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अवैध कॉलोनियों की खेती:- सरकारी नाले पर बना दी थी पुलिया..आनन फानन में चलाया गया बुलडोजर

बिना डायवर्सन के ही करीब 5 एकड़ कृषि भूमि को टुकड़ों में बेचने की थी तैयारी

बालोद, बालोद जिले में अवैध प्लाटिंग को लेकर सरकारी अमले की सख्ती के बावजूद भूमाफिया तरह-तरह के हथकंडे अपनाकर अवैध कॉलोनियां काटने से बाज नहीं आ रहे हैं। ताजा मामला बालोद नगर पालिका क्षेत्र अंतर्गत पाररास मुक्तिधाम के पास वाली जमीन पर बन रही कॉलोनी का है। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (टीएंडसीपी) से बगैर परमिशन लिए विकसित की जा रही कॉलोनी का प्रवेश मार्ग खरखरा नहर नाली तरफ से है। इसे बनाने में कॉलोनाइजर ने जो तिकड़म भिड़ाई है वह चौंकाने वाली है। पहले सरकारी नहर में पानी निकासी के लिए सीमेंट का पाइप डाला। उस पर कॉलोनाइजर ने पक्की पुलिया बना डाली। जिससे आसपास के रहवासी खासे नाराज हैं। मामले पर लगातार शिकायत और स्थानीय अखबारों में मामला प्रकाशित होने के बाद कॉलोनाइजर को स्वयं ही जेसीबी लगाकर नाली तोड़नी पड़ी

नाले पर पुलिया बनाने के लिए ऐसे भिड़ाई थी तिकड़म

दरअसल प्लाटिंग एरिया में जाने के लिए सिर्फ सरकारी नाला था इसलिए भूमाफिया ने पहले उसमे सीमेंट का पाइप डाला। और पत्थरों से पिचिंग कर मुरूम डालकर रास्ता तैयार कर दिया था। जिसके बाद वार्डवासी और किसानों के अलावा यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने आपत्ति जताई। जिस पर संबंधित विभाग के द्वारा नहर से अतिक्रमण हटाने नोटिस भी जारी हुआ। लेकिन विभागीय जानकारी के अनुसार विभाग से 3 बार नोटिस जारी होगा जिसके बाद भी भूमाफियाओं द्वारा नाली से ह्यूम पाइप को नही हटाने पर विभाग द्वारा कार्यवाही की जायेगी।लेकिन विभागीय कार्यवाही के पहले कॉलोनाइजर को अपनी अवैध सड़क को हटानी पड़ी।

 

मिलीभगत से कारोबार:

आपको बतादे सरकारी तंत्र की मिलीभगत से अवैध प्लाटिंग का कारोबार जिला मुख्यालय व आसपास के क्षेत्रों में जोरों पर आज भी जारी है। मामले में अवैध प्लाटिंग के खिलाफ प्रशासनिक तंत्र की चुप्पी अपने आप में बड़ा सवाल खड़े करती है। इस बीच अफसरों की सांठगांठ से सरकारी नहर के बीचों-बीच पक्का पुलिया निर्माण की खबरें चर्चा में रही है।

टी आकार के 112 प्लाॅट काटे हैं:

कृषि भूमि में बन रही अवैध कॉलोनी के भूखंडों के सौदे भी 4 लाख रुपए डिसमिल मतलब लगभग 920 रूपए प्रति वर्ग फीट की ऊंची कीमत पर हो रहे हैं। वह भी कच्चे नक्शे के आधार पर। 5.47 एकड़ की कुल कृषि भूमि में करीब 172063.21 स्क्वेयर फीट में बन रही कॉलोनी में टी आकार के लगभग 112 प्लाॅट काटे गए हैं। फिलहाल इन्हें एंग्रीमेंट के आधार पर बेचा और खरीदा जा रहा है। दशकों पुराने नहर नाले को पाटकर भू माफिया से मिलीभगत के आरोप लगने के बाद अब प्रशासनिक अधिकारी भी डैमेज कंट्रोल में लगे थे।


भू माफियाओं के हौसले बुलंद, प्रशासन सुस्त:

