे पूरी नही होने तक यही रहेंगे…

बालोद जिले के शिक्षक व महिला शिक्षकों ने हाईकोर्ट मे पारित आदेश के तहत संशोधित शाला मे मांगी ज्वाइनीग, डी ई ओ द्वारा मौखिक निर्देश के चलते जवाइनिंग न देने के खिलाफ आज डीईओ कार्यालय के बाहर सांकेतिक रूप से धरना दे दिया है…इस सांकेतिक धरने में जिले भर के करीब 89 शिक्षक शिक्षिकाएँ शामिल है..वही दूसरी तरफ शिक्षको के जवाइनिंग न देने तथा अचानक इस तरह प्रदर्शन से फिर एक बार स्कूली बच्चों की पढ़ाई पर सीधा असर के साथ साथ आने वाले दिनों में होने वाले स्कूली परीक्षा परिणामों पर इसका असर दिख सकता है

मामले में शिक्षको कि माने तो शिक्षा विभाग द्वारा पूर्व में प्रदेशभर के शिक्षको की पदोन्नति की गई थी, काउंसलिंग मे इन शिक्षकों के पदोन्नति पूर्व पदस्थ ब्लाक मे रिक्त पद होने के बावजूद काउंसलिंग मे इन पदो को न दिखाकर 200 से 250 km दूर की जगह दिखाई गई और वही पदस्थापना जारी कर दी गई थी जिसके परिपेक्ष्य मे इन शिक्षकों द्वारा वहाँ गंभीर बीमारी,पति पत्नी,व अन्य न्योयोचित कारणों का उल्लेख कर जवाइनिंग मे असमर्थता व्यक्त कर संयुक्त संचालक कार्यालय मे संशोधन हेतु आवेदन किया गया जिस पर उचित निर्णय लेते हुए इन्हे इनके ही ब्लाक मे रिक्त्त् पदो पर् पदस्थ किया गया …3 माह् तक् संशोधित शाला मे अध्यापन और वेतन पाने के बाद् मे विभाग द्वारा अचानक एक आदेश जारी कर इन्हे काउंसलिंग मे प्रदत्त शाला के लिए एकतरफा कार्यमुक्त कर दिया गया इस आदेश में त्रुटि होने के चलते शिक्षको ने आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी… जिसके बाद हाईकोर्ट द्वारा मामले सुनवाई करते हुए शिक्षको को पूर्व में पदस्थ स्कूलों में ज्वाइनिंग व वेतन दिये जाने का निर्णय पारित किया गया…लेकिन मामले में शिक्षा विभाग द्वारा कोई लिखित आदेश नही दिया जा रहा बल्कि मौखिक रूप से काउंसलिंग प्रदत्त शाला में ज्वाइनिग करने कहा जा रहा है जबकि इन. शिक्षकों की पूर्व शाला वह है जहां पर ये पदोन्नति पश्चात ये 3माह् अध्यापन और वेतन पा चुके है … जिसके चलते उनके द्वारा धरना के रूप में डीईओ कार्यालय के सामने बैठे हुए है और संशोधित शाला मे जवाइनिंग अथवा लिखित आदेश कि मांग की जा रही है…..वही दूसरी तरफ बालोद जिला के जिला शिक्षा अधिकारी के अनुसार मामले में राज्य में सचिव स्तर पर एक समिति बनी है…जहां पर 25 दिसंबर तक शिक्षको द्वारा चाही गई मांगो पर अंतिम निर्णय किया जाना है…वही इस संबंध में महाधिवक्ता कार्यालय से मार्गदर्शन है कि इनको पूर्व पदंकित काउंसलिंग में जो शाला हुई थी उसे पिछला शाला मानते हुए वहां पदस्थ माना जाए… उस आधार पर शिक्षको से आवेदन देकर पूर्व पदांकन शाला जोइनिग करने कहा गया …लेकिन शिक्षक संशोधित शाला में कार्य करना चाहते है…वही मामला संयुक्त संचालक स्तर व न्यायालीन प्रक्रिया होने के चलते जिला शिक्षा विभाग द्वारा किसी भी तरह का लिखित आदेश देने से मना कर दिया..वही डीईओ ने शिक्षको से अपील करते हुए कहा कि बच्चो के हित में अपने पूर्व संस्था में ज्वॉइन करले…लेकिन दूसरी तरफ शिक्षक इसे अपने अधिकारों का हनन मानते हुए अपनी मांगों को लेकर अड़े हुए है और मांगो पर लिखित आदेश नही होने की स्थिति में ऐसे ही रोजाना जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के बाहर बैठने की बाते कहते नजर आए

आपको बतादे बीते कुछ सप्ताहों से चुनावों तथा दीवाली के चलते स्कूलों की पढ़ाई प्रभावित हुई है…वही शिक्षक और विभागीय। लड़ाई में फिर एक बार स्कूली बच्चों की पढ़ाई पर इसका सीधा असर देखने को मिल सकता है…वही आने वाले दिनों में स्कुलो में अर्शवर्षिक परीक्षाएं भी प्रारंभ होने को है…ऐसे में इसका सीधा असर स्कूली छात्रों के परिणाम पर भी पड़ सकता है…बहरहाल देखना होगा शिक्षको और विभाग के बीच का यह द्वंद कब तक शांत हो पाता है और ताकि स्कूली बच्चों को शिक्षा का लाभ मिल सके।

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