छत्तीसगढ़ सरकार दबंग भू माफियाओं पर लाख शिकंजा कसने की बातें कहे लेकिन बालोद जिले की जो वास्तविक हकीकत है वह कुछ और ही बयां कर रही है। बेखौफ दबंग भूमाफिया सरकारी संपत्ति पर भी शिकंजा कसते जा रहे हैं और आम लोग प्रशासन से हस्तक्षेप की गुहार लगाते हैं, तो सिर्फ बदले में आश्वासन ही मिलता है। यहां भूमाफियाओं ने अवैध प्लाटिंग को अपना मुख्य कारोबार बना लिया है। शहर और आसपास तेजी से अवैध प्लाटिंग की जा रही है। खेतों से लेकर सरकारी संपत्ति पर भी अवैध कब्जे किए जा रहे हैं।

खेतों को मैदान बनाकर हो रही अवैध प्लॉटिंग

जिला मुख्यालय में अवैध प्लाटिंग का खेल कही चुपचाप तो कही धडल्ले से खुलेआम चल रहा है। इन प्लॉटों को बेचने में कई दलाल सक्रिय है। शासन की गाइडलाइन के अनुसार न तो भूमि का विधिवत् डायवर्सन किया जा रहा है और न ही विकास शुल्क भरकर विधिवत कॉलोनी विकसित कर प्लॉट बनाकर बेचे जा रहे है। इस तरह के अवैध ले आउट की बाढ़ सी आ गई है। आम लोग कम दाम के चक्कर में इन खेतों में मकान बनाने के लिए सपने देख रहे है परंतु मकान बनाने के बाद उन्हें न तो पक्की सडक़ मिल रही है और न ही नाली, पेयजल और बिजली की सुविधा तो दूर की बात है। इससे शासन को भी लाखों रुपए का राजस्व का नुकसान हो रहा है।

नहीं लिया लाइसेंस

नियमानुसार निजी भूमि पर कालोनी का निर्माण कराने से पहले लाइसेंस लेना पड़ता है। कालोनाइजर को संबंधित नगर पालिका से डायवर्सन के लिए एनओसी लेना होता है। कालोनाइजर को ट्रांसफार्मर, पानी, सड़क का निर्माण कराना होगा। पार्क के लिए भूमि आरक्षित रखनी होगी। टाउन एण्ड कंट्री प्लानिंग से भी कालोनी निर्माण के लिए अनुमति लेनी होगी। एक एकड़ से कम क्षेत्र में कालोनी बनाई जा रही है तो पालिका में वर्तमान रेट का 15 प्रतिशत आश्रय शुल्क जमा करना पड़ता है, अगर एक एकड़ से ज्यादा जमीन है तो एयर डिस्टेंस दो किमी के भीतर ईडब्ल्यूएस बनाने के लिए जमीन छोड़नी पड़ती है।

औपचारिकता पूरी नहीं कर रहे

कृषि योग्य भूमि को प्लाट के रूप में विकसित कर खरीदी बिक्री के लिए नियमानुसार डायवर्सन करना पड़ता है। एक से अधिक प्लाट काटने के बाद नियमानुसार कॉलोनाइजर एक्ट के तहत सभी औपचारिकता पूरी करने के बाद उसकी खरीदी बिक्री होनी चाहिए। लेकिन बिना पंजीयन के ही न केवल आवासीय कालोनी की तैयारी हैं बल्कि खेत खलिहान को भी आवास के रूप में धड़ल्ले से अवैध प्लाटिंग तक कर रहे हैं।

आगे और हो सकती है कार्यवाही

आपको बतादे नगर के पाररास मुक्तिधाम के पास किए जा रहे इस अवैध प्लाटिंग से कॉलोनाइजर ने भले ही नाली में बनाए रास्ते को हटा दिया गया है लेकिन आगे राजस्व विभाग और नपा बालोद द्वारा इन प्लाटिंग करने वाले वाले अवैध कॉलोनाइजर के खिलाफ कार्यवाही कर सकती है वही मामले में आने वाले दिनों में अन्य विभागों से भी नोटिस जारी हो सकती है।

मामले में आपको बतादे इस अवैध प्लाटिंग को तार दुर्ग के कुछ रसूखदारों के अलावा स्थानीय जमीन कारोबारियों से जुड़े है जिसमे बड़ा निवेश दुर्ग के कारोबारियों द्वारा किया गया और प्लाटिंग के इस काम को बालोद कुछ जमीन कारोबारियों द्वारा किया जा रहा था लेकिन मामला उजागर होने के बाद मामला फिलहाल कुछ दिनों के लिए ठंडे बस्ते में जा सकता है।

